हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी के रूप में मनाया जाता है. अपरा एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार अपरा एकादशी 18 मई को पड़ रही है. अपरा एकादशी पर विष्णु भगवान की पूजा अर्चना का भी अपना अलग महत्व होता है.
अपरा एकादशी पर श्रद्धालु पूरा दिन व्रत रहकर शाम के समय भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं जिससे उनको मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि अपनी गलतियों की क्षमा प्राप्ति के लिए अपरा एकादशी पर विधि विधान से पूजा अर्चना करने से भगवान विष्णु की कृपा अवश्य मिलती है.
अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ- 17 मई को दोपहर 12:44 बजे
एकादशी तिथि समाप्त- 18 मई को दोपहर 15:08 बजे तक
अपरा एकादशी पारणा मुहूर्त- 19 मई को प्रातः 05:27:52 से 08:11:49 बजे तक
अपरा एकादशी की पूजा विधि
- अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा एक दिन पहले दशमी तिथि की रात्रि से ही शुरू हो जाती है.
- दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए.
- सुबह सूर्योदय से पहले उठें और अपने स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन कर विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए.
- पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करें. इसके बाद धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित करें.
- भगवान विष्णु को अपने सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं.
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- अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी मुश्किलों को खत्म करने की प्रार्थना भगवान विष्णु से करें.
- पूरा दिन निराहार रहकर शाम के समय अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें और फलाहार करें.
- शाम के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाएं.
अपरा एकादशी के दिन बरतें ये सावधानियां
- अपरा एकादशी के दिन देर तक ना सोएं.
- घर में लहसुन प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल भी ना बनाएं.
- एकादशी की पूजा पाठ करते समय साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही पूजा करें.
- अपरा एकादशी का व्रत विधान करते समय परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखें.