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Garud Puran: महिलाओं का श्मशान जाना क्यों माना जाता है वर्जित? जानिए धार्मिक कारण

Garud Puran: सनातन धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराएं हैं. अक्सर कहा जाता है कि महिलाओं का श्मशान घाट जाना उचित नहीं माना जाता है. गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं. जानें इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता और धार्मिक तर्क दिए जाते हैं.

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क्या महिलाएं श्मशान जा सकती हैं? (Photo: ITG)
क्या महिलाएं श्मशान जा सकती हैं? (Photo: ITG)

Garud Puran: जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके शरीर को पंचतत्व में विलीन करने के लिए अंतिम संस्कार किया जाता है. परंपरा के अनुसार, इस प्रक्रिया में अधिकतर पुरुष ही शामिल होते हैं और महिलाओं का श्मशान घाट जाना सामान्यतः उचित नहीं माना जाता है. क्या गरुड़ पुराण या धर्मग्रंथों में इसका स्पष्ट जिक्र मिलता है? आइए जानते हैं कि इस विषय में गरुड़ पुराण क्या कहता है. 

क्या कहता है गरुड़ पुराण?

गरुड़ पुराण में इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं. कहा जाता है कि महिलाएं स्वभाव से अधिक भावुक होती हैं, इसलिए श्मशान में उनका अधिक विलाप करना आत्मा की शांति में बाधा बन सकता है. मान्यता है कि अत्यधिक रोने-धोने से आत्मा का मोह बढ़ जाता है, जिससे उसे अपने अगले सफर की ओर बढ़ने में कठिनाई हो सकती है.

इसके अलावा, दाह संस्कार के समय शरीर से कभी-कभी कुछ आवाजें भी उत्पन्न होती हैं, जो लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर सकती हैं. इसी वजह से पहले के समय में महिलाओं को इस दृश्य से दूर रखना उचित समझा जाता था.

एक अन्य मान्यता यह भी है कि श्मशान घाट को ऐसी जगह माना जाता है, जहां नकारात्मक ऊर्जा या शक्तियां सक्रिय होती हैं, जिनका प्रभाव जल्दी पड़ सकता है. इन्हीं धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के कारण प्राचीन समय से महिलाओं को श्मशान घाट जाने से दूर रखा जाता रहा है. हालांकि, आज के समय में कई जगहों पर यह परंपरा बदल रही है और महिलाएं भी अंतिम संस्कार में शामिल होने लगी हैं.

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क्या महिलाएं अंतिम संस्कार कर सकती हैं?

गरुड़ पुराण के प्रेत खंड के अध्याय 8 के मुताबिक, अगर परिवार में कोई पुरुष सदस्य न हो, तो घर की महिलाएं जैसे पत्नी, बेटी या बहन अंतिम संस्कार कर सकती हैं. यानी जब पुरुष सदस्य न हों, तो महिलाओं को पूरी तरह यह जिम्मेदारी निभाने की अनुमति है. अगर परिवार में कोई भी रिश्तेदार मौजूद न हो, तो समाज का प्रमुख व्यक्ति उस मृतक का संस्कार कर सकता है.

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