बलात्कारी गुरमीत राम रहीम को 15वीं बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल गई है. और, ये सिर्फ 8 साल में हुआ है, जबकि सजा उसे 20 साल की हुई है. आजीवन कारावास की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा वाले गुरमीत राम रहीम को फिर से 40 दिन की पैरोल मिल गई है.
गुरमीत राम रहीम को अगस्त, 2017 में रेप केस में दोषी पाए जाने के बाद सजा मिली थी. ताजा पैरोल के दौरान गुरमीत डेरा सच्चा सौदा सिरसा में रहेगा. 4 महीने पहले ही गुरमीत रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आया था, उसी दौरान उसका जन्मदिन भी था.
बलात्कार के ऐसे और भी मामले हैं, जिनमें सजा भी हुई है. लेकिन गुरमीत राम रहीम जैसी सुविधा किसी को नहीं मिल पाती है. आसाराम बापू को तो एक बार सजा हुई, और उसके लंबे अरसे बाद अंतरिम जमानत मिल सकी है. कुलदीप सेंगर केस में तो हाई कोर्ट ने सजा ही सस्पेंड कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है.
गुरमीत राम रहीम केस और आसानी से मिलती पैरोल
गुरमीत राम रहीम इंसान को 25 अगस्त, 2017 को 20 साल कैद हुई थी. उसके बाद 17 जनवरी, 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में भी उम्र कैद हुई. डेरा के मैनेजर रणजीत सिंह के हत्या के मामले में भी अक्टूबर, 2021 में सीबीआई की स्पेशल अदालत से उम्र कैद की सजा सुनाई गई, लेकिन 3 साल बाद हाईकोर्ट ने गुरमीत को उस केस से बरी कर दिया था.
गुरमीत को सजा मिलने के करीब चार साल बाद पैरोल पर जेल से बाहर आने का मौका मिला था - और उसके बाद से तो सिलसिला जैसे थम ही नहीं रहा है.
- पहली बार: 24 अक्टूबर, 21 - बीमार मां से मिलने के लिए एक दिन की पैरोल मिली थी.
- दूसरी बार: 21 मई, 2021 - बीमार मां से मिलने के लिए ही फिर एक दिन के लिए जेल से बाहर आया.
- तीसरी बार: 7 फरवरी, 22 - 21 दिन के लिए जेल से बाहर. तब पंजाब में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे.
- चौथी बार: 17 जून, 22 - 30 दिन के लिए. उन दिनों हरियाणा में निकाय चुनाव हुए थे.
- पांचवीं बार: 15 अक्टूबर, 22 - 40 दिन के लिए. उस दौरान आदमपुर उपचुनाव हुआ था.
- छठी बार: 21 जनवरी 23 - शाह सतनाम जयंती के वक्त 40 दिन के लिए.
- सातवीं बार: 20 जुलाई, 23 - 30 दिन के लिए. 15 अगस्त को गुरमीत का बर्थडे होता है.
- आठवीं बार: 21 नवंबर, 23 - 21 दिन के लिए, उस समय राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए थे.
- नौवीं बार: 19 जनवरी, 24 - 50 दिन के लिए. मौका लोकसभा चुनाव का था.
- दसवीं बार: 13 अगस्त, 24 - 21 दिन के लिए, 15 अगस्त को बर्थडे पड़ता है.
- ग्यारहवीं बार: 1 अक्टूबर, 24 - 21 दिन के लिए, संयोग मानिए तो उन दिनों हरियाणा में चुनाव हो रहे थे.
- बारहवीं बार: 28 जनवरी, 25 : 30 दिन के लिए. चुनाव के हिसाब से देखें तो दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे.
- तेरहवीं बार: 9 अप्रैल, 25 - 41 दिन के लिए. तब डेरा सच्चा सौदा का स्थापना दिवस मनाया गया.
- चौदहवीं बार: 5 अगस्त, 2025: 40 दिन के लिए. मौका तो 15 अगस्त को बर्थडे का ही था.
- पंद्रहवीं बार: 3 जनवरी, 2025 - फिर से 40 दिन के लिए.
पैरोल वैसे ही जैसे अपराधी थाने में हाजिरी लगाते हैं
सजा काटने के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो ऐसा लगता है +जैसे अपराधी नजदीकी थानों में हाजिरी लगाने जाते हैं, गुरमीत राम रहीम ठीक वैसे ही जेल में पेशी के लिए जाता है. और, फिर जब बाहर आने का मन करता है, बताकर आ जाता है. न कोई विरोध सुनाई देता है, न कहीं गंभीरता से सवाल उठाए जाते हैं.
