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MP के BJP उम्मीदवारों की लिस्ट का वसंधुरा से क्या है कनेक्शन! जानिये इस जमावट को

बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट में शामिल केंद्रीय मंत्रियों सहित 7 सांसदों के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव अग्नि परीक्षा जैसा हो गया है. इनका चुनावी प्रदर्शन ही तय करेगा कि वे 2024 के लोक सभा चुनाव लड़ने के काबिल बचे भी हैं या नहीं - और माना जा रहा है कि ये नुस्खा राजस्थान में भी आजमाया जाने वाला है.

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शिवराज सिंह, अमित शाह के उसी हथियार का शिकार हुए हैं जो वसुंधरा राजे के लिए बना है
शिवराज सिंह, अमित शाह के उसी हथियार का शिकार हुए हैं जो वसुंधरा राजे के लिए बना है

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आई बीजेपी उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट के अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं. सीधे सीधे तो ये मौजूदा बीजेपी नेतृत्व की तरफ से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पर कतरने की कोशिश लगती है, लेकिन ध्यान से देखें तो ये एक तीर से कई निशाने साधने की कवायद है. 

मुख्यमंत्री होने की वजह से शिवराज सिंह ने तो अपने लिए कवच कुंडल का इंतजाम भी कर रखा है, बड़ी चोट तो सातों सांसदों के सीने पर लगी होगी. ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी ने ऐसा पहली बार किया है. पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा या उत्तर प्रदेश में ये फॉर्मूला अलग कारणों से आजमाया गया था. मध्य प्रदेश को लेकर जरूर इसका मकसद दूसरा लगता है. 

ये भी ठीक है कि मोदी-शाह के इस कदम को शिवराज सिंह चौहान की घेरेबंदी के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन असल में तो ये वसुंधरा राजे के इर्द-गिर्द बाड़बंदी से पहले बिछाया जा रहा जाल है - और भाजपा के अंदरूनी टकराव में बीजेपी के ये सारे सांसद पिस रहे हैं.

शिवराज सिंह के खिलाफ बीजेपी सांसद बने मोहरा

बीजेपी की नयी सूची के 39 उम्मीदवारों में मोदी सरकार के तीन मंत्री हैं, और चार अन्य सांसद भी हैं. ये सातों सांसद अब विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं. 2024 के आम चुनाव को लेकर अब इनका भविष्य विधानसभा चुनाव के नतीजे करेंगे. मध्य प्रदेश चुनाव के नतीजे आने के बाद कौन स्वपन दासगुप्ता बनेगा और किसका हाल बाबुल सुप्रियो जैसा होगा, देखना होगा. इन दोनों सांसदों को पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने विधानसभा उम्मीदवार बनाया था, और दोनों ही हार गये. स्वपन दासगुप्ता को तो फिर से राज्य सभा भेजने का इंतजाम कर दिया गया, लेकिन बाबुल सुप्रियो को मंत्री पद से हटाकर किनारे लगा दिया गया. फिर वो बीजेपी छोड़ कर ममता बनर्जी के साथ चले गये और बंगाल की तृणमूल सरकार में मंत्री बन गये. 

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2019 के आम चुनाव में भी बीजेपी ने ऐसे कुछ प्रयोग किये थे. कांग्रेस से बीजेपी में आयीं रीता बहुगुणा जोशी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री थीं. लोक सभा चुनाव लड़ाये जाने के बाद सांसद तो बन गयीं, लेकिन मंत्री वाला सारा तामझाम जाता रहा. 2022 में तो वो बेटे को टिकट दिलाने के लिए अपनी संसद सदस्यता तक छोड़ने को तैयार थीं, लेकिन कोई सुने तब तो. रीता बहुगुणा जोशी का हाल भी मेनका गांधी जैसा ही हो गया है.

अव्वल तो मध्य प्रदेश की बिसात पर बीजेपी ने इन नेताओं के जरिये शिवराज सिंह चौहान को शह दिया है, लेकिन सच तो ये है कि ये मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किये जा रहे हैं. ऐसे सभी नेताओं का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है. 

तरीका भले ही अलग हो, लेकिन इन सभी के साथ ठीक वैसा ही हुआ है, जैसा गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले विजय रुपानी और नितिन पटेल के साथ हुआ था. जैसे हिमाचल प्रदेश चुनाव से पहले प्रेम कुमार धूमल के साथ हुआ था. 

