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Phool Dei 2026: पहाड़ों में बच्चे घर-घर देहरी पर चढ़ाते हैं फूल, जानिए क्यों मनाते हैं 'फूलदेई' का पर्व?

PhoolDei Festival 2026: फूल देई उत्तराखंड का एक पारंपरिक लोकपर्व है जो चैत्र मास की संक्रांति को बसंत के स्वागत में मनाया जाता है. इस दिन बच्चे घर-घर जाकर देहरी पर फूल चढ़ाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. यह त्योहार प्रकृति प्रेम, खुशहाली और पहाड़ी संस्कृति की जीवंतता का अनूठा प्रतीक माना जाता है.

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फूलों का त्योहार बच्चों के लिए खास होता है. (PHOTO:ITG)
फूलों का त्योहार बच्चों के लिए खास होता है. (PHOTO:ITG)

PhoolDei Festival 2026: भारत विभिन्नताओं का देश है. यहां अलग-अलग धर्म, समुदाय, भाषा और परंपराओं के लोग मिल-जुलकर रहते हैं. यही वजह है कि देश के हर राज्य में अलग-अलग त्योहार और परंपराएं देखने को मिलती हैं. उत्तराखंड की संस्कृति भी इसी विविधता का एक सुंदर उदाहरण है. यहां कई लोकपर्व मनाए जाते हैं, जिनमें से एक खास पर्व है फूलदेई. यह त्योहार खास तौर पर बसंत ऋतु के स्वागत और खुशहाली की कामना के लिए मनाया जाता है.

बसंत के आने का प्रतीक है फूलदेई

फूलदेई का त्योहार हर साल चैत्र महीने की शुरुआत में मनाया जाता है. सर्दियों के बाद जब पहाड़ों में नए-नए फूल खिलने लगते हैं और मौसम सुहावना हो जाता है, तब पहाड़ी लोग अपने अंदाज में इस पर्व के जरिए बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं. यह त्योहार नेचर की खूबसूरती और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

बच्चों के लिए खास होता है ये पर्व

यह त्योहार खासतौर पर बच्चों के लिए खास होता है, क्योंकि वह सुबह-सुबह जंगलों और बगीचों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और फिर ग्रुप बनाकर गांव के हर घर की देहरी पर जाकर फूल चढ़ाते हैं. छोटे बच्चे घर की देहरी यानी दहलीज पर फूल डालते हैं और उत्तराखंड का लोकगीत  'फूलदेई, छम्मा देई, देणी द्वार भर भकार…' गाते हैं.

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इस गीत का मतलब होता है कि घर में हमेशा सुख-समृद्धि और अन्न-धन बना रहे. घर के लोग बच्चों को आशीर्वाद देते हैं और उन्हें मिठाई, गुड़ या कुछ पैसे देते हैं. इससे बच्चों में खुशी के साथ-साथ आपसी प्रेम और सम्मान की भावना भी बढ़ती है.

प्रकृति से जुड़ा है यह लोकपर्व

फूलदेई केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ा एक खास मैसेज भी देता है. उत्तराखंड के लोग प्रकृति को बहुत महत्व देते हैं और इस त्योहार के जरिए वे फूलों और हरियाली के प्रति अपना सम्मान दिखाते हैं.

भले ही लोग आज कितने भी मॉर्डन क्यों ना हो गए हो ,लेकिन उत्तराखंड के लोग आज भी फूलदेई का त्योहार पूरे जोश के साथ मनाते हैं. इस दिन बच्चे नए कपड़े पहनते हैं और घर-घर जाकर गीत गाते हैं और पूरे गांव में खुशी का माहौल बन जाता है.

 

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