मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा पिछले तीन वर्षों में जारी किए गए टेंडरों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2023 से 2025 के बीच कंप्यूटर, यूपीएस और इंटरैक्टिव बोर्ड की खरीद में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. BJP ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया करार दिया है.
पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश नायक ने कहा कि 2023 में तत्कालीन अध्यक्ष वीरा राणा के कार्यकाल के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 3500 कंप्यूटर, UPS और प्रिंटर खरीदने के लिए एक टेंडर जारी किया था. आरोप है कि इसकी लागत को 40 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 90 करोड़ रुपये कर दिया गया.
उन्होंने दावा किया कि इसके अलावा, प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के लिए टेंडर में कुछ तकनीकी शर्तें जोड़ दी गईं और कहा कि ये उपकरण बाजार कीमतों से 200 से 250 प्रतिशत अधिक कीमतों पर खरीदे गए.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि इस संबंध में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना इस बात का संकेत है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.
नायक ने दावा किया कि 2025 में जब इंटरैक्टिव बोर्ड के लिए टेंडर जारी किए गए, तब भी तकनीकी शर्तें जोड़कर प्रतिस्पर्धा को सीमित किया गया. उन्होंने कहा कि 60 हजार से 70 हजार रुपये प्रति नग कीमत वाले उपकरण 1.10 लाख रुपये से अधिक की कीमतों पर खरीदे गए. साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा टेंडर प्रक्रियाओं में भी इसी तरह की अनियमितताएं दोहराए जाने की आशंका है.
उन्होंने कहा कि BJP सरकार के तहत, टेंडर प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है और यह पहले से ही तय होता है कि ठेका किसे दिया जाएगा.
इन आरोपों का जवाब देते हुए BJP प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने न्यूज एजेंसी भाषा से कहा कि विपक्षी नेता बेबुनियाद दावे करने के अलावा और कुछ नहीं करते. उन्होंने आगे कहा कि जब से कांग्रेस विपक्ष में आई है, तब से वह कोई भी ऐसा आरोप नहीं लगा पाई है जिसमें कोई ठोस आधार या सच्चाई हो; उसका एकमात्र मकसद सिर्फ विवाद खड़ा करना है.