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ओडिशा: स्कूल में बासी खाना खाने से 100 छात्र बीमार, एक छात्रा की मौत... जांच के आदेश

ओडिशा के मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में बासी खाना खाने से 100 से अधिक छात्र बीमार हो गए. उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद कई छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा की मौत हो गई. जबकि 66 छात्रों का इलाज जारी है.

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बासी खाना खाने से छात्रा की मौत और कई अन्य बच्चे हुए बीमार. (File Photo: ITG)
बासी खाना खाने से छात्रा की मौत और कई अन्य बच्चे हुए बीमार. (File Photo: ITG)

ओडिशा के मयूरभंज जिले में सरकार द्वारा संचालित एक आदिवासी आवासीय स्कूल में खाना खाने के दो दिन बाद मंगलवार को 100 से ज़्यादा छात्र बीमार पड़ गए और उनमें से 5वीं कक्षा की एक छात्रा की मौत हो गई. इस मामले की मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने जांच के आदेश दिए हैं. 

एक एजेंसी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि काकाबन्धा आश्रम स्कूल के छात्रों ने रविवार सुबह खाना खाने के बाद बेचैनी और बीमारी की शिकायत की. उन्होंने ऐसा खाना खाया था जो "अधिकृत मेनू में शामिल नहीं था." छात्रों के माता-पिता ने दावा किया कि बच्चों ने बासी चावल ('पाखला'), मसले हुए आलू और आम की चटनी खाई थी, जिसके बाद उन्हें दस्त और उल्टी की शिकायत होने लगी.

66 छात्रों का चल रहा है इलाज
अधिकारियों ने बताया कि 100 से ज़्यादा छात्रों को तुरंत स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और उनमें से 67 छात्रों को गंभीर हालत में बारीपदा के PMR मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया. मयूरभंज के जिला कलेक्टर हेमा कांत साय ने बताया कि "5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा को सोमवार को अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराना पड़ा. लगातार इलाज के बावजूद, मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई."

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अधिकारी ने आगे बताया कि फिलहाल 66 छात्रों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि 41 अन्य छात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हैं. एक मेडिकल टीम को स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है, जबकि दूसरी टीम स्कूल में ही मौजूद है.  वहीं मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री ने छात्रा की मौत पर दुख व्यक्त किया और केंद्रीय संभाग के राजस्व संभागीय आयुक्त को जांच करने का निर्देश दिया. 

परिजनों को दी गई 3 लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जारी एक बयान में कहा गया है कि RDC बुधवार सुबह घटना की जांच के लिए रसगोबिंदपुर का दौरा करेंगे. बयान में यह भी बताया गया कि माझी ने मृतक छात्रा के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से 3 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है.

बीमार छात्रों की देखभाल के लिए पहले से ही एक मेडिकल टीम मौजूद थी, इसके बावजूद माझी ने IDSP (एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम) के संयुक्त निदेशक और एक अन्य डॉक्टर को तुरंत मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया. वहीं जिला कलेक्टर ने बताया कि अस्पताल में और भी छात्रों को भर्ती किया जा रहा है. पुलिस जांच के अलावा हम एक स्वतंत्र जांच भी करेंगे. क्योंकि यह आरोप लगाया गया था कि हेडमास्टर ने मेनू में शामिल न किया गया खाना दिया था.

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इस घटना के लिए ज़िम्मेदार शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ज़िला कलेक्टर ने बताया कि मृतक की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस में एक मामला दर्ज किया गया है. इस बीच मंगलवार को गुस्साए ग्रामीणों ने रसगोविंदपुर-जलेश्वर सड़क को जाम कर दिया और मृतक के परिवार के लिए मुआवज़े व घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

फिलहाल स्कूल के हेड टीचर जयंत कुमार पाणिग्रही को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है और सरकार ने मृतक छात्र के परिवार को 7 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. ओडिशा के आवास और शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने अस्पताल में भर्ती छात्रों से मुलाकात की और उनके माता-पिता से बात की.

मामले को लेकर कांग्रेस ने बोला हमला
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "बारीपदा के काकीबांधा आश्रम स्कूल में फ़ूड पॉइज़निंग के कारण एक छात्र की मौत से मैं बहुत दुखी हूं. जहां 100 से ज़्यादा छात्र बीमार भी पड़ गए हैं. यह घोर लापरवाही और एक गंभीर व्यवस्थागत विफलता की ओर इशारा करता है. ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई ज़रूरी है."

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