बीते दिनों राजस्थान के जयपुर में सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड में सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति के लालच में एक बेटी ने अपनी विधवा मां की हत्या करवा दी. कथित तौर पर सुपारी देकर वारदात को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जांच ने पूरा मामला उजागर कर दिया.
चचेरे भाई बलराम से आयुषी का अफेयर?
24 साल की उम्र में अपनी ही मां के खिलाफ इतनी भयानक साजिश की बात पहले ही हैरान कर रही है. इस बीच मामले में रोज हो रहे नए खुलासे पुलिस का भी सिर चकरा दे रहे हैं. अब आरोपी की मां नीरजा शर्मा के भाई और आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने दावा किया है कि आयुषी के चचेरे भाई बलराम ने उसको अपने प्रेम में फंसा रखा था या किसी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करता था. राकेश ने पुलिस से हत्या के दिन से फरार चल रहे बलराम को गिरफ्तार कर पूरे मामले की जांच की मांग की है.
इससे एक दिन पहले राकेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2025 में आयुषी ने अपने चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर बीमार पिता विजय शर्मा की भी हत्या की थी. हालांकि आयुषी ने पुलिस हिरासत में इस बात से साफ इंकार किया है.
'सबकुछ मेरे पापा का था तो मां का हक क्यों?'
इधर आयुषी ने पुलिस को कुछ वीडियो दिखाए हैं जिसमें आयुषी की मां नीरजा शर्मा पिता विजय वशिष्ठ को मारती दिखाई दे रही है. आयुषी का कहना है कि मां से उसके नफरत की वजह यह थी कि वो पिता विजय शर्मा को इतना परेशान करती थी कि उनका ब्रेन हैमरेज हो गया है. मां से पिता को बचाने के लिए उनको घर से लेकर गई थी. पिता उसे बहुत प्यार करते थे और पिता मां नीरजा शर्मा के बजाय उसके साथ रहना पसंद करते थे. वो नौकरी और संपत्ति इसलिए पाना चाहती था क्योंकि उसे लगता था कि वो सबकुछ उसके पिता का है और इस पर मां का हक नहीं होना चाहिए था.
हालांकि, उसने यह माना है कि वो मां की बजाए अपने दादी की बात ज्यादा मानती थी और चचेरा भाई बलराम उसका गार्जियन था. इसके अलावा आयुषी ताउ और बड़ी मां के कहा ही मानती थी . घर में हर वक्त मां के गलत व्यवहार को लेकर चर्चा होती रहती थी. और इसीलिए सभी लोग मां नीरजा शर्मा को मारने के प्लान में शामिल थे. हालांकि परिवार में सभी एक दूसरे पर अवैध संबंध रखने का आरोप लगाकर झगड़ा करते थे.
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट में एलडीसी रहे विजय वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में अपनी पत्नी नीरजा शर्मा, बेटी आयुषी शर्मा और मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे के साथ रहते थे. करीब एक साल पहले विजय शर्मा का निधन हो गया. उस समय आयुषी ने 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी. पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति का मामला सामने आया तो आयुषी ने खुद नौकरी करने की इच्छा जताई. शुरुआत में उसकी मां भी इसके लिए राजी थीं, लेकिन नीरजा के भाई, जो निचली अदालत में एलडीसी हैं, ने उन्हें समझाया कि वह पढ़ी-लिखी हैं और दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर है. उन्होंने सलाह दी कि आयुषी की आगे की पढ़ाई जारी रखी जाए और फिलहाल नौकरी नीरजा शर्मा कर लें. इसके बाद नीरजा ने अपने दिवंगत पति के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर ली.
मां ने ले ली अनुकंपा नियुक्ति तो घर छोड़ गई आयुषी
बताया जाता है कि इस फैसले से आयुषी नाराज हो गई और वह कल्याण कॉलोनी स्थित अपने पिता के पुराने मकान में रहने चली गई. वहां उसने अपने ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में दाखिला लिया और दोनों वहीं रहने लगे. आरोप है कि इसी दौरान आयुषी ने बलराम के सामने अपनी मां की हत्या कराने की इच्छा जाहिर की. कथित तौर पर उसने कहा कि यदि वह इस काम में मदद करेगा तो आगरा रोड स्थित पांच बीघा और भरतपुर की चार बीघा जमीन, जिनकी कीमत करीब पांच-पांच करोड़ रुपये बताई गई, उसे दे देगी. साथ ही मां की मौत के बाद मिलने वाली नौकरी और जयपुर के दोनों मकानों पर भी उसका अधिकार हो जाएगा.
पहली कोशिश में बच गई थी नीरजा
आरोपों के अनुसार, बलराम ने यह बात अपने पिता मोहन शर्मा को बताई. इसके बाद कथित तौर पर हत्या की साजिश तैयार की गई. शुरुआती योजना नीरजा शर्मा को कार से टक्कर मारकर घटना को सड़क हादसा दिखाने की थी. आरोप है कि मोहन शर्मा ने इसके लिए भरतपुर निवासी हेमंत शर्मा से संपर्क किया. करीब एक महीने पहले हेमंत ने थार गाड़ी से नीरजा शर्मा को कुचलने की कोशिश की, लेकिन वह बच गईं. इस घटना के बाद उन्हें किसी साजिश का शक हुआ. उन्होंने अपने भाई को इसकी जानकारी दी और घर से बाहर निकलना काफी कम कर दिया.
मां को घर से बाहर लाने के टोटके
आरोप है कि इसके बाद आयुषी ने मां को घर से बाहर लाने के लिए नींबू, मिर्च और लाल रंग जैसी चीजों का इस्तेमाल कर टोने-टोटके का सहारा लिया. खतरे की आशंका को देखते हुए नीरजा शर्मा ने अपने घर में सुरक्षा के लिए जाली लगवाई और बाहर चार सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए. आरोप है कि इसके बावजूद आयुषी अपनी योजना को अंजाम देने पर अड़ी रही और उसने अपने ताऊ से नया तरीका निकालने को कहा. इसके बाद मोहन शर्मा ने दोबारा हेमंत शर्मा से संपर्क किया. आरोप है कि हेमंत ने सात लाख रुपये लेकर पूरी साजिश तैयार की. उसने हरियाणा नंबर की एक स्कॉर्पियो 35 हजार रुपये में किराये पर ली और मौका पाकर नीरजा को रौंदा और मौत के घाट उतार दिया.