मध्य प्रदेश के मुरैना जिला प्रशासन ने चंबल इलाके में अवैध रेत खनन, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज पर नजर रखने के लिए 'कोटवारों' को स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) के तौर पर नियुक्त किया है. यह कदम नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी में गैर-कानूनी खुदाई पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद की जा रही सख्त कार्रवाई के बीच उठाया गया है.
कोटवार मध्य प्रदेश में पारंपरिक गांव के चौकीदार होते हैं जो रेवेन्यू अधिकारियों की मदद करते हैं और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच एक कड़ी का काम करते हैं. उन्हें मानदेय दिया जाता है.
पुलिस एक्ट के तहत कलेक्टर ने जारी किया आदेश
अधिकारियों ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार जांगिड ने पुलिस एक्ट, 1861 और मध्य प्रदेश कोटवार नियमों के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में आदेश जारी किया.
कलेक्टर ने अधिकारियों को अवैध खनन के खिलाफ चल रहे अभियान को तेज करने और जिले में ऐसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेलबनाने का निर्देश दिया.
अधिकारियों ने कहा कि कोटवारों को SPO के तौर पर नियुक्त करने से अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है, साथ ही पुलिस और रेवेन्यू विभागों के बीच कानून लागू करने और तालमेल को मज़बूत करने में भी मदद मिलेगी.
उन्होंने बताया कि जिले की अम्बाह, जौरा, मुरैना और सबलगढ़ तहसीलों के चुनिंदा गांवों के लिए एसपी धर्मराज मीणा के अनुरोध पर कोटवारों को SPO के तौर पर नियुक्त किया गया.
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, SPO अपने-अपने इलाकों में अवैध रेत निकालने, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज गतिविधियों पर लगातार नज़र रखेंगे और किसी भी उल्लंघन के बारे में संबंधित पुलिस स्टेशन और अधिकारियों को तुरंत सूचित करेंगे.
कोटवार संबंधित स्टेशन हाउस ऑफिसर की देखरेख और नियंत्रण में काम करेंगे और ग्रामीण इलाकों में खुफिया जानकारी जुटाने, अपराध रोकने, निगरानी, गश्त और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करेंगे.
जमीनी स्तर पर बनेगा मजबूत सूचना नेटवर्क
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का मकसद जमीनी स्तर पर एक मजबूत सूचना नेटवर्क बनाना है ताकि अवैध खनन गतिविधियों का समय पर पता लगाया जा सके और कानून लागू करने के प्रयासों को मजबूत किया जा सके.
कोटवारों को चंबल इलाके में अवैध रेत खनन के खिलाफ तेज कार्रवाई के बीच शामिल किया गया है. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक फॉरेस्ट गार्ड की मौत का स्वतः संज्ञान लेने के बाद की जा रही है, जिसे इस साल 8 अप्रैल को मुरैना जिले में रेत खनन माफिया से जुड़े एक ट्रैक्टर से कुचल दिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट की फटकार
20 मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल घड़ियाल सैंक्चुअरी में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के चलने को लेकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि इस समस्या को रोकने के प्रयास नाकाफी रहे हैं.
कोर्ट ने तीनों राज्यों को निर्देश दिया कि वे छह महीने के भीतर निगरानी का सिस्टम बनाएं, CCTV कैमरे लगाएं और अवैध खनन में शामिल वाहनों को जब्त करें.
इस गतिविधि को संगठित अवैध खनन नेटवर्क बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा को सिर्फ अदालती दबाव में की जाने वाली औपचारिकता नहीं माना जा सकता, बल्कि यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है.
मुख्य सचिव ने भी दिखाई सख्ती
कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध खनन से सैंक्चुअरी के नाज़ुक इकोसिस्टम और घड़ियाल समेत जंगली जानवरों की प्रजातियों को खतरा है. बता दें कि 12 जून को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों के अधिकारियों को अवैध रेत खनन, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया.