सावन आते ही घुमड़ आते हैं बादल भगवान भोले के अभिषेक के लिए. आसमान से शिवधाम में उतरने से बढ़ जाती है बूंदों की महिमा. जब वर्षा कराती है मंदिर को स्नान तब मन भीग जाता है भक्ति के अमृतरस में.