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VIDEO: 'कहां चले गए मेरे भगवान...'मंदिर में नहीं मिली मूर्तियां, फफक कर रो पड़ा श्रद्धालु

मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आस्था के प्रति लगाव का मामला सामने आया है. यहां की एक मंदिर में पुजारी को लगातार धमकियां दी जाती थीं. जिससे तंग आकर पुजारी अपने साथ भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियां लेकर चले गए.

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मंदिर में रोता श्रद्धालु. (Photo: Screengrab)
मंदिर में रोता श्रद्धालु. (Photo: Screengrab)

मध्य प्रदेश राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में आस्था उस वक्त कांप उठी, जब सुबह मंदिर के कपाट खुले और सामने ऐसा दृश्य था जिसने हर किसी का दिल दहला दिया. क्योंकि जगन्नाथ मंदिर का गर्भगृह खाली था. भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा अपने स्थान पर नहीं थे. जिस दरबार में हर दिन भक्ति की गूंज उठती थी, वहां आज सन्नाटा चीख रहा था. श्रद्धालु ठिठक गए, आंखें नम हो गईं और किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि भगवान का घर यूं सूना हो जाएगा.

रोज की तरह सुबह डॉ. एस. प्रसाद जब पूजा करने पहुंचे तो उन्हें भी मूर्तियां नहीं मिलीं. जिसके बाद वह रोने लगे और कहने लगे की कहां चले गए मेरे भगवान... पूरा मंदिर ही खाली हो गया. यह कहकर वह फफक-फफक कर रोने लगे. जिसका एक वीडियो भी सामने आया है. प्रसाद के आंसू रुक नहीं रहे थे. 

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उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी विष्णुदास को राधेश्याम सेन और जीतू सोनी द्वारा धमकियां दी गईं. जबकि भंवरलाल दांगी पर मारपीट के आरोप हैं. इसकी शिकायत थाने में भी की गई थी, लेकिन हालात नहीं बदले. पुजारी विष्णुदास का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उनकी टूटी हुई आवाज में दर्द साफ झलकता है. 

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हालात बिगड़ने पर मंदिर छोड़कर चले गए पुजारी, मूर्तियां भी ले गए साथ

वे बताते हैं कि कैसे उन्हें प्रताड़ित किया गया, कैसे उनके लिए मंदिर में रहना मुश्किल कर दिया गया. दूसरी ओर, डॉ. एस. प्रसाद की सिसकियां इस पूरे घटनाक्रम की गवाही दे रही हैं जैसे आस्था खुद रो पड़ी हो. उन्होंने बताया कि 2021 में वृंदावन से भगवान की प्रतिमाएं लाकर गर्भगृह में स्थापित की गई थीं. तभी से विष्णुदास वहीं रहकर सेवा कर रहे थे. लेकिन हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें भगवान के साथ ही मंदिर छोड़ना पड़ा.

इधर, खिलचीपुर थाना प्रभारी उमाशंकर मुकाती ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. पुलिस टीम उनके नेतृत्व में वृंदावन रवाना हो रही है, ताकि पुजारी और भगवान की प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ वापस लाकर पुनः मंदिर में विराजित किया जा सके. पुजारी को पूरी सुरक्षा देने की बात भी कही गई है. लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. लोगों के दिलों में आक्रोश है और आंखों में सवाल. क्या अब भगवान भी सुरक्षित नहीं? आखिर कब तक आस्था यूं ही डर और दबाव के साए में सिसकती रहेगी…?

5 सालों से मंदिर में सेवा कर रहे थे विष्णुदास

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बताया जा रहा है कि मंदिर के पुजारी विष्णुदास, जो पिछले पांच सालों से पूरी श्रद्धा के साथ सेवा कर रहे थे. लगातार मिल रही धमकियों और प्रताड़ना से अंदर तक टूट गए थे. हालात ऐसे बने कि उन्हें मंदिर छोड़ना पड़ा. ऐसे में जाते-जाते वे भगवान की प्रतिमाएं भी अपने साथ वृंदावन ले गए. जैसे अपनी पीड़ा, अपना विश्वास और अपना सब कुछ समेटकर चले गए हों. 

स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर परिसर में असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा था. वहां गांजा पीना, जमावड़ा लगाना और मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिशें आम हो गई थीं. पुजारी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा था. 

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