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MP: बच्ची को जमीन पर बैठाकर चढ़ाया खून, ब्लड बैग हाथ में लेकर खड़ी रही मां, Photo वायरल

मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर के सरकारी अस्पताल से सामने आई तस्वीर ने प्रदेश के हेल्थ सिस्टम की पोल खोल दी है. 14 साल की बीमार लड़की को अस्पताल में बेड तक नहीं मिला. डॉक्टर्स ने उसे जमीन पर बैठाकर ब्लड चढ़ाया. फोटो वायरल होने पर कलेक्टर ने डॉक्टर और नर्स का इन्क्रीमेंट रोक दिया है.

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जमीन पर बैठाकर बच्ची को चढ़ाया गया ब्लड. (Photo: Video Grab)
जमीन पर बैठाकर बच्ची को चढ़ाया गया ब्लड. (Photo: Video Grab)

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर के सिविल हॉस्पिटल की तस्वीर प्रदेश के बीमार हेल्थ सिस्टम की पोल खोल रही है. यहां इलाज के लिए भर्ती की गई 14 साल की एक लड़की को बेड तक नसीब नहीं हुआ. बच्ची को फर्श पर बिठाकर ब्लड चढ़ाया गया. इस दौरान उसकी मां ब्लड बैग हाथ में लेकर खड़ी रही.

इस मामले की तस्वीर वायरल होने पर हड़कंप मच गया. कलेक्टर अनुराग वर्मा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. CMHO डॉ. एके अवधिया ने सिविल हॉस्पिटल के प्रभारी डॉ. प्रदीप निगम की एक और स्टाफ नर्स अंजू सिंह की दो सालाना वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं.

CMHO डॉ. एके अवधिया ने बताया, "75 बिस्तर की क्षमता वाले मैहर के सिविल अस्पताल में 101 मरीज भर्ती हैं. इसलिए बेड नहीं मिलने पर फर्श पर गद्दा डालकर कैमूर निवासी लड़की को ब्लड चढ़ाया जा रहा था. बेटी को भर्ती करने से नाराज पिता ने अस्पताल में ही पत्नी से विवाद करते हुए गद्दा खींच लिया. डर से बेटी गैलरी में दूसरी तरफ जाकर बैठ गई. तभी किसी ने फोटो लेकर सोशल मीडिया में वायरल कर दी."

मामला बढ़ा, तो लड़की को फिर जमीन पर बिछे गद्दे पर लिटाया गया. ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद लड़की को डिस्चार्ज कर दिया गया. उसका हीमोग्लोबिन 2.8 ग्राम था. इस मामले में कलेक्टर अनुराग वर्मा ने कहा कि फोटो वायरल होने के बाद मामले की जांच करवाई गई, जिसमें लापरवाही पाई गई. हॉस्पिटल के इंचार्ज और स्टाफ नर्स पर कार्रवाई की गई है.

सीएमएचओ बोले- अस्पताल में उपलब्ध नहीं था बेड

सीएमएचओ डॉ. एके अवधिया ने कहा, "मैंने स्वयं इस मामले की इन्क्वायरी की थी. यह मामला 13 सितंबर का है. मैहर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप निगम ने लड़की को भर्ती किया था. उस समय ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाली उस लड़की का हीमोग्लोबिन 2.8 ग्राम था. ऐसी स्थिति में ब्लड चढ़वाना जरूरी होता है."

उन्होंने आगे बताया, "पांच बजे मरीज भर्ती किया गया और पांच बजकर 50 मिनट पर क्रॉसमैच कर मैहर हॉस्पिटल से फ्री ब्लड दिया गया. प्रभारी और स्टाफ नर्स दोनों ने बताया कि बिस्तर की उपलब्धता न होने की वजह से जमीन पर बेड लगाकर ब्लड चढ़ाना शुरू किया था." 

अवधिया ने कहा, "लड़की के पिता को इसकी जानकारी नहीं थी. जब लड़की का पिता जानकारी के बाद अस्पताल पहुंचा, तो वह पत्नी से लड़ने लगे और बिस्तर खींच दिया. उस समय मरीज कुछ समय के लिए बैठ गई थी और ब्लड न गिरे इसलिए लड़की की मां ने ब्लड बैग हाथ में उठा लिया था. मामले में प्रभारी डॉक्टर की एक और स्टाफ नर्स की सालाना दो वेतनवृद्धि रोकी गई है."

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