राजस्थान के जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामला अभी भी रहस्य बना हुआ है. बुधवार को जोधपुर के निजी अस्पताल में साध्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उनकी मौत के बाद कुछ अनुयायियों ने साध्वी के पिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए. यही वजह है कि उनके पिता वीरम नाथ पर शक गहराता जा रहा है.
आजतक की टीम बालोतरा के परेऊ गांव पहुंची, जहां प्रेम बाईसा को उनके पैतृक गांव में स्थित आश्रम में समाधि दी गई. यहां बड़ी संख्या में अनुयायी मौजूद थे. हर किसी के मन में यही सवाल था कि साध्वी की मौत आखिर कैसे हुई? हालांकि, कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था.
आजतक टीम ने दिवंगत साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ से हर एक पहलू पर बात करने की कोशिश की कि कैसे उनकी तबीयत बिगड़ी? उससे पहले उनकी दिनचर्या क्या थी और तबीयत बिगड़ने के बाद क्या कदम उठाए गए? वायरल वीडियो और उनकी इंस्टाग्राम की पोस्ट? पोस्टमार्टम के लिए क्यों मना किया गया? ये तमाम सवाल हैं, जिनके बारे में लोग जानना चाहते हैं.
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साध्वी के पिता बोले- उनके गले में खराश थी
आजतक से बातचीत करते हुए साध्वी के पिता वीरम नाथ ने बताया कि लगातार कथाओं के कार्यक्रम थे. लास्ट 7 दिनों का कार्यक्रम अजमेर में था. 27 जनवरी की रात को ही हम लेट (रात 1:30) बजे आए थे. सब कुछ सामान्य था. सुबह 10 बजे मुझसे मेरी बेटी ने बोला कि गुरुजी 29 को अपना कार्यक्रम है, और मेरे गले में खराश है. मैं काम में लग गया और करीब 2 घंटे बाद मैंने 11 बजकर 54 मिनट पर क्लिनिक वाले को कॉल किया, जो होम ट्रीटमेंट देता है. उसने कहा कि मैं बाहर हूं, थोड़ा टाइम लग जाएगा.
पिता का कहना है कि इस पर बाईसा ने कहा कि मैं अभी काढा पी लेती हूं. मैंने कहा कि हॉस्पिटल ही चलते हैं. मुझसे कहा कि गुरुजी हॉस्पिटल जाने जैसी कोई बात नहीं है, बुखार है नहीं, गले में केवल खराश है. इसके बाद वो अपनी साधना में लगी रहीं, रियाज करती थीं. पिता का कहना है कि शाम को 5 बजे के करीब फिर गले में खराश की बात कही तो 5 बजकर 4 मिनट पर फिर से उसी क्लिनिक वाले को कॉल किया, उसने कहा कि मैं आ ही रहा हूं, 10-15 मिनट में आ गया.

पिता ने कहा- 'मुझे श्वांस नहीं आ रही' कहकर भागी साध्वी
पिता वीरम नाथ का दावा है कि क्लिनिक वाले ने आते ही बाईसा का चेकअप किया. उसने कहा कि नॉर्मल है, बुखार तो है नहीं, जुकाम है. 3-4 टेबलेट के पत्ते दिए, एक कफ सिरप भी दी और बोला कि जल्दी ठीक होना है तो एक इंजेक्शन लगाना पड़ेगा. जल्दी ठीक होने की बात सुनकर एक इंजेक्शन लगवा दिया और वो 500 रुपए फीस लेकर चला गया.
पिता का कहना है कि इंजेक्शन लगाने के बाद एक के बाद एक 10 छींकें आईं. 10 सेकेंड के अंदर छींकें आईं और मुझे बोला कि पापा टिशू पेपर लेकर आओ. मैंने टिशू पेपर लेकर दिया और पास में रूम में मेरा फोन पड़ा था, कॉल आया तो मैं दौड़कर दूसरे रूम में गया. तब तक वह चिल्लाने लग गईं कि मुझे श्वांस नहीं आ रहा है. ऐसा कहते कहते वो दौड़कर आश्रम के गेट तक पहुंच गईं और नीचे गिर गईं.
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आश्रम में उस वक्त एक लड़का और था. दोनों ने उठाकर गाड़ी में लिटाया और हॉस्पिटल की ओर रवाना हुए. आशापूर्णा सिटी के पास जाते ही मैंने क्लिनिक वाले को कॉल लगाया और कहा कि आपने ऐसा क्या दे दिया, मात्र 3-4 मिनट में ऐसी हालत हो गई है. उसने कहा कि भइया मैंने नॉर्मल इंजेक्शन दिया है. आप कौन से हॉस्पिटल जा रहे हो, मैं वहां उनका इलाज करवा दूंगा. वीरम नाथ के मुताबिक, मेरी बेटी की हालत बहुत नाजुक थी और मुझे कह रही थी 'पापा मुझे न्याय दिला देना.' इसके आगे वो कुछ बोल ही नहीं पाई.

