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10 तक: महंगाई के आगे सरेंडर क्यों होती जा रही जनता?

10 तक: महंगाई के आगे सरेंडर क्यों होती जा रही जनता?

आम आदमी अपनी जिंदगी की जरूरतों में खुद कटौती करके महंगाई की परिस्थिति के अनुकूल खुद को बना रहा है. हालत ये है कि सब्जी महंगी होती है तो किलोभर की जरूरत की जगह आधा किलो खरीदकर आम आदमी एडजस्ट करता है. पेट्रोल तेल की महंगाई एडजस्ट करने को आम आदमी ने किराना, स्वास्थ्य के खर्च में खुद कटौती कर ली है. खाद्य तेल की महंगाई को घर में संभालने के लिए जनता छोटी-मोटी बीमारियों को नजरअंदाज करती है. आमदनी घटी, नौकरी छिनी तो घर का गहना गिरवी रखकर परिवार का पेट पालने की जिम्मेदारी उठा रहा है. यहां तक कि सेविंग तक का इस्तेमाल अब महंगाई के मोर्चे पर खुद लड़ने के लिए जनता को करना पड़ रहा है. सच्चाई यही है कि तेल की महंगाई जनता की जेब में घुसपैठ करके पाई-पाई निंचोड़े ले रही है. आम आदमी की कमाई सफाचट हो रही है. सरकारों का खजाना गटागट भर रहा है. देखिए दसतक का ये एपिसोड.

The wholesale price-based inflation eased to 12.07 per cent in June despite rising manufactured goods prices, showed government data. The WPI-based inflation has eased slightly from the record figure of 12.94 per cent of May. However, WPI inflation remained in double digits for the third consecutive month in June. Due to the uncontrolled inflation and sky-high prices of groceries and fuel, the common man's savings are gulping rapidly and government treasures are filling up. Watch this episode of 10 Tak.

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