अब हर नेता बीजेपी में एसपी सिंह बघेल जैसा किस्मतवाला तो होता नहीं. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एसपी सिंह बघेल को मैनपुरी की करहल सीट से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के खिलाफ उम्मीदवार बनाया था. अखिलेश यादव ने आगरा से बीजेपी सांसद एसपी सिंह बघेल को बड़े अंतर से हरा दिया था, लेकिन अब भी वो मोदी कैबिनेट में बने हुए हैं.

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बीजेपी की विधानसभा उम्मीदवारों की सूची में शामिल केंद्रीय मंत्री हैं - नरेंद्र सिंह तोमर, मंत्री प्रहलाद पटेल और मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते. बाकी राकेश सिंह, रीति पाठक, गणेश सिंह और उदय प्रताप सिंह सांसद हैं. उम्मीदवारों की सूची में एक बड़ा नाम और भी है, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का.

बीजेपी आलाकमान अब इन नेताओं को विधानसभा के चुनाव मैदान में उतार कर देखना चाहता है कि अब भी इनमें दमखम बचा है या नहीं. जो विधानसभा की अग्नि परीक्षा में पास होंगे, लोक सभा चुनाव में इनाम मिलेगा. वरना, सभी 7 सांसदों को अभी से समझ लेना चाहिये कि बीजेपी नेतृत्व ने चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि घर जाने का टिकट दे दिया है.

अपने सांसदों से बीजेपी की बस इतनी ही अपेक्षा है कि उनके कद और प्रभाव के आगे शिवराज सिंह चौहान का आभामंडल फीका पड़ जाये - और जो कुछ सुनने में आ रहा है... जो हथियार अमित शाह को राजस्थान में वसुंधरा राजे को ध्यान में रख कर तैयार किया गया, पहले शिवराज सिंह के खिलाफ इस्तेमाल कर आजमाया जा रहा है. 

वसुंधरा के साथ भी शिवराज जैसे सलूक की तैयारी है

मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर में होने हैं. छत्तीसगढ़ का तो अभी नहीं पता, लेकिन राजस्थान को लेकर खबर आ रही है कि वसुंधरा राजे को भी शिवराज सिंह की ही तरह घेरने की तैयारी हो चुकी है.

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राजस्थान में हाल फिलहाल जो देखने को मिल रहा है, कम तो वो भी नहीं है. लेकिन बड़ी तैयारियों से अभी परदा उठना बाकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताजा दौरे में हर किसी ने देखा कि किस तरह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को साइडलाइन किया जा रहा है. बड़ी बात तो ये रही कि वसुंधरा राजे के समर्थकों ने भी ये बाद अंदर तक महसूस की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान पहुंचने से पहले जयपुर के दादिया गांव में बीजेपी के कार्यक्रम में बीजेपी के बहुत सारे नेता मौजूद थे, वसुंधरा राजे की गैरमौजूगी को लेकर सबके मन में सवाल था.

25 सितंबर को जयपुर में हुआ प्रधानमंत्री की रैली को देखें तो भी कई चीजें साफ देखी जा सकती हैं, सिवा वसुंधरा राजे के. रैली के मंच और पंडाल में बैठने की व्यवस्था तक सारे इंतजाम की जिम्मेदारी महिलाओं को ही सौंपी गयी थी. मोदी के स्वागत से लेकर मंच संचालन तक कदम कदम पर राजसमंद से सांसद दीया कुमारी ही छायी हुई थीं. ये देख कर ये चर्चा भी शुरू हो गयी थी कि वसुंधरा राजे की जगह दीया कुमारी ही लेने जा रही हैं या कोई और?

इसी बीच एक ऐसी तस्वीर भी चर्चा में है जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे साथ बैठे नजर आ रहे हैं. असल में ये कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान के उद्घाटन के मौके की तस्वीर है, जिसमें गहलोत और वसुंधरा के अलावा विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी और बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ भी देखे जा सकते हैं - चुनाव से पहले ये तस्वीर वायरल हो गयी है.

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ऐसा लगता है जैसे ये फॉर्मूला निकाला ही गया है राजस्थान के लिए, लेकिन संभावित विरोध को देखते हुए शुरुआत मध्य प्रदेश से की गयी है. अब अगर बीजेपी राजस्थान में भी सांसदों को विधानसभा का टिकट देती है, तो मोदी-शाह के पास ये कहने को तो रहेगा ही कि ये सिलसिला शुरू तो मध्य प्रदेश से हुआ है.

अब वसुंधरा राजे की जगह बीजेपी में दीया कुमारी ले पाती हैं या नहीं, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता - लेकिन बीजेसी सांसद को विधानसभा का टिकट दिया जाना तो पक्का लगता है. 

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