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MP: तलाकशुदा बेटियां होंगी पेंशन की हकदार, CM मोहन यादव कैबिनेट का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश सरकार ने पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि अब तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की परिवार पेंशन की पात्र होंगी. सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया है.

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तलाकशुदा बेटियों को मिलेगी माता-पिता की पेंशन. (Photo: Representational)
तलाकशुदा बेटियों को मिलेगी माता-पिता की पेंशन. (Photo: Representational)

मध्य प्रदेश सरकार ने परिवार पेंशन नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए तलाकशुदा बेटियों को बड़ी राहत दी है. मंगलवार को राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया. अब तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की परिवार पेंशन की पात्र होंगी.

सरकार के इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में दूरगामी कदम माना जा रहा है. अब तक नियमों की जटिलताओं के कारण कई तलाकशुदा बेटियां परिवार पेंशन से वंचित रह जाती थीं. खासतौर पर वो महिलाएं, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका था और जिनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती थी.

तलाकशुदा बेटियों को बड़ी राहत 

मोहन सरकार ने इस मानवीय पहल के जरिए ऐसी जरूरतमंद बेटियों को आर्थिक संबल देने का रास्ता खोला है, जो जीवन में पहले ही सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर चुकी हैं.

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार अब परिवार पेंशन के दायरे में अविवाहित और विधवा पुत्रियों के साथ-साथ तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है. सरकार का मानना है कि यह संशोधन जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करेगा और उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करेगा.

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने इस फैसले को सामाजिक न्याय की दिशा में एक मजबूत संदेश बताया है. सरकार का कहना है कि तलाकशुदा बेटियों को भी वही अधिकार मिलने चाहिए जो अन्य आश्रित परिवार सदस्यों को मिलते हैं.

माता-पिता की पेंशन की हकदार होंगी

इस बदलाव के बाद ऐसी बेटियां, जो कठिन परिस्थितियों में अकेले जीवन गुजार रही हैं, उन्हें परिवार पेंशन का लाभ मिल सकेगा. यह निर्णय उन महिलाओं के लिए राहत लेकर आया है, जो तलाक के बाद सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में पहुंच जाती हैं. सरकार के इस फैसले की प्रदेशभर में चर्चा हो रही है और इसे महिलाओं के हित में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है.

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