बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार को बागपत के बड़ौत में पहुंचे ने सांसद-विधायकों से लेकर केंद्र सरकार तक को कटघरे में खड़ा कर दिया. अग्निहोत्री ने दो टूक शब्दों में कहा, अगर सजातीय MP-MLA की बुद्धि खुले तो साथ आ जाएं, वर्ना आने वाले वक्त में चुनाव लड़ने लायक भी नहीं बचे हो. उनके बयान में व्यवस्था, सरकार और जनतंत्र तीनों पर तीखा हमला साफ नजर आया. साथ ही कहा कि सांसद-विधायक जनता के नहीं, कॉरपोरेट के कर्मचारी बन गए हैं. उन्होंने कहा, 'देश पर अब वेस्ट इंडिया कंपनी का राज' है. MP-MLA की बुद्धि खुले तो साथ आ जाएं, वर्ना आने वाले वक्त में चुनाव लड़ने लायक भी नहीं बचे हो.
वेस्ट इंडिया कंपनी के CEO PM मोदी और MD अमित शाह
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि आज के सांसद और विधायक जनता के प्रतिनिधि नहीं बल्कि कॉरपोरेट कंपनियों के कर्मचारी बनकर काम कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जनतंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है. आज हालात ये हैं कि कोई सरकार नहीं बची, जो दिख रही है वो सिर्फ कॉरपोरेट कंट्रोल सिस्टम है. अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसते हुए कहा, पहले देश में ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था, अब वेस्ट इंडिया कंपनी चल रही है, जिसके CEO मोदी हैं और MD अमित शाह. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री, संसद, विधायक से लेकर ED जैसी एजेंसियां तक इसी शिकंजे में काम कर रही हैं
वहीं अलंकार अग्निहोत्री ने UGC कानून को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कानून लाकर जनरल और OBC समाज को आपस में बांटने का षड्यंत्र रचा गया है. ये तो बजरंग बली के आशीर्वाद से समाज जाग गया, अपने बयान में अग्निहोत्री ने SC/ST एक्ट को भी आड़े हाथों लिया और इसे “काला कानून” करार दिया. उन्होंने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग समाज को तोड़ने का काम कर रहा है.
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने हाल में जातिगत भेदभाव से जुड़े यूजीसी के नए प्रावधानों और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान के विरोध में अपना पद छोड़ने का ऐलान किया. इस कदम के बाद प्रशासन ने सेवा नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उन्हें निलंबित भी कर दिया है. उनके फैसले के बाद लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री कौन हैं और उन्होंने इतना बड़ा निर्णय क्यों लिया.
बताया जाता है कि अग्निहोत्री पहले भी जीवन में कई साहसिक फैसले ले चुके हैं. पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और भाई-बहनों के लिए नौकरी शुरू कर दी. वे पहले आईटी सेक्टर में करीब एक दशक तक कार्यरत रहे. बाद में, शादीशुदा होने के बावजूद उन्होंने स्थिर करियर छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी का जोखिम उठाया और प्रशासनिक सेवा में आए.