
अंबानी परिवार की धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था किसी से नहीं छिपी है. परिवार के सदस्य खास मौकों पर देश के प्रमुख मंदिरों में पूजा-पाठ करते दिखाई देते हैं. इनके लाइफस्टाइल में भी सनातन परंपरा की छाप साफ दिखाई देती है. अनंत अंबानी की 'शिवा वॉच' इसका प्रमाण है. दरअसल, सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की एक बेहद खास और यूनीक घड़ी ने सबका ध्यान खींच लिया है. आइए जानते हैं कि अनंत की यह कीमती घड़ी इतनी खास क्यों हैं.
इस लग्जरी वॉच की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए Jacob & Co. ने बताया कि अनंत अंबानी ने कस्टम 'Opera Godfather Baguette Shiva' वॉच पहनी है. घड़ी के डायल में भगवान शिव की एक छोटी सी प्रतिमा को कस्टमाइज करके लगाया गया है. साथ ही, इसमें एक रोज गोल्ड कलर का ओम और त्रिशूल भी साफ दिखाई दे रहे हैं. शास्त्रों में इन्हें भगवान शिव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. यह अनोखी घड़ी अनंत की भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था को दर्शाती है.
कितनी महंगी है 'शिवा वॉच'?
Jacob & Co. ने जानकारी में आगे बताया है कि शिवा घड़ी को 18 कैरेट रोज गोल्ड से तैयार किया गया है. इसके केस पर ही सैकड़ों बैगेट-कट हीरे जड़े गए हैं, जिससे यह एक यूनीक पीस बन जाता है. इस घड़ी को 658 पुर्जों के साथ डिजाइन किया गया है. इसमें एक खास मिनिएचर म्यूजिक बॉक्स सिस्टम भी है, जो बटन दबाते ही मधुर धुन बजाने लगता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घड़ी की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए है.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनंत अंबानी का लग्जरी वॉच कलेक्शन करीब 200 करोड़ रुपए के आस-पास है. इसमें Patek Philippe Grandmaster Chime 6300G-010 जैसी कीमती घड़ियों से लेकर Richard Mille और Skull Blue Sapphire जैसी खास घड़ियां भी हैं.
अध्यात्म के मार्ग पर अनंत
देश के बड़े बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी मौका मिलते ही देश के प्रमुख मंदिरों में दर्शन करने के लिए जाते हैं. 10 अप्रैल को अपने जन्मदिन से ठीक पहले अनंत ने पत्नी राधिका संग नवी मुंबई के नेरुल स्थित कृष्ण काली मंदिर के दर्शन किए थे. इसके बाद अनंत ने दिल खोलकर गरीबों को दान भी किया था. इसके बाद अनंत ने अपने पिता मुकेश अंबानी के साथ भगवान द्वारकाधीश और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जाकर पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ की थी. पिछले साल अपने जन्मदिन से पहले अनंत ने 140 किलोमीट की पदयात्रा की थी. इस दौरान वह जामनगर से लेकर द्वारकाधीश मंदिर तक पैदल गए थे.