Akshaya Tritiya 2026: आज देशभर में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है. अक्षय तृतीया को अखा तीज भी कहा जाता है. अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में पहले से ही उत्साह दिखना शुरू हो जाता है. इस दिन लोग सोना-चांदी, आभूषण वगैरह खरीदते हैं. इन चीजों के अलावा, यह दिन अबूझ मुहूर्त में भी आता है मतलब इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह-शादी, सगाई और कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया पर आज शाम खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.
अक्षय तृतीया की शाम पूजा का ये रहेगा शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया पर आज शाम पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. इस दौरान लक्ष्मी नारायण का पूजन करना बहुत ही शुभ माना जा रहा है. इसके अलावा, ऑफिस में पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 50 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 06 मिनट तक रहने वाला है.
अक्षय तृतीया पर आज शाम ये रहेगा खरीदारी का मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2026 Shubh Muhurat For Shopping)
अगर अक्षय तृतीया पर अभी तक कुछ नहीं खरीदा है तो आज शाम भी खरीदारी के लिए 2 शुभ मुहूर्त मिलने वाले हैं. इनमें जाकर आप सोना, चांदी या अन्य चीजों की शॉपिंग कर सकते हैं.
पहला मुहूर्त (शुभ काल) - चौघड़िया मुहूर्त शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक रहेगा.
दूसरा मुहूर्त (लाभ काल)- आज शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा.
अबूझ मुहूर्त पूरे दिन होने से शाम को किसी भी समय सोना या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन का हर पल शुभ होता है.
अक्षय तृतीया पर क्या क्या खरीदना होता है शुभ?
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें कभी खत्म नहीं होतीं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. आमतौर पर लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदना सबसे शुभ होता है. इसके अलावा, जमीन, घर या प्रॉपर्टी में निवेश करना भी अच्छा माना जाता है, जिससे भविष्य में लाभ मिलता है. कई लोग इस दिन वाहन खरीदते हैं. पूजा से जुड़ी वस्तुएं जैसे भगवान की मूर्ति, चांदी के सिक्के या कलश लेना भी शुभ होता है.
अक्षय तृतीया का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. यह दिन 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी बिना पंचांग देखे भी किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है. कहा जाता है कि इस दिन महाभारत के रचयिता वेदव्यास ने गणेश जी को महाभारत लिखाना शुरू किया था. इसी दिन मां अन्नपूर्णा का प्रकट होना भी माना जाता है, जो अन्न और धन की देवी हैं. मान्यता यह भी है कि कुबेर को इस दिन धन का खजाना प्राप्त हुआ था.