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Jivitputrika Vrat: क्या है जितिया व्रत की पूजन विधि? इन गलतियों से करें किनारा

जीवित्पुत्रिका व्रत कठिन व्रतों में से एक है. ​इस व्रत में बिना पानी पीए कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत पूर्ण किया जाता है.

क्या है जितिया व्रत की पूजन विधि? क्या है जितिया व्रत की पूजन विधि?
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसे नहीं रखना चाहिए जितिया व्रत?
  • व्रत रखने वाली महिलाएं एक दिन पहले ही तामसिक भोजन ना करें

आश्विन मास (Ashwin maas) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत (Jivitputrika Vrat) रखने की परंपरा है. इसे जितिया व्रत (Jitiya Vrat 2020) भी कहा जाता है. बिना आहार और निर्जल रहकर माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुखमयी जीवन के लिए इस दिन व्रत को रखती हैं. इस बार ये व्रत गुरुवार, 10 सितंबर यानि कल रखा जाएगा.

वैसे ये पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है. सप्तमी तिथि को नहाय-खाय के बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इसके बाद नवमी तिथि को भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर उनके मंत्रों का जाप किया जाता है. इस व्रत के प्रमाण महाभारत की कथा जुड़े हैं.

किसे नहीं रखना चाहिए व्रत?
जीवित्पुत्रिका व्रत कठिन व्रतों में से एक है. ​इस व्रत में बिना पानी पीए कठिन नियमों का पालन करते हुए व्रत पूर्ण किया जाता है. लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखने की भी जरूरत है. जिन महिलाओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उनको इस व्रत को नहीं करना चाहिए. गर्भवती महिलाओं ये व्रत ना रखकर सिर्फ पूजा कर लें तो बेहतर होगा.

व्रत में बरतें ये सावधानियां
व्रत रखने वाली महिलाएं एक दिन पहले ही तामसिक भोजन ना करें. लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन ना करें. संयम का दूसरा नाम ही व्रत है, व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है. इसलिए मन में किसी तरह का छल-कपट भी नहीं रखना चाहिए.

क्या है पूजा की विधि?
इस व्रत में प्रसाद और रंग-बिरंगे धागे अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद संतान को सुरक्षा कवच के रूप में धागे पहना दिए जाते हैं. उनकी आयु की कामना करके उन्हेंआशीर्वाद दिया जाता है. इसके बाद व्रत का पारायण किया जाता है.

 

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