16 अगस्त तक सबकी जुबान पर ये जुमला था कि मैं भी अन्ना तू भी अन्ना. और वो भी जोर-शोर से इस नारे को बुलंद करने की तैयारी में थी. लेकिन मौत के सौदागरों ने.उसकी ज़ुबान से ये नारा हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया.