Holika Dahan 2026: आज, 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है, और कल, 4 मार्च, रंगों की होली का त्योहार मनाया जाएगा. इस बार ग्रहण के कारण होलिका दहन की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम और कन्फ्यूजन देखा गया.
देश के कई हिस्सों में लोग कल ही होलिका दहन कर चुके हैं, वहीं कई स्थानों पर इसे आज किया जाएगा. चूंकि आज दोपहर से ग्रहण का प्रभाव शुरू हो चुका है, इसलिए होलिका दहन का सही और शुभ मुहूर्त में करना बेहद जरूरी है.
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार, आज शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक होलिका दहन करना सबसे उत्तम रहेगा. पंडित शैलेंद्र पांडे के अनुसार, शाम 6:46 बजे के बाद होलिका दहन करना विशेष रूप से सही है. इस समय ना तो ग्रहण का प्रभाव रहेगा और ना ही भद्रा काल का, इसलिए पूजा और होलिका दहन के लिए यह समय बेहद अनुकूल है.
पंडित शैलेंद्र पांडे के अनुसार सही मुहूर्त पर होलिका दहन करने से न केवल पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है. इस बार ग्रहण और भद्रा काल का ध्यान रखते हुए आज का दिन होलिका दहन के लिए सबसे सुरक्षित और शुभ माना गया है.
चंद्र ग्रहण का समय और प्रभाव
पंडित वेद प्रकाश मिश्रा के अनुसार, आज दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा. इस दौरान सूतक काल मान्य रहेगा, इसलिए ग्रहण समाप्ति के बाद ही होलिका दहन करना बेहतर रहेगा. इसके बाद अगले दिन, यानी 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी.
होलिका पूजन मंत्र
भक्त प्रह्लाद का मंत्र- ओम प्रह्लादाय नम:
भगवान नृसिंह का मंत्र- ओम नृसिंहाय नम:
भगवान नृसिंह का गायत्री मंत्र- ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नरसिंह प्रचोदयात।।
भगवान नृसिंह का मंत्र- नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे। उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जितः॥
भगवान नृसिंह का बीज मंत्र- ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।।
परंपरा
होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में भेजा था. भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई.