जयपुर में एक हाथी के साथ किए गए फोटोशूट को लेकर शुरू हुआ ‘पिंक एलिफेंट’ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. यह मामला तब सामने आया जब 65 साल की हथिनी चंचल की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें उसे गुलाबी रंग में रंगा गया था. यह फोटोशूट बार्सिलोना की रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा आयोजित किया गया था, जिन्होंने इसे जयपुर की ‘पिंक सिटी’ पहचान से प्रेरित बताया.
इन तस्वीरों में एक मॉडल भी पूरी तरह गुलाबी रंग में रंगी हुई चंचल के ऊपर बैठी नजर आई. यह फोटोशूट जयपुर के पास एक पुराने और खाली पड़े मंदिर में किया गया था. जूलिया बुरुलेवा का कहना है कि फोटोशूट में इस्तेमाल किया गया रंग ऑर्गेनिक था और स्थानीय स्तर पर बना हुआ था, जो होली के गुलाल जैसा था. उन्होंने यह भी कहा कि रंग कुछ ही मिनटों में धो दिया गया था और इससे हाथी को कोई नुकसान नहीं हुआ.
हथिनी चंचल की मौत के बाद बढ़ा विवाद
हालांकि, जैसे ही ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलीं, लोगों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. उनका कहना था कि हाथियों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है और उन्हें इस तरह के प्रयोगों या पर्यटन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि फोटोग्राफर को इस तरह का काम डिजिटल एडिटिंग या एआई के जरिए करना चाहिए था.
विवाद उस समय और बढ़ गया जब यह खबर सामने आई कि चंचल की फरवरी में मौत हो गई थी, जो फोटोशूट के कुछ महीनों बाद की घटना है. इसके बाद कई लोगों ने यह अंदेशा जताया कि रंग या फोटोशूट के दौरान हुए तनाव के कारण उसकी मौत हुई होगी. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के वन अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है कि कहीं पशु कल्याण से जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ.
वहीं चंचल के मालिक शादिक खान ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि हाथी की मौत उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई और वह पहले से ही करीब 65 साल की थी. उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी फोटोशूट और मौत के बीच किसी तरह का संबंध नहीं पाया गया है.
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने उठाए क्रूरता पर सवाल
अब यह विवाद सिर्फ एक फोटोशूट तक सीमित नहीं रहा. अभिनेत्री और बीजेपी नेता रूपाली गांगुली ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने देशभर में हाथियों की सवारी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है और कहा है कि यह घटना दिखाती है कि लोग अब हाथियों के शोषण के खिलाफ खुलकर आवाज उठा रहे हैं.