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MP के रईस विधायक का बड़ा दांव: 51% से कम जनादेश मिला तो देंगे इस्तीफा, ढाई साल बाद खुद कराएंगे 'चुनाव'

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक अनोखा प्रयोग देखने को मिल सकता है. प्रदेश के सबसे रईस विधायकों में शुमार संजय सतेंद्र पाठक ने अपने ही कार्यकाल का मध्यवर्ती जनादेश कराने का ऐलान किया है.

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कार्यकाल के ढाई साल पर अग्निपरीक्षा देंगे संजय पाठक.(Photo:ITG)
कार्यकाल के ढाई साल पर अग्निपरीक्षा देंगे संजय पाठक.(Photo:ITG)

मध्य प्रदेश के सबसे रईस विधायकों में शुमार विधायक संजय सतेंद्र पाठक मध्यवर्ती चुनाव कराएंगे. ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर संजय पाठक अपनी विधानसभा क्षेत्र में जनादेश के जरिए क्षेत्र में अपना मूल्यांकन कराने जा रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने घोषणा कि है कि जनादेश में 51 फीसदी से कम वोट मिलने पर वह इस्तीफा दे देंगे. इसके पहले भी 2023 में विधानसभा चुनाव के पूर्व संजय पाठक जनादेश करा चुके हैं.

दरअसल, कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विधानसभा से बीजेपी विधायक संजय पाठक विधानसभा कार्यकाल का ढाई वर्ष पूर्ण होने पर क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता का मूल्यांकन करना चाहते हैं. जिसके लिए उन्होंने बाकायदा मंच से घोषणा की है कि वे ढाई वर्ष में जनता के बीच जनादेश कराएंगे और 51 फीसदी से कम जनादेश मिलने पर इस्तीफा दे देंगे.

विधायक संजय सतेंद्र पाठक ने यह घोषणा अपने क्षेत्र नगर परिषद कैमोर में आयोजित एक कार्यक्रम के मंच से की है. उन्होंने कहा कि 2 साल से ऊपर हो गया विधायक बने , विधायक बने रहना चाहिए या नहीं? इसको भी चेक किया जाए.

51% वोट नहीं तो विधायक नहीं

जनादेश की तरह ही कोई नया सूत्र निकालेंगे और देखेंगे हमारे ढाई वर्ष के कार्यकाल को जनता कितने नंबर देती है. अगर जनता हमको 51% से ऊपर नंबर देगी तो विधायक रहे आएंगे नहीं तो इस्तीफा देकर घर बैठ जाएंगे.

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BJP विधायक संजय पाठक ने कहा, ''मन में आया कि मध्यवर्ती करा लिया जाए ताकि पता लगे कि आपकी सेवा करने के लिए मैं योग्य हूं कि नहीं?. हो सकता है कि मई जून में एक बार फिर से क्रास चेक करेंगे, जनता के कटघरे में लेकर जाएंगे, घर-घर दरवाजे में पहुंचेंगे और पूछेंगे कि हम आपकी सेवा के योग्य हैं या नहीं? इस पद पर बने रहने योग्य है या नहीं, विधायक बना रहा हूं कि छोड़ दूं. 51 फीसदी से कम एक भी व्यक्ति ने वोट दिया तो उसी दिन इस्तीफा दे दूंगा.''

2023 का सफल प्रयोग

संजय पाठक साल 2023 विधानसभा चुनाव के पहले अपने क्षेत्र में जनादेश करा चुके हैं. चुनाव के पहले कराए गए चुनाव को जनादेश नाम दिया गया था. चार दिन चली वोटिंग प्रक्रिया के बाद वोटो की गिनती होकर घोषित परिणाम में 75 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने संजय पाठक के चुनाव लड़ने के पक्ष में वोट दिया था.

चुनाव आयोग की तर्ज पर मतगणना के लिए 66 टेबल में 215 लोग लगे रहे ,जिनमे 290 पेटी की गणना पूर्ण की गई. विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 33 हजार मतदाता हैं, जिनमें से 1 लाख 37 हजार 55 वोट डाले गए. जिसमें 75 फीसदी से अधिक 1 लाख 3 हजार 203 मतदाताओं ने संजय पाठक के चुनाव लड़ने के पक्ष में वोट दिया और 30 हजार 82 लोगों ने 'न' में वोटिंग की है, बाकी वोट रिजेक्ट हो गए. इस तरह जनादेश का फैसला संजय पाठक के पक्ष में रहा.

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मुश्किलों के बीच नया दांव

बता दें कि विजयराघवगढ़ के विधायक और पूर्व राज्य मंत्री संजय पाठक किन्हीं न किन्ही वजह से लगातार सुर्खियों में हैं और उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.

सहारा जमीन घोटाला, एक्सिस माइनिंग और 443 करोड़ का जुर्माना, हाईकोर्ट जज को फोन करने पर आपराधिक अवमानना का आदेश इत्यादि मामले उनके गले की हड्डी बने हुए हैं.

सियासी मायने

संजय पाठक के द्वारा ढाई वर्ष के कार्यकाल का मूल्यांकन सर्वे कराए जाने की घोषणा से नई मुश्किल खड़ी होगी या राहें आसान होंगी? यह तो समय बताएगा. लेकिन इससे नई बहस के साथ ही एक नई परिपाटी का जन्म हो सकता है. जो आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ढाई वर्ष का सर्वे जनादेश परिणाम से प्रदेश के सबसे रईस विधायक संजय पाठक के राजनीतिक भविष्य की क्या दिशा तय होती है.

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