
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में शव्वाल महीने का चांद नजर आ गया है. बुधवार शाम करीब सवा सात बजे ईद के चांद का दीदार हुआ. गुरुवार 11 अप्रैल को धूमधाम के साथ देशभर में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा. जामा मस्जिद की चांद कमेटी ने थोड़ी देर पहले ही चांद नजर आने का ऐलान किया है. जामा मस्जिद में गुरुवार सुबह 6:30 बजे और फतेहपुरी मस्जिद में सुबह 7:30 बजे ईद की नमाज होगी.
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईद का चांद दिखन ेके बाद सभी देशवासियों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद दी है.
Best wishes on Eid-ul-Fitr. May this occasion further spread the spirit of compassion, togetherness and peace. May everyone be happy and healthy. Eid Mubarak!
— Narendra Modi (@narendramodi) April 10, 2024
मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शव्वाल का चांद एक दिन पहले ही नजर आ गया जिसकी वजह से वहां ईद का त्योहार बुधवार 10 अप्रैल को मनाया गया है. दुनिया में इस्लाम का सेंटर कहे जाने वाले सऊदी अरब में भी बुधवार को ईद का त्योहार मनाया गया है.
ईद-उल-फितर की सबसे खास बात है कि इस त्योहार की तारीख हिजरी कैलेंडर की वजह से साल-दर-साल बदलती रहती है. यह कैलेंडर चांद पर आधारित होता है. इसमें दिनों की गिनती चांद की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार की जाती है.
ईद का त्योहार खुशियों और भाईचारे का त्योहार है. इस दिन मुस्लिम लोग सुबह ईद की नमाज पढ़ते हैं. इसके बाद एक दूसरे को गले मिलकर ईद की बधाई दी जाती है. इसके साथ ही एक दूसरों के घर जाकर मुंह मीठा भी किया जाता है. मीठे में ईद के दिन के लिए खास सेवइयां, खीर और तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं.

रमजान के बाद शव्वाल की पहली तारीख को मनाते हैं ईद
ईद -उल-फितर का खास त्योहार रमजान का पाक महीने पूरा होने के बाद मनाया जाता है. रमजान के पाक महीने में मुस्लिम लोग रोजा रखकर सच्चे दिल से खुदा की इबादत करते हैं. रमजान के आखिरी रोजे के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद का त्योहार मनाया जाता है.
जानिए क्यों मनाया जाता है ईद का त्योहार
मान्यताओं के अनुसार, इस्लाम के आखिरी पैगंबर नबी मुहम्मद ने जंग-ए-बद्र में जीत हासिल की थी जिसकी खुशी में ईद का त्योहार मनाया जाता है. पैगंबर मुहम्मद के लिए जंग-ए-बद्र जीतना आसान नहीं था क्योंकि उनके सामने दुश्मनों की भारी भरकम फौज थी जबकि उनके साथ सिर्फ 303 अनुयायी मौजूद थे.
खास बात है कि वह रमजान का महीना चल रहा था और पैगंबर और उनके सभी साथियों ने रोजा रखा हुआ था. इसके बावजूद भी पैगंबर ने वीरता का सबूत दिखाते हुए दुश्मन की फौज को धूल चटा दी थी. जंग-ए-बद्र की जीत के बाद ईद का त्योहार मनाया गया था.