TDP नेता एन चंद्रबाबू नायडू को सियासी दुश्मनी का शिकार तो 2019 से ही होना पड़ रहा है. 2019 में जगनमोहन रेड्डी के आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से नायडू, उनके बेटे और समर्थकों के खिलाफ कई एक्शन हुए हैं - और ऐसी चीजों से वो इतने आहत हुए कि अपने आंसू तक पर काबू नहीं रख सके हैं.
अव्वल तो सियासी दुश्मनी का नंगा नाच दक्षिण भारत के तमिलनाडु में देखने को मिलता था, लेकिन उद्धव ठाकरे के शासनकाल में महाराष्ट्र में भी ऐसी झलक देखने को मिली थी. केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी तो आपको याद होगी ही.
भ्रष्टाचार के आरोप में चंद्रबाबू नायडू को जेल भेजा जाना ऊपर से जितना साधारण लगता है, क्या वास्तव में इतना ही भर हो सकता है?
क्या ये सब मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी की दूरगामी रणनीति की कोई राजनीतिक चाल भी है?
और आंध्र प्रदेश में जो कुछ हो रहा है, उसमें बीजेपी की राजनीति किधर जा रही है? क्योंकि नायडू की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब फिर से उनके एनडीए में लौटने की चर्चा चल रही थी.
नायडू को यूं ही जेल नहीं भेजा गया है
10 सितंबर को चंद्रबाबू नायडू की शादी की सालगिरह थी. 1981 में नायडू और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे एनटी रामाराव की बेटी भुवनेश्वरी की शादी हुई थी. बताते हैं कि भुवनेश्वरी ने अपने एक्टर भाई नंदमुरी बालकृष्ण के परिवार के सदस्यों, अपने प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं के साथ अपनी 42वीं एनिवर्सरी मनाने की तैयारी कर रखी थी. लेकिन एक दिन पहले ही 9 सितंबर को सूबे की सीआईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री नायडू को गिरफ्तार कर लिया - और अब तो 22 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में राजमुंदरी सेंट्रल जेल भेज दिया गया है.
2019 के आम चुनाव के साथ हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवा देने के बाद से अब तक चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ 10 केस दर्ज किये गये हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं, चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश के खिलाफ तो एक दर्जन से भी ज्यादा मामले दर्ज किये गये हैं.
ये बदले की कार्रवाई नहीं तो क्या है?
2012 में आंध्र प्रदेश में सरकार तो कांग्रेस की ही थी, लेकिन चंद्रबाबू नायडू तभी से जगनमोहन रेड्डी के दुश्मन बन गये. अपने पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के हवाई दुर्घटना का शिकार हो जाने के बाद जगनमोहन रेड्डी खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. और कांग्रेस तैयार नहीं हुई तो जगनमोहन रेड्डी ने बगावत शुरू कर दी थी.
तभी राजशेखर रेड्डी सरकार के मंत्रियों के भ्रष्टाचार की जांच हुई और वो रिपोर्ट लीक हो गयी. असल में, रिपोर्ट में जगनमोहन की संपत्ति की छानबीन का ब्योरा भी था.
रिपोर्ट आते ही, टीडीपी ने जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाते हुए कैंपेन शुरू कर दिया. बवाल इतना बढ़ा कि सीबीआई और ईडी की जांच शुरू हुई और जगनमोहन रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया गया. 16 महीने जेल में रहने के बाद सितंबर, 2013 में जगनमोहन रेड्डी जमानत पर बाहर आ सके.
सत्ता में आते ही जगनमोहन रेड्डी का एक्शन शुरू हो गया. सबसे पहले अमरावती में बनी करोड़ों की इमारत प्रजा वेदिका पर बुलडोजर चला. वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने कार्रवाई के बाद जश्न भी मनाया था.
अपने खिलाफ हो रहे एक्शन से दुखी नायडू ने घोषणा कर दी कि सत्ता में वापसी तक वो विधानसभा में नहीं लौटेंगे. ऐसा ही प्रण पहले AIADMK नेता जे जयललिता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कर चुकी हैं.
जगनमोहन रेड्डी जब विपक्ष में थे तो टीडीपी सदस्यों ने काफी कटाक्ष किया था, जिसके बाद वो विधानसभा से बाहर चले गये - और चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनने के बाद ही लौटे.
सियासी दुश्मनी की आगे घी का काम कर रही है बीजेपी से नजदीकी
आंध्र प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी ने चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी की निंदा की है. NTR की बेटी होने के नाते डी पुरंदेश्वरी, नायडू की रिश्तेदार भी हैं. बीजेपी की ही तरह जनसेना पार्टी ने भी नायडू की गिरफ्तारी का विरोध जताया है.
नायडू की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब उनके एनडीए में वापसी की जोरदार चर्चा रही. इस सिलसिले में बीजेपी नेता अमित शाह से उनकी मुलाकात होने की भी खबर आयी थी.
नायडू की ही तरह पवन कल्याण के भी एनडीए में शामिल होने की काफी चर्चा है. नायडू 2018 में बीजेपी से नाता तोड़ चुके थे, 2019 में आंध्र प्रदेश में 22 लोक सभा सीटें जीत लेने के बाद जगनमोहन रेड्डी बीजेपी के करीब हो गये, और नायडू और ज्यादा पीछे छूट गये.
बीजेपी को तो तमाम मौकों पर जगनमोहन का साथ मिलता रहा, लेकिन वो एनडीए में आने को तैयार नहीं हुए. आंध्र प्रदेश में पांव जमाने के लिए बीजेपी को एक मजबूत पार्टनर की जरूरत थी. टीडीपी से डील हो सके ये सोच कर ही बीजेपी ने डी पुरंदेश्वरी को आंध्र प्रदेश की कमान सौंपी थी.
मौके की नजाकत को समझते हुए जगनमोहन ने मजबूत चाल चली है. नायडू को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे जाने के बाद बीजेपी को भी सोच समझ कर आगे बढ़ना पड़ेगा.
तेलंगाना में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद नायडू का बचाव करना भी मुश्किल होगा, जगनमोहन ये अच्छी तरह समझते हैं.
जगनमोहन रेड्डी भला क्यों चाहेंगे बीजेपी और उनके रिश्ते में कोई घुसपैठ करे. चंद्रबाबू नायडू बीजेपी के साथ हो जाते हैं, तो जगनमोहन के लिए ऐसा कदम मुश्किल होता, लिहाजा पहले ही सियासी चाल चल दी - और बीजेपी को उलझन में डाल दिया है.