यदि कुछ साल पहले का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे कि काशी कॉरिडोर निर्माण के समय बाबा विश्वनाथ मंदिर से लेकर गंगा किनारे तक ढेर सारे मंदिर धार्मिक स्ट्रक्चर और मूर्तियां हटाई गईं. जो बाबा विश्वनाथ मंदिर के इर्द-गिर्द गलियों में लोगों के घरों में मौजूद थीं. तब भी ऐसा ही बवाल हुआ था. राजनीतिक पार्टियों ने प्रधानमंत्री मोदी के कॉरिडोर बनाने के इस कदम की खूब आलोचना की थी. जबरदस्त विरोध किया था, कांग्रेस नेता अजय राय से लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सब ने एक सुर में इस कॉरिडोर का विरोध किया था. ऐसा लगता है अब मणिकर्णिका घाट को लेकर वही इतिहास दोहराया जा रहा है. तब तो सचमुच कई मंदिर हटाए भी गए थे, उनका विध्वंस भी हुआ था. कई शिवलिंग और मूर्तियों को हटाया भी गया था, लेकिन अब नया बवाल मणिकर्णिका घाट पर हो रहा है. जहां न तो कोई मंदिर हटाया गया है और ना ही किसी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित प्रतिमा को तोड़ा गया है. लेकिन फिर भी बवाल है और जबरदस्त बवाल है. बवाल भी ऐसा कि सरकार के हाथ- पांव फूल गए हैं.
लेकिन आखिर हटाया क्या गया है जिसकी वजह से इतना हंगामा बरपा है. अगर आपने वाराणसी के घाटों को गौर से देखा होगा तो घाट के किनारे किनारे गोल या षट्कोण मढ़ीयो की एक श्रृंखला दिखाई देगी. दरअसल यह मढ़ी गंगा के किनारे वो चबूतरे हैं जो दो घाटों को जोड़ते है. और कई मढ़ी तो ऐसे हैं जिनके इर्द-गिर्द मूर्तियां भी उकेरी गई हैं.
जब मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए आधुनिक क्रिमेटोरियम बनाने की शुरुआत हुई तो घाट की एक मढ़ी तोड़ी गई्. पोकलन मशीन से उसे तोड़ा गया. इस मढ़ी के चारों तरफ जो मूर्तियां थीं वो नीचे गिरी. इसमें मां गंगा की, अहिल्याबाई होलकर और कई अन्य मूर्तियों उकेरी हुई थी.
जैसे ही मढ़ी को तोड़ा गया तो इसकी तस्वीरें वायरल होने लगी और हंगामा मच गया. लोगों ने वहां के वीडियो और फोटो पोस्ट करने शुरू कर दिये. कई सांसदों ने, जिसमें पप्पू यादव और संजय सिंह ने कुछ ताजा और नई तस्वीरों के साथ पुरानी और कॉरिडोर निर्माण के वक्त के विध्वंस की तस्वीरें का कोलाज बनाकर सोशल मीडिया पर डाला जिसके बाद सरकार ने आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज कर दी.
इंदौर से अहिल्याबाई होलकर के ट्रस्ट से जुड़े उनके वंशज पहुंचे स्थानीय पाल समाज के लोगों ने अपना विरोध दर्ज किया देखते ही देखते यह मामला बड़ा हो गया. बहुत सारी अफवाह ने भी आग में घी का काम किया. हकीकत में वहां कोई मंदिर तोड़ा ही नहीं गया. हां चबूतरा टूटा और मूर्तियां नीचे गिरी. प्रशासन ने दावा किया है कि सभी मूर्तियां सुरक्षित हैं और उन्हें पुरातत्व विभाग के दफ्तर में नगर निगम की निगरानी में रखा गया है. नए कॉरिडोर में उन सभी मूर्तियों को दोबारा प्रतिस्थापित किया जाएगा.
यह बात लगभग सभी जानते हैं कि कोई मंदिर नहीं टूटा लेकिन लोगों में आक्रोश इसलिए भी है की अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा जिस मढ़ी पर लगी थी उसे पर बुलडोजर चलाया गया, उनकी मूर्ति गिरी. लंबे समय से मणिकर्णिका घाट पर पुरोहिती कर रहे पंडे भी कहते हैं कि मंदिर नहीं टूटा है, लेकिन इन मढ़िओं के प्रति भी लोगों की आस्था रहती है. ऐसे में कोई भी पुनर्निर्माण हो तो परंपरा का ख्याल रखा जाना चाहिए था. बुलडोजर चलाने के पहले मूर्तियां सुरक्षित तरीके से निकाली जानी चाहिए थी.
बहुत लंबे वक्त से मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण या कायाकल्प की जरूरत महसूस की जा रही थी रही थी. 2023 में मणिकर्णिका घाट के डोम राजा के आग्रह पर प्रधानमंत्री मोदी ने मणिकर्णिका के इस नए और भव्य क्रिमेटोरियम की योजना को अपनी मंजूरी दी. डोम राजा के बेटे विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि पहले प्रस्ताव देने वाले मेरे पिता थे जिन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था की काशी में सब कुछ तो बन गया लेकिन मणिकर्णिका पर आखिरी संस्कार करने आने वाले लोगों के लिए अभी भी हालात बदतर हैं.
चारों तरफ लकड़ी बेचने वालों के दुकानों का अंबार है. पतली पतली गलियां हैं. परिजन अपने मृत परिजनों को लेकर आते तो हैं लेकिन बहुत दुखी होकर जाते हैं. क्योंकि न तो लोगों की बैठने की जगह है ना ही खड़े होने की जगह. किसी तरीके से आनन- फ़ानन में दाह संस्कार करके चले जाते है. बरसात में तो तब और बुरा हाल हो जाता है, जब कॉरिडोर के बगल की गलियों में कई कई चिताओं को प्रज्ज्वलित करना पड़ता है.
कॉरिडोर से सटा होने और मणिकर्णिका घाट पर सैकड़ों मकान में चिता की भस्म पहुंचती है. लोग अपनी खिड़कियां नहीं खोलते और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आने वाले भक्त भी कॉरिडोर के किनारे गंगा तक आने से कतराते हैं. क्योंकि दाह संस्कार के लिए जगह नहीं बची है.
रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से नया मणिकर्णिका तीर्थ क्रिमेटोरियम बनाया जा रहा है. जिसके लिए प्रधानमंत्री ने खुद इसकी शुरुआत की थी. नए बन रहे प्रोजेक्ट के तहत 39,000 से ज्यादा वर्ग फीट में यह भव्य क्रिमेटोरियम तैयार हो रहा है. जो बिल्कुल गंगा किनारे काशी कॉरिडोर से सटेगा, लेकिन इसकी सुविधा विश्व स्तरीय होगी.
कहते हैं मणिकर्णिका की जलती चिताएं सदियों से कभी बुझी ही नहीं. अब दाह संस्कार के प्लेटफार्म की संख्या बढ़ाई जा रही है. मणिकर्णिका तीर्थ में मृत आत्माओं को लेकर आने वाले परिजनों के लिए तमाम सुविधाओं का ख्याल रखा गया है ताकि लोग मृत आत्माओं को लेकर आखिरी वक्त में जब आते हैं तो यहां सुकून से बैठ सकें.