1. ध्यान देने वाली बात ये है कि 20 में से बीते 8 साल और 4 महीने की सजा में गुरमीत राम रहीम अब तक 387 दिन जेल से बाहर रहा है - मतलब, एक साल से भी ज्यादा समय ऐसा है जो उसने जेल में नहीं बिताया.
2. हाल ही में बीजेपी विधायक रहे कुलदीप सेंगर को बलात्कार के लिए मिली उम्र कैद को हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया है, और कुलदीप सेंगर को मिली सजा में यथास्थिति बहाल हो गई है.
कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड किए जाने, और कुलदीप की बेटी ऐश्वर्या सेंगर के बयान पर उन्नाव रेप पीड़िता का कहना था, मैं एक साल से भटक रही हूं. दिल्ली में रहते हुए भी भटकती रही. उत्तर प्रदेश में रही तब भी साल भर भटकती रही. मेरे पिता की हत्या कर दी गई, और तभी एफआईआर दर्ज हुई... ऐश्वर्या सेंगर को मेरा संदेश है कि अगर तुम आठ साल से भटक रही हो, तो मैं भी एक साल से ज्यादा समय से पीड़ा सह रही हूं, और जगह-जगह भटक रही हूं... मुझे इस दुनिया में जीने नहीं दिया जा रहा है.
3. बिलकिस बानो रेप केस के 11 अभियुक्तों को गुजरात सरकार ने रिहा कर दिया था तो खूब बवाल मचा था. जेल से बाहर आने पर सभी का फूल-माला और मिठाई के साथ स्वागत किया गया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के फैसले को रद्द करते हुए सभी को सरेंडर करने का आदेश दिया.
4. ये भी दिलचस्प है कि राम रहीम जैसे ही मामले में आसाराम बापू को जेल से बाहर आने में एक दशक से भी ज्यादा वक्त लग गया. गुरमीत राम रहीम की तरह आसाराम बापू को कोई रियायत नहीं दी गई. हां, अक्टूबर, 2025 में मेडिकल ग्राउंड पर आसाराम को 6 महीने की अंतरिम जमानत जरूर मिली है. वैसे सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता के पिता की याचिका खारिज कर दी है. पीड़िता के पिता ने आसाराम के स्वस्थ होने का दावा करते हुए जमानत रद्द कर वापस जेल भेजने की अपील की थी.
बार-बार पेरोल जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे
गुरमीत राम रहीम को बार बार पैरोल मिलने को दमदमी टकसाल के प्रमुख सेवादार ज्ञानी राम सिंह खासला ने जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है. ज्ञानी राम सिंह खालसा ने गुरमीत को फिर से पैरोल दिए जाने पर कहा कि सरकारें लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई के मुद्दे पर पूरी तरह चुप है, जबकि बलात्कारी गुरमीत राम रहीम को लगातार पैरोल दी जा रही है... इससे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है.
नियमों की बात करें तो किसी कैदी को पैरोल तभी मिल सकती है, जब उसने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया हो. विशेष परिस्थितियों में ऐसा तभी हो सकता है जब परिवार में किसी की मौत हो जाए या गंभीर बीमारी की स्थिति हो, किसी करीबी की शादी हो या ऐसी ही को जरूरी वजह हो.
पहली बार और दूसरी बार गुरमीत को बीमार मां से मिलने के लिए एक-एक दिन की पैरोल मिली थी. लेकिन, तीन बार तो गुरमीत को पैरोल तब मिली जब उसको बाहर आकर बर्थडे मनाना होता है, वो भी 21 दिन से लेकर 40 दिन तक के लिए - और 6 बार तो पैरोल तब मिली जब कोई न कोई चुनाव होना था. यहां तक कि डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस के मौके पर भी वो 41 दिन के लिए जेल से बाहर रहा.
बलात्कार के अपराधी के लिए ऐसी 'नरमदिली' क्यों?
बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के लिए सजायाफ्ता के प्रति सरकार और प्रशासन की ऐसी नरमी को राजनीतिक मजबूरी या दबाव से क्यों न जोड़ा जाए? जब शुरुआती आठ साल की सजा के दौरान अपराधी साल भर से भी ज्यादा जेल से बाहर पाया जाता हो, तो क्या समझा जाए?फिर से पैरोल देने के लिए कुछ दिन के लिए जेल भेजने के बजाए गुरमीत राम रहीम को रिहा ही क्यों नहीं कर देते? जब पीड़िता की पीड़ा की परवाह किसी को है ही नहीं, तो हाजिरी लगाने के लिए गुरमीत राम रहीम को फिर से जेल जाने की जरूरत ही क्या है?