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अपनी ही पार्टी के नेता के घर हमला और तोड़फोड़, BJP ने पार्षद को 6 साल के लिए किया बाहर; CM ने भी पुलिस को दिए थे सख्त एक्शन के निर्देश

BJP पार्षद कमलेश कालरा ने दावा किया था कि उनके और नगर निगम के एक कर्मचारी के बीच फोन पर हुई बहस के बाद जीतू यादव ने 50 से 60 हथियारबंद लोगों को उनके घर भेजा और उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया, उनके साथ मारपीट की और परिसर में तोड़फोड़ की.

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बाएं से BJP पार्षद कमलेश कालरा और जीतू यादव. (फाइल फोटो)
बाएं से BJP पार्षद कमलेश कालरा और जीतू यादव. (फाइल फोटो)

MP News: इंदौर में अपनी ही पार्टी के नेता के घर पर हमला और तोड़फोड़ करने के मामले में एक पार्षद को BJP से बाहर कर दिया. पार्टी ने पार्षद जितेन्द्र उर्फ ​​जीतू यादव को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है. 

पार्टी के प्रदेश महासचिव भगवानदास सबनानी ने इंदौर जिला इकाई के अध्यक्ष गौरव रणदिवे को लिखे पत्र में कहा, "इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद जितेन्द्र कुमार (जीतू यादव) का अपनी ही पार्टी के एक पार्षद से विवाद हो गया था. इसके बाद की अभद्र हरकतों से पार्टी की छवि धूमिल हुई है, जो अनुशासनहीनता के दायरे में आता है."

भाजपा पार्षद कमलेश कालरा ने दावा किया था कि उनके और नगर निगम के एक कर्मचारी के बीच फोन पर हुई बहस के बाद जीतू यादव ने 50 से 60 हथियारबंद लोगों को उनके घर भेजा और उन्होंने उनके परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया, उनके साथ मारपीट की और परिसर में तोड़फोड़ की.

घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें कुछ लोग घर में तोड़फोड़ करते और परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज करते नजर आ रहे थे. आरोप यह भी है कि समूह ने कालरा के बेटे को नंगा कर दिया. कालरा ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है. 

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को घटना में शामिल बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए. CM ने 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "इंदौर में कालरा जी के घर में घुसकर कुछ बदमाशों द्वारा मारपीट और परिवार के सदस्यों के साथ बदसलूकी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. इस संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज की जांच और अन्य लोगों से पूछताछ कर नौ आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है." 

CM यादव ने कहा कि घटना में नाबालिग के साथ बदसलूकी भी शामिल है, जिसके चलते लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जाती है. 

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