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Hindu Dharam: क्या सच में 84 लाख योनियों से गुजरती है आत्मा? पद्म पुराण में छुपा है रहस्य

Hindu Dharam: पद्म पुराण के मुताबिक, अगर आपको मनुष्य जन्म मिला है तो यह सिर्फ किस्मत नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर है. यह वही समय है जब आप अपने जीवन का उद्देश्य समझ सकते हैं और अपने कर्मों से भविष्य बदल सकते हैं. शायद यही कारण है कि मानव जीवन को सबसे अनमोल कहा गया है.

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पद्म पुराण में छिपा है इंसानी जन्म का रहस्य (Photo: Pixabay)
पद्म पुराण में छिपा है इंसानी जन्म का रहस्य (Photo: Pixabay)

Hindu Dharam: क्या आप जानते हैं कि मनुष्य जन्म को सनातन परंपरा में सबसे दुर्लभ माना गया है. पद्म पुराण के मुताबिक आत्मा को यह शरीर पाने से पहले 84 लाख योनियों से गुजरना पड़ता है. हर जन्म एक तरह की परीक्षा होता है यानी जीवन केवल एक बार नहीं मिलता है. बल्कि आत्मा कई रूपों में भटकती है, तब जाकर उसे मनुष्य योनि प्राप्त होती है. इन 84 लाख योनियों को अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है. पहला वर्ग है योनिज, यानी वे जीव जो माता-पिता के मिलन से जन्म लेते हैं जिनमें भावनाएं, रिश्ते और जीवन-मृत्यु का चक्र होता है. दूसरा वर्ग है अयोनिज, यानी वे जीवन रूप जिन्हें प्रकृति सीधे उत्पन्न करती है, जिनका जन्म पारंपरिक तरीके से नहीं होता है. इसके बाद जीवों को उनके रहने के स्थान के आधार पर भी बांटा गया है- जलचर जो पानी में रहते हैं, थलचर जो जमीन पर चलते हैं और नभचर जो आकाश में उड़ते हैं.

कबीरदास कहते हैं -
'चौरासी लाख जोनि में, फिरि-फिरि जीव अबेर।
अब की बेरि हरि भज ले, पार उतरिहि नेर।'

उत्पत्ति के आधार पर भी जीवन के कई रूप बताए गए हैं-

जरायुज जैसे मनुष्य और गाय, जो गर्भ से जन्म लेते हैं.
अंडज जैसे पक्षी और सरीसृप, जो अंडों से पैदा होते हैं.
स्वेदज वे जीव जो नमी, पसीने या सड़न से उत्पन्न माने जाते हैं.
उद्भिज यानी वे जो धरती से उगते हैं, जैसे पेड़-पौधे.

इन सबका उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है. इसके अनुसार सृष्टि में कुल 84 लाख जीवन रूप हैं- लगभग 9 लाख जलचर, 20 लाख वनस्पतियां, 11 लाख कीट-पतंगे, 10 लाख पक्षी, 30 लाख पशु, 4 लाख मनुष्य, 3 लाख प्रेत योनि और 1 लाख श्रेणियां देव योनि. इस मान्यता के अनुसार, अगर आपको मनुष्य जन्म मिला है तो यह सिर्फ सौभाग्य नहीं, बल्कि एक विशेष अवसर है. क्योंकि इसी योनि में आत्मा सोच सकती है, समझ सकती है और खुद से यह सवाल पूछ सकती है कि, 'मैं कौन हूं और इस जीवन का उद्देश्य क्या है?'

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84 लाख योनियों का गरुड़ पुराण में जिक्र

गरुण पुराण के अनुसार, आत्मा का सफर बहुत लंबा माना जाता है. कहा जाता है कि जीव अनेक जन्मों और अलग-अलग योनियों में भटकने के बाद ही मनुष्य रूप प्राप्त करता है. यही कारण है कि मानव जीवन को इतना महत्वपूर्ण और दुर्लभ माना गया है. यह भी बताया गया है कि आत्मा की अगली अवस्था उसके कर्मों पर निर्भर करती है. अच्छे कर्म करने से आत्मा को बेहतर जन्म मिल सकता है, जैसे मनुष्य या देव रूप. वहीं बुरे कर्म आत्मा को निम्न योनियों में ले जा सकते हैं, जैसे पशु या अन्य जीवों के रूप में.

इसलिए मानव जीवन को खास माना गया है, क्योंकि यही वह अवस्था है जहां व्यक्ति अपने कर्मों को सुधार सकता है और जीवन के असली उद्देश्य को समझ सकता है. मान्यता है कि इसी जन्म में मोक्ष पाने का मार्ग भी खुलता है, इसलिए इसे 'मोक्ष का द्वार' कहा जाता है.

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