वो आवाज़ जिसने आठ दशकों तक हिंदुस्तान को गुनगुनाना सिखाया, आज हमेशा-हमेशा के लिए विदा ले रही हैं. शाम के 4 बजे 'सुरों की मल्लिका' आशा भोसले का अंतिम संस्कार होगा. उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगई है. कल जब मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से उनके निधन की खबर आई, तो देश जैसे सुन्न पड़ गया था, लेकिन आज विदाई की वो घड़ी आ गई है जो करोड़ों संगीत प्रेमियों का कलेजा चीर रही है. 92 साल का एक असाधारण जीवन, एक ऐसा जादुई सफर जिसने भारतीय संगीत को 12 हजार से ज्यादा नगीने दिए, आज वो पंचतत्व में विलीन होने जा रही हैं.