'डॉक्टर्स ने बिना देरी के इलाज किया शुरू'
पिता का दावा है कि निजी हॉस्पिटल पहुंचे, वहां उन्होंने बिना देरी के इलाज शुरू किया. बिना लिखित में ही नाजुक हालत में इलाज शुरू किया. कोई ऐसे एडमिट नहीं करता है, कह देते हैं आप यहां से चले जाओ. हमारे पास वक्त नहीं था. बाईसा की ऐसी हालत देखकर बिना वक्त गंवाए इलाज शुरू कर दिया. कहा -गुरुजी ये बेटी आपकी नहीं हमारी भी है. कोशिश की... हार्ट दबाने की, ऑक्सीजन लगवाया. प्रेम बाईसा को गोदी में लेकर बैठे, वो ही अस्पताल की अंतिम तस्वीर है. गाड़ी में बोला था- उसके बाद तो कुछ बोल नहीं पाए.
साध्वी को क्या परेशानी थी?
इस सवाल के जवाब में साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने कहा कि उस वक्त तो दर्द इंजेक्शन वाला ही था. अगर, ज्यादा गंभीर होता तो क्लिनिक वाला डॉक्टर बता देता कि ये इंजेक्शन लगाने के लायक नहीं है तो आप इसे हॉस्पिटल ले जाओ. तेज बुखार होता, तब भी डॉक्टर उसे इंजेक्शन नहीं लगाता, मेडिसिन देकर चला जाता, कुछ था ही नहीं.
पोस्टमार्टम को लेकर क्या विवाद था?
पोस्टमार्टम को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं. वीरम नाथ ने कहा कि उन्होंने जैसे ही देह त्यागी तो मैं थोड़ा नाजुक हालत में था. निजी हॉस्पिटल वालों ने कहा कि हम आपकी मदद के लिए आपके पहचान वालों को कॉल कर देते हैं. उन लोगों ने भी फोन किए और हमने भी फोन करने की कोशिश की. मैंने बोला कि हम इनको ससम्मान आश्रम ले जाएंगे और पुष्प अर्पित कर मेडिकल के लिए आएंगे. रात के समय मेडिकल होता नहीं है, रात का समय हो गया था. सभी संत आएंगे और अनुयायी भी आएंगे. सुबह मेडिकल के लिए ले जाएंगे, ऐसी मेरी भावना थी. जिस गाड़ी में हम उन्हें लेकर आए थे, उसी गाड़ी में लेकर हम आश्रम गए.

कैसे असामाजिक तत्वों ने घेरा?
कुछ ही मिनटों में आश्रम के आगे सब इकट्ठे हो गए. वीरम नाथ का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने दुष्प्रचार किया. मेरी गाड़ी के कांच तोड़ने की कोशिश की, एक हैंडल तोड़ दिया. मेरा मोबाइल भी छीन लिया. हुल्लड़ करने लगे, नारेबाजी भी की और कहने लगे कि इसको तो मेडिकल ही नहीं करवाना. इस तरह से दुष्प्रचार किया. वीरम नाथ का कहना है कि पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की, लेकिन, वो नहीं मानें.
वायरल वीडियो का सच क्या था?
वायरल वीडियो के बारे में बोलते हुए साध्वी के पिता ने कहा कि वो वीडियो साल 2021 का था. वो पहले बाहर थी. कई दिनों बाद हम मिले तो वो मुझसे गले लग गई. उस वीडियो में आश्रम की अन्य महिलाएं और एक लड़का भी था. लेकिन, वीडियो में लड़के को कट कर दिया और वो वीडियो भेजकर कहा कि मेरे पास इतने मिनट का और वीडियो है. पैसों के लिए और छवि धूमिल करने के लिए वीडियो वायरल कर दिया कि इनको बर्बाद कर देते हैं.
उनके मन में क्या था, वीडियो जारी किया था?
साध्वी के पिता का कहना है कि वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद एक बार तो वह घबरा गई थी. फिर मुझे कहा कि गुरुजी, पापा आप चिंता मत करना, मेरा भी जीवन कैसा है, कोई कितना भी इल्जाम लगा ले. लेकिन, मैं क्या हूं, मुझे पता है. इसके बाद उन्होंने अपना स्टेटमेंट जारी कर दिया. पुलिस में शिकायत भी की. थोड़ी बहुत कार्रवाई भी हुईं. हर वक्त मुझे ढांढस बंधाती थीं कि गुरुजी आप चिंता मत करो, मैं हर परिस्थिति में और हर जगह सत्य पेश करने के लिए अग्नि परीक्षा देने के लिए सक्षम हूं.
अग्नि परीक्षा की बात क्यों आई?
इसके जवाब में वीरम नाथ ने कहा कि कुछ लोग जिस तरह से टिप्पणियां कर रहे थे, इसलिए उन्हें ऐसा कहा. और कर्तव्य भी बनता है कि आप वास्तविकता के हो क्या? उन्होंने एक पोस्ट भी डाली और सनातन के वरिष्ठ पदों पर आसीन संत महात्माओं को लिखित में पत्र भी दिया कि मैं किसी भी तरह की अग्नि परीक्षा देने को तैयार हूं, इसके लिए आप समय और तारीख तय करें. लिखा कि ये दाग मेरे चरित्र पर ही नहीं, भगवे पर भी लग रहा है.

मौत के 4 घंटे बाद पोस्ट आना, बड़ा सवाल है?
साध्वी के इंस्टा अकाउंट पर जो पोस्ट किया गया था, न्याय दिलाने को लेकर... इसके जवाब में साध्वी के पिता वीरम नाथ ने कहा कि वो पोस्ट हमने करवाई, अपने ड्राइवर से. जो उनके अंतिम शब्द थे, मैं रोक नहीं पाया. जीते जी मैं करवा नहीं पाया, जो भी शब्द थे, वो पोस्ट करवा दी. दुनिया चाहे कुछ भी सोचे, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है. मैं उनके भाव को नहीं छुपा पाऊंगा.
सनातन से लगाव कैसे हुआ ?
दिवंगत साध्वी के पिता वीरम नाथ बताते हैं कि जन्म तो यहीं जगराम की ढाणी गिड़ा बालोतरा के अंदर है, इसी जगह पर हुआ. उनकी माताजी का सनातन के प्रति बेहद लगाव था. उन्होंने वैराग्य जीवन जिया, 500 मीटर दूर छोटा सा मंदिर है, वहां 11 महीने तक साध्वी की माताजी ने अन्न छोड़कर तपस्या भी की. हमारे भी अन्न त्यागने का संकल्प था. लेकिन, पूज्य संतों ने इसकी अनुमति नहीं दी.
हम दोनों का यही था कि हम सनातन के लिए बहुत सारे संतों को इकठ्ठा करके सम्मेलन करें. तो उस वक्त लोगों में इतनी प्रति निष्ठा नहीं थी, कहते थे ऐसे ही पाखंड कर रहा होगा. इसके बाद हमने अन्न त्याग दिया. संतों ने कहा कि ऐसे हठ नहीं करना चाहिए, आपका जो भी मन है, हम पूरा करवाएंगे. हमारा संकल्प पूरा नहीं हुआ तो हमने यह जगह छोड़ दी और प्रेम बाईसा को 8 किलोमीटर दूर उनके ननिहाल छोड़ दिया.
ननिहाल छोड़ा, पहुंचे हरिद्वार
साध्वी के बारे में पिता कहते हैं कि ननिहाल से वो हरिद्वार चले गए. कुछ दिन हरिद्वार में मंदिरों में दर्शन किए. फिर जोधपुर आ गए. इसके बाद किसी अन्य स्थान चले गए, जहां छोटा सा स्थान था. वहां साधना में लग गए. यही सोचा कि जब तक यहां मंदिर नहीं बनेगा और हमारा संकल्प पूरा नहीं होगा, तब तक अन्न नहीं लेंगे. लोगों ने देखा तो गांव के लोग आए और दूसरे दिन से वहां सारी व्यवस्था शुरू कर दी. 21 दिनों में उन्होंने वहां मंदिर बनवा दिया. प्रतिष्ठा और संत सम्मेलन भी करवा दिया. माताजी को भी अन्न ग्रहण करवा दिया.

शरीर छोड़ने का किया था दावा
वीरम नाथ के मुताबिक, प्रेम बाईसा की माताजी को करीब 5-7 साल में उन्हें लगा कि मुझे अब नहीं रहना है और मैं शरीर छोड़ दूंगी तो हमें और ग्रामीणों को बोला कि मैं जहां पक्षियों को चुगा देती हूं. उस जगह मेरी समाधि दे दो, तैयारी करो, मैं शरीर छोड़ रही हूं. हमने ऐसा नहीं सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है.
उन्होंने कॉल करके प्रेम बाईसा को ननिहाल से बुलवा लिया और आशीर्वाद देकर कहा कि अब मेरा जो अधूरा सपना है, वो आपको पूरा करना है. दो दिन वे प्रेम बाईसा के साथ रहीं और अचानक तबीयत खराब हो गईं. जोधपुर लेकर रवाना भी हुए. लेकिन, रास्ते में उन्होंने प्राण त्याग दिए.
जास्ती आश्रम में रहने लगीं प्रेम बाईसा
इसके बाद प्रेम बाईसा मेरे साथ जास्ती आश्रम (जोधपुर) में ही रहने लगीं. वहीं आश्रम में ही शिक्षा ग्रहण करती थीं. महीने में ही उनको भागवत और रामायण कंठस्थ हो गई, संस्कृत के श्लोक भी कंठस्थ हो गए. फिर कुछ समय के लिए जोधपुर गए. संतों के सानिध्य में रहकर कथा करनी शुरू कर दी.
आपकी मांग क्या है?
इसके जवाब में वीरम नाथ कहते हैं कि हमें सनातन, संतों पर भरोसा है. देश की जनता पर भरोसा है. सभी पर भरोसा है कि सब चाहेंगे तो न्याय और सच सबके सामने आ जाएगा. वो तो चली गईं, लेकिन सच सामने आ जाएगा. सोशल मीडिया पर अनर्गल टिप्पणियां करने वालों के बारे में वीरम नाथ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर इस तरह की कोई आफत आती है तो बिना सच जाने अपनी मर्जी से कोई टिप्पणी न करें.