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Premanand Maharaj: महादेव कौ कैसे करें प्रसन्न, और किस नाम का करें जाप? प्रेमानंद महाराज ने क्या बताया

Premanand Maharaj:भगवान शिव की पूजा का स्वरूप अत्यंत सरल माना गया है. उन्हें जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करना प्रिय है. मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया स्मरण और भक्ति उन्हें शीघ्र प्रसन्न कर देती है.

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प्रेमानंद महाराज (Photo: Instagram/@Bhajanmargofficial)
प्रेमानंद महाराज (Photo: Instagram/@Bhajanmargofficial)

Premanand Maharaj: हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों में सबसे महान माना गया है. उन्हें महादेव, भोलेनाथ, आशुतोष और औघड़दानी जैसे अनेक नामों से जाना जाता है. मान्यता है कि वे बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं और सच्चे मन से की गई साधना को तुरंत स्वीकार करते हैं. इसी कारण श्रद्धालु उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, शिवालय जाते हैं और अलग-अलग प्रकार से उनकी पूजा करते हैं.

प्रेमानंद महाराज ने क्या बताया

प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भगवान शिव की आराधना को लेकर एक अत्यंत सरल और सहज मार्ग बताया है. उनका कहना है कि शिव जी को पाने के लिए कठिन साधना या अधिक धन खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती. सच्ची भावना और श्रद्धा ही सबसे बड़ा उपाय है. महाराज जी न केवल शिव को प्रसन्न करने का तरीका बताते हैं, बल्कि यह भी समझाते हैं कि किस नाम का जप करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है.

भोलेनाथ को क्या चढ़ाएं

प्रेमानंद महाराज के अनुसार भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करना अत्यंत प्रिय है. इसके साथ यदि शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाए, तो वे बहुत प्रसन्न होते हैं. वे कहते हैं कि यदि किसी को मंत्रों का ज्ञान नहीं है, तो केवल गुरु मंत्र का स्मरण करते हुए बिल्व पत्र चढ़ा देना भी पर्याप्त है. महाराज जी का मानना है कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए बड़े अनुष्ठान आवश्यक नहीं हैं, बल्कि वे तो एक चुल्लू जल से भी संतुष्ट हो जाते हैं.

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शिव पूजा में कुछ वस्तुओं को विशेष महत्व दिया गया है. इनमें धतूरा फल, बिल्व पत्र, अकौड़े के फूल और गंगाजल शामिल हैं. महाराज जी कहते हैं कि जिन चीजों को संसार ठुकरा देता है, उन्हें भगवान शिव सहज भाव से स्वीकार कर लेते हैं. यही कारण है कि वे अपने भक्तों को ऐसे पद और कृपा प्रदान करते हैं, जो बहुत कम लोगों को प्राप्त होती है.

प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि भगवान शिव अत्यंत करुणामय हैं. वे आशुतोष हैं, यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले. उनकी आराधना से व्यक्ति को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य तीनों की प्राप्ति हो सकती है. जो भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में जाता है, उसे खाली हाथ नहीं लौटना पड़ता.

शिव को प्रसन्न करने के लिए ये चीज है जरूरी

महाराज जी यह भी कहते हैं कि महादेव सभी वैष्णवों के गुरु हैं. वे ज्ञानियों के भी मार्गदर्शक हैं और भक्तों के भी. उनका कहना है कि जो व्यक्ति भगवान शिव की निंदा करते हुए यह सोचता है कि उसे हरि प्रेम प्राप्त हो जाएगा, ऐसा कभी संभव नहीं है. उसी प्रकार जो हरि की निंदा कर यह मानता है कि शंकर उसे प्रेम देंगे, वह भी भ्रम में है.

अंत में प्रेमानंद महाराज भगवान शिव के नाम जप पर विशेष जोर देते हैं. वे “सांब सदाशिव” नाम के जप की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि इस नाम में माता उमा और भगवान महादेव दोनों का समावेश है. नियमित रूप से इस नाम का स्मरण करने से जीवन में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति होती है.

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