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बंजारा समाज की बेटी ने साउथ अफ्रीका में बाल श्रम पर दी दिल जीतने वाली स्पीच, खूब हो रही चर्चा

Rajasthan News: राजस्थान के बंजारा समाज की एक लड़की ने अलवर जिले का नाम रोशन कर दिया है. कभी बालश्रम करने वाली तारा बंजारा ने साउथ अफ्रीका में बालश्रम पर व्याख्यान दिया. उसने वैश्विक जनप्रतिनिधियों को अपनी भाषा में संबोधित किया. तारा बंजारा समाज की इकलौती ऐसी लड़की है, जो बीए की पढ़ाई कर रही है.

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साउथ अफ्रीका में बाल श्रम पर भाषण देने वाली तारा बंजारा.
साउथ अफ्रीका में बाल श्रम पर भाषण देने वाली तारा बंजारा.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झोपड़ीनुमा मकान में रहने वाली तारा बनी मिसाल
  • माता-पिता के साथ सड़क निर्माण का कर चुकी है काम

Rajasthan News: 'हौसलों की उड़ान हो तो मंजिलें आसान हो जाती हैं...' राजस्थान के अलवर की बेटी तारा बंजारा ने यह बात साबित कर दिखाई है. कभी परिवार के साथ नमक बेचने और सड़क निर्माण में मजदूरी करने वाली तारा बंजारा ने साउथ अफ्रीका में बाल श्रम को लेकर स्पीच देकर भारत का नाम रोशन किया है. व्याख्यान के बाद वापस लौटकर तारा अपनी झोपड़ी में मां के साथ जीवन यापन कर रही है. उसकी जिंदगी और हौसले अब युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत साबित हो रहे हैं.

अलवर के थानागाजी के नीमड़ी गांव की बंजारा बस्ती की रहने वाली तारा बंजारा ने दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलन में भाग लिया. तारा ने वैश्विक समुदाय के सामने अपनी बात रखी. वैश्विक समुदाय को बाल श्रम एवं बाल शोषण को खत्म करने का संकल्प दिलवाया. लोगों को संबोधित करते हुए तारा ने अपनी भाषा में सम्मेलन में पहुंचे देशों के प्रतिनिधियों से सवाल पूछे. बाल श्रम को रोकने की अपील करते हुए सबको साथ मिलकर काम करने की अपील की. इलाके में तारा बंजारा समाज की पहली लड़की है, जो बीए की पढ़ाई कर रही है.

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दुनिया से बाल श्रम उन्मूलन के लिए डरबन में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) ने 5वें सम्मेलन का आयोजन किया. इसमें अलवर के थानागाजी उपखंड क्षेत्र की बंजारा बस्ती निमड़ी गांव की तारा ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साथ भाग लिया. तारा पूर्व में बाल मजदूर रह चुकी है. घुमंतू बंजारा समुदाय कि बेटी तारा ने सम्मेलन में वैश्विक समुदाय को बाल श्रम एवं बाल शोषण समाप्त करने का संकल्प दिलवाया. तारा ने अलवर जिले का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है. डरबन से लौटने के बाद तारा अपने एक झोपड़ीनुमा घर में रहती है.

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अलवर की बेटी ने साउथ अफ्रीका में बाल श्रम पर दिया भाषण, कभी करती थी बाल मजदूरी
तारा बंजारा की मां.

मौके पर तारा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि यदि हम गरीब बच्चों को वोट देने का अधिकार नहीं है तो क्या हमसे मजदूरी करवाओगे? सब बच्चों को पढ़ने का अधिकार है. किसी भी बच्चे को बाल मजदूरी नहीं करनी चाहिए. इस अवसर पर तारा बंजारा ने अपने जैसे बच्चों के बाल श्रम, चाइल्ड ट्रैफिकिंग, बाल यौन शौषण से सुरक्षा की मांग करते हुए वैश्विक समुदाय के प्रतिभागियों को संकल्प दिलाया कि कोई भी बच्चा बाल श्रम, चाइल्ड ट्रैफिकिंग व बाल शोषण का शिकार न हो. तारा ने अपनी बात अपनी भाषा और अपने शब्दों में कही.

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साल 2012 में बंजारा बस्ती निमड़ी में बाल आश्रम ट्रस्ट संस्थापिका सुमेधा कैलाश ने बंजारा शिक्षा केंद्र खोला था, तब तारा लगभग 7-8 साल की थी. तारा पूर्व में बाल मजदूर रह चुकी है. तारा बंजारा के पिता सरदारा बंजारा और मां कमला देवी हैं. तारा का परिवार पूर्व में नमक बेचने और सड़क निर्माण कार्य में मजदूरी का कार्य करता था. तारा सड़क पर झाड़ू लगाकर साफ-सफाई का काम करती थी. बंजारा शिक्षा केंद्र नीमड़ी में तारा का दाखिला करवाया गया था. उस जैसे अन्य बच्चों को भी केंद्र में दाखिला दिलाया गया. उनको मिड डे मील, स्कूल ड्रेस, कपड़े व अन्य चीजें उपलब्ध कराई गईं. इसके बाद से तारा ने एक मुहिम शुरू की, जो लगातार आज भी जारी है.

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अलवर की बेटी ने साउथ अफ्रीका में बाल श्रम पर दिया भाषण, कभी करती थी बाल मजदूरी

करीब डेढ़ वर्ष पहले तारा की छोटी बहन की सगाई के लिए कुछ रिश्तेदार आए थे. तारा की बहन उस समय करीब 13 साल से अधिक थी. तारा को पता चला कि उसके माता-पिता उसकी छोटी बहन की शादी कर रहे हैं तो इस बारे में उसने अपने पूरे परिवार व रिश्तेदारों को समझाया. बाल विवाह नहीं करने के लिए कहा. अपनी बहन का बाल विवाह रोकने के लिए तारा को खासा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन वह बाल विवाह रोकने में सफल रही. तारा व उसके जैसे कई बच्चे एक एनजीओ के साथ जुड़कर समाज में बेहतर काम कर रहे हैं. उनके काम को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है.

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