
परिवार का सदस्य 33 साल से लापता था. एक साल पहले ही परिवारवालों ने उसे मरा हुआ समझकर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया. मगर, वही व्यक्ति घर जिंदा वापस लौटा आया, जिसे परिवार ने मरा हुआ समझ लिया था.
75 साल के हनुमान सैनी 33 साल बाद जिंदा वापस लौट आए. उनके वापस लौटने के बाद से घर में जानने वालों और रिश्तेदारों का आना लगा हुआ है. परिवार के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू हैं. उनका कहना है कि भगवान ने आखिरकार उन लोगों की सुन ली.
दरअसल, हैरान करने वाला यह मामला राजस्थान के अलवर जिले के बानसूर का है. हनुमान प्रसाद सैनी नाम का व्यक्ति दिल्ली में काम किया करता था. साल 1989 में हनुमान अचानक से गायब हो गया. उसके बारे में न तो परिवार को कोई खबर थी और न उन लोगों को जो उसके साथ काम किया करते थे.
हनुमान की तलाश में परिवार के लोगों ने ऐड़ी से चोटी तक जोर लगा दिया. मगर, कुछ पता नहीं चला. पुलिस केस भी किया गया, लेकिन पुलिस भी खाली हाथ रही. हनुमान की याद में रो-रोकर परिवार के लोगों की आंखों का पानी तक सूख गया, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला. इसे अपनी किस्मत मानकर हनुमान की पत्नी और परिवार के अन्य लोग हनुमान को अपनी यादों में लिए जिंदगी बिताने लगे.
30 मई को हनुमान के रूप में वापस आईं खुशियां
30 मई 2023 वह तारीख है जो हनुमान का परिवार जिंदगी भर नहीं भूल सकेगा. 33 साल बाद सफेद दाड़ी, सफेद बाल, पेंट-शर्ट पहने हुए 75 साल के हो चुके हनुमान अपने गांव पहुंचे. हनुमान सैनी वापस घर आ गए तो उन्हें देख परिवारवालों को पहले तो भरोसा ही नहीं हुआ. आंख में आंसू लिए बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें गले से लगा दिया, उनका हाल-चाल जाना. हनुमान को पत्नी अपने सालों बाद पति को जिंदा देख फूली नहीं समाई. एक बार फिर उसकी सूनी मांग सिंदूर नजर आएगा.

खबर मिलते ही घर में लग गई भीड़, बेटियों पहुंची मिलने
सालों बाद हनुमान के आने की खबर मिलते ही परिवार के लोगों ने जानकारी गांव को दी. गांववाले हनुमान का हाल जानने उसके घर पहुंचने लगे. हनुमान की पांच संताने दो बेटे और तीन बेटियां हैं. सभी की शादी हो चुकी है. उन लोगों ने रिश्तेदारी में सभी को पिता के जिंदा होने और वापस घर आने की बात कही. इसके बाद से घर में लोगों का आना जाना लगा हुआ है.
दिल्ली से हिमाचल गया था मैं: हनुमान सैनी
परिवार के पूछने पर हनुमान प्रसाद सैनी से उन लोगों से कहा कि एक दिन वह अचानक ही दिल्ली से हिमाचल जाने की ट्रेन में चढ़ गया था. मेरे पास केवल 20 रुपये और फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बैठा था. टीटी आया तो उसने टिकट मांगा. मैंने मना किया तो उसने खुद की जेब से टिकट के पैसे भरे.
मैं कांगड़ा माता मंदिर पहुंच गया और भक्ति-भाव में लीन हो गया. इस दौरान गंगा सागर तीर्थ गया और कलकत्ता भी गया. वहां पर काली माता मंदिर में जाकर दर्शन किए. एक दिन पूजा-पाठ करते हुए मां कांगड़ा देवी ने मुझे घर वापस जाने का आदेश दिया. फिर मैं 29 मई को हिमाचल से दिल्ली तक आया.
शाम होते-होते खैरथल पहुंचा. यहां बानसूर के लिए कोई साधन नहीं मिला तो रात को पैदल ही ततारपुर चौराहा तक पहुंचा. सुबह होने पर एक व्यक्ति से लिफ्ट लेकर बानसूर के हनुमान मंदिर तक आया. मंदिर में धोक लगाई. इतने सालों में गांव काफी बदल गया और घर का रस्ता भी ठीक से याद नहीं था तो गांव के लोगों से रास्ता पूछा. एक व्यक्ति ने हनुमान प्रसाद को पहचान लिया और घर तक लेकर पहुंचा.
हनुमान का बनवा लिया था मृत्यु प्रमाण पत्र
हनुमान को मरा हुआ मानकर साल 2022 में बेटे रामचंद्र सैनी ने कोर्ट में आवेदन देकर पिता का मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवा लिया. इधर, हनुमान की पत्नी ने भी विधवा का जीवन जीना शुरू कर दिया. बेटे का कहना है कि संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद हो रहा था. इसके कारण पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया था. क्योंकि उनके बारे में हम लोगों को कोई जानकारी ही नहीं थी.