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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बीच मंत्री विजय शाह का ध्वजारोहण, कांग्रेस ने घेरा, पटवारी बोले- यह संविधान को चुनौती

MP के विवादों में घिरे मंत्री विजय शाह को गणतंत्र दिवस समोराह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा है. कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 2 हफ्ते में फैसला लेने का आदेश दिया है.

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खंडवा में विजय शाह ने परेड की सलामी ली.(Photo:ITG)
खंडवा में विजय शाह ने परेड की सलामी ली.(Photo:ITG)

गणतंत्र दिवस के मौके पर खंडवा में कैबिनेट मंत्री विजय शाह के झंडा फहराने पर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा सरकार पर 'बेशर्मी' और 'अदालत की अवमानना' का आरोप लगाया है.

दरअसल, 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मोहन यादव सरकार को कर्नल कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादास्पद टिप्पणियों के लिए उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के बारे में दो हफ्ते के अंदर फैसला लेने का निर्देश दिया था. 

इससे पहले, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने के लिए शाह को फटकार लगाई थी और पुलिस को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था.

बता दें कि राज्य के आदिवासी मामलों, सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन और भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास मंत्री शाह ने अपने गृह जिले खंडवा में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

कांग्रेस ने CM के 'वर्किंग स्टाइल' को घेरा

एक न्यूज एजेंसी के अनुसार, सत्ताधारी दल पर हमला बोलते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शाह को तुरंत उनके मंत्री पद से हटा देना चाहिए था, लेकिन बीजेपी ने शाह से गणतंत्र दिवस पर झंडा फहरवाया. यह संविधान को चुनौती देना है. शाह से इस्तीफा न दिलवा पाना मुख्यमंत्री मोहन यादव के काम करने के तरीके पर सवाल उठाता है."

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उमंग सिंघार ने मोहन सरकार की 'निष्क्रियता' पर उठाए सवाल

विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने भी शाह द्वारा तिरंगा फहराने पर आपत्ति जताई. सिंघार ने भोपाल में पत्रकारों से कहा, "बीजेपी एक बेशर्म पार्टी बन गई है. विजय शाह के खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई है, वह सिर्फ एक औपचारिकता है. राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को कई मामलों में स्वतः संज्ञान लेना पड़ रहा है."

इस बीच, जब कांग्रेस के हमले के बारे में पूछा गया तो डिप्टी CM जगदीश देवड़ा ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. इंदौर में मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के बाद देवड़ा ने पत्रकारों से कहा, "मुझे लगता है कि हमें इस मौके (गणतंत्र दिवस) पर सिर्फ बधाई और शुभकामनाएं स्वीकार करनी चाहिए." 

BJP ने किया मंत्री का बचाव

हालांकि, बीजेपी के राज्य मीडिया सेल के प्रभारी आशीष अग्रवाल ने एक आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए शाह का बचाव किया.

उन्होंने दावा किया, "मामला पहले ही कोर्ट के संज्ञान में है और सब कुछ कोर्ट के निर्देश के अनुसार किया जा रहा है. कांग्रेस के हिसाब से कार्रवाई नहीं की जा सकती."

जब खंडवा में मीडिया ने कांग्रेस की आपत्तियों पर शाह की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, तो वह गणतंत्र दिवस के मौके पर लोगों को शुभकामनाएं देने के बाद चले गए. 

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पिछले साल, शाह तब विवादों में घिर गए थे जब एक वीडियो में उन्हें कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था. बता दें कि कर्नल कुरैशी ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एक और महिला अधिकारी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