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सात बैंक खाते, 4.27 करोड़ की ठगी और गिरफ्तारी... कोटा में सामने आई गैंग की साइबर लूट की पूरी कहानी

राजस्थान के कोटा में पुलिस ने साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने हरियाणा की नूंह गैंग के दो सदस्यों को पकड़ा है. पुलिस ने पड़ताल की तो सामने आया कि 7 बैंक खातों के जरिए 4.27 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया. इस गैंग का मास्टरमाइंड अकील अभी फरार है.

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कमीशन का लालच देकर लोगों के बैंक खाते करते थे इस्तेमाल. (Photo: Representational)
कमीशन का लालच देकर लोगों के बैंक खाते करते थे इस्तेमाल. (Photo: Representational)

मोबाइल पर एक कॉल आती है- सर, इन्वेस्टमेंट करिए, पैसा दोगुना होगा. दूसरी कॉल- आप डिजिटल अरेस्ट में हैं, तुरंत पैसा ट्रांसफर कीजिए. तीसरी बार जब शक होता है, तब तक अकाउंट साफ हो चुका होता है. यहीं से साइबर ठगी की कहानी शुरू होती है. कोटा ग्रामीण पुलिस ने हरियाणा के नूंह की कुख्यात साइबर गैंग के दो सदस्यों को पकड़ा है. नाम- जावेद और इरशाद... काम- देशभर में ऑनलाइन ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट और टास्क के नाम पर लोगों को चूना लगाना. सिर्फ 7 बैंक खातों में 4 करोड़ 27 लाख का खेल पकड़ा गया.

सोचिए, सिर्फ सात खाते. पुलिस का कहना है कि नेटवर्क में 100 से ज्यादा लोग हैं. पुलिस का कहना है कि ये दोनों ठगी गैंग के सदस्य हैं. इनका काम था बैंक खातों से ठगी का पैसा निकालना और उसे आगे पहुंचाना. इनके पास से 4 एटीएम कार्ड, 2 पीओएस मशीन, 4 मोबाइल, 5 सिम कार्ड, 1 लाख 71 हजार रुपये कैश और एक कार मिली. यानी पूरा साइबर फ्रॉड का मोबाइल ऑफिस.

ये लोग खुद लोगों के बैंक खाते खरीदते थे. मतलब कोई आपके पास आए, बोले- भाई, खाता दे दो, 10 प्रतिशत कमीशन मिलेगा. आप लालच में दे दें. फिर वही खाता करोड़ों की ठगी का रास्ता बन जाए. ऐसा ही हुआ झालावाड़ के कुछ लोगों के साथ. इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड था अकील मोहम्मद. फिलहाल वह फरार है.

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यह भी पढ़ें: फर्जी सिम, नकली खाते और करोड़ों की लूट... सूरत में ₹47.44 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़

पुलिस का अंदाजा है कि नेटवर्क बहुत बड़ा है. झालावाड़ में एक कपल और उनके भाई के खाते भी इसी तरह लिए गए. कमीशन का लालच दिया गया. खाते इस्तेमाल हुए. एक खाते में 3 लाख 10 हजार रुपए आए. 

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पूछताछ में दोनों ने एक नाम बताया- अकील मोहम्मद का... यही इस गैंग का मास्टरमाइंड है. अकील सिर्फ फोन पर आदेश देता है. कौन खाता जुटाएगा, कौन पैसा निकालेगा, किस शहर में कौन जाएगा- सब कुछ मोबाइल पर तय होता है. 

पुलिस के मुताबिक गैंग में 100 से ज्यादा सदस्य हैं. कोई फर्जी सिम खरीदता है. कोई बैंक खाते जुटाता है. कोई कॉल करके लोगों को फंसाता है. कोई कैश निकालता है. यानी पूरा एक संगठित नेटवर्क. और जांच में ये भी पता चला कि ये लोग जल्द ही 15 नए बैंक खाते लेने वाले थे. मतलब अगर पुलिस देर करती, तो आने वाले दिनों में करोड़ों का और खेल होना तय था.

कहानी का एक और किरदार है- शाकिर. जावेद का दोस्त. मूल रूप से झालावाड़ का रहने वाला है. वही लोकल कनेक्शन था. वही लोगों को समझाता- खाता दे दो, कुछ नहीं होगा. उसके जरिए तीन बैंक खाते गैंग तक पहुंचे. यहां तक कि एक आरोपी ने अपनी पत्नी का खाता भी इस्तेमाल के लिए दे दिया. पुलिस ने पति को पकड़ लिया, लेकिन उसका भाई और शाकिर अभी फरार हैं.

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ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया कि हरियाणा के नूंह के रहने वाले जावेद और इरशाद को गिरफ्तार कर लिया गया है. दोनों गैंग के सदस्य हैं और खातों के जरिए ठगी की रकम निकालने का काम करते थे. पुलिस ने इनके कब्जे से 4 एटीएम कार्ड, 2 पीओएस मशीन, 4 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1 लाख 71 हजार रुपये कैश और एक कार बरामद की है. फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है.

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