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VIP इलाके के पास नरक जैसी जिंदगी! जयपुर के सुशीलपुरा में नलों से आ रहा गटर का पानी, सैकड़ों लोग पड़े बीमार

जयपुर की सबसे VIP विधानसभा सिविल लाइन्स के सुशीलपुरा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है. जहां एक तरफ मंत्रियों के आलीशान बंगले हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता सीवरेज मिला जहरीला पानी पीने को मजबूर है. इस लापरवाही ने पूरी कॉलोनी को 'बीमार' बना दिया है.

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सिविल लाइन्स में 450 के पार पहुंची मरीजों की संख्या.(Photo:ITG)
सिविल लाइन्स में 450 के पार पहुंची मरीजों की संख्या.(Photo:ITG)

जयपुर की सबसे VIP मानी जाने वाली सिविल लाइन्स विधानसभा… जहां मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्रियों के सरकारी आवास हैं. लेकिन इसी चमक-दमक से महज कुछ दूरी पर सुशीलपुरा के वार्ड-45 में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले एक सप्ताह से सीवरेज मिला गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. हालात यह हैं कि सैकड़ों लोग बीमार पड़ चुके हैं और हर घर में कोई न कोई पेट दर्द, उल्टी-दस्त और बुखार से जूझ रहा है. सबसे ज्यादा मार बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ी है.

स्थानीय महिला बिना खंडेलवाल ने बताया कि एक सप्ताह से गंदा पानी आ रहा है, जिसमें किचड़ जैसी बदबू आ रही है. जिसे पीना तों छोड़ो कपड़े तक नहीं धो सकते, क्योंकि कपड़ों में भी बदबू आ रही है. घर में आरओ लगा है, लेकिन इससे भी बदबू नहीं जा रही है.

गंदा पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त हो रहें है और परिवार के सभी सदस्य बीमार पड़ गए. अस्थाई तौर पर पीने के लिए पानी की अतिरिक्त व्यवस्था की है, लेकिन वो भी पर्याप्त नहीं है.

कॉलोनी की डिस्पेंसरी में इलाज करवाने पहुंची रूबी खान का कहना है कि गंदे पानी पीने से 5 दिनों से उल्टी और पेट दर्द हो रहा है. यही हाल परिवार के बाकी सदस्यों के है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीम सर्वे कर रही है लेकिन ORS का गोल पीने की सलाह देकर इतिश्री कर रहें है.

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वहीं, सर्व करने वाली आशा सहयोगिनी सुनीता वर्मा का कहना है कि उन्होंने घर-घर जाकर सर्वे किया है. इसमें करीब 30 टीमें लगी हैं. जहां ज्यादातर लोगों में उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत है. सर्वे के बाद उन्हें स्वास्थ्य सेंटर भेज रहें है और लोगों को पानी उबाल कर पीने की सलाह दी जा रही है.

इधर, डॉक्टर आयुषी जैमिनी और डॉक्टर अनिल मेहता का कहना है कि उल्टी-पेट दर्द के ज्यादा मरीज आ रहे हैं और पिछले एक सप्ताह में ओपीडी करीब 450 पार पहुंच गई है. हालांकि धीरे-धीरे मरीजों की संख्या कम हो रही है और CMHO के निर्देश पर टीमें कॉलोनी में सर्वे में लगी है.

लापरवाही का 'सीमेंटेड' कनेक्शन

विकास समिति के अध्यक्ष मदन यादव के मुताबिक, यह समस्या एक सप्ताह पहले शुरू हुई, जब सीमेंट की सड़क को तोड़ा गया. इस दौरान सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा और आखिर में पेयजल की पाइप लाइने में मिल गया. इस पूरे मामला में नगर निगम की बड़ी लापरवाही देखने को मिली और अधिकारियो की उदासीनता का खामयाजा जनता को भुगता पड़ा है.

अधिकारियों का तर्क

मामले को लेकर पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) डिपार्टमेंट के सहायक अभियंता अजीत सिंह यादव का दावा है कि कॉलोनी में सीसी रोड़ नया बन रहा है और ठेकेदार ने जब सीसी रोड़ तोड़ा तो उसका मलबा उठाते समय 3-4 कनेक्शन पानी के बिखर गए. जिससे सीवरेज ओवर फ्लो हो गया और सीवर का पानी लाइनों में घुस गया. जिसे विभाग ने अब ठीक कर लिया है और लगातार पानी को चेक कर रहें है.

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हालांकि, अभी पानी साफ है लेकिन लोगों के मन में डर बैठा हुआ है, ऐसे में स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पानी के टेंकरो की व्यवस्था की गई है. इसमें गलती किसी की नहीं है, सरकारी काम होंगे.

एक तरफ वीआईपी इलाका, दूसरी तरफ आम जनता की यह बदहाल जिंदगी… यह तस्वीर सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. लोग अब सिर्फ बीमार ही नहीं, बल्कि गुस्से में भी हैं. अगर समय रहते स्थिति को कंट्रोल कर लिया जाता, तो हालात इतने भयावह नहीं बनते. 

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