मध्यप्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है. परिजनों के अनुसार वह NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और हाल ही में हुई परीक्षा में लगभग 650 अंक आने की उम्मीद थी. उनका आरोप है कि NEET का पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगी थी, जिसके बाद उसने जान दे दी.
'कहती थी बहुत नाम होगा पापा'
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने आजतक से जब बात की तो बेटी के दर्द में रुंधे हुए गले से वे कहने लगे- 'आकांक्षा हमें बहुत सारे सपने दिखा कर चली गई. कहती थी बहुत नाम होगा पापा. मुझे भी इस तरह घर पर मीडिया का इंतजार था लेकिन तब जब मेरी बेटी के नाम के आगे डॉक्टर लगे तब'.
3 लाख का कर्ज और कुक की नौकरी
परिजनों के मुताबिक, आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के बावजूद आकांक्षा के किसान पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था, ताकि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न रहे. परिवार ने उसे नागपुर के एक निजी कोचिंग संस्थान में NEET की तैयारी के लिए भेजा था.
कृष्ण कुमार चतुर्वेदी खेती-किसानी से जुड़े थे, लेकिन बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने नागपुर में कुक का काम भी शुरू कर दिया था. वह वहीं रहकर उसकी पढ़ाई में सहयोग कर रहे थे. परिवार को पूरा विश्वास था कि इस बार आकांक्षा का मेडिकल कॉलेज में चयन हो जाएगा और वह डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा करेगी. हालांकि, पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबरों के बाद वह काफी निराश रहने लगी. इस घटना के बाद परिवार गहरे दुख में है.
'दोबारा नीट देने की हिम्मत नहीं है'
आकांक्षा की मौत के बाद पुलिस को मौके से एक नोट भी मिला है. परिजनों के अनुसार, उसमें आकांक्षा ने अपने माता-पिता से क्षमा मांगते हुए लिखा था कि उन्हें उससे बहुत उम्मीदें थीं और वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन उसमें दोबारा नीट की परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है.
पेपर लीक, रद्द और रि- एग्जाम
बता दें कि NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को झटका लगा है. 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक की आशंका सामने आई थी. NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई. 12 मई को परीक्षा निरस्त कर दी गई और पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया गया. इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने 21 मई को री-एग्जाम की तारीख घोषित की. पूरे मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में लगातार नई याचिकाएं दायर की जा रही हैं और परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों, जैसे पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की मांग उठ रही है. वहीं दूसरी ओर, पेपर लीक मामले से जुड़े कथित नेटवर्क पर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं और आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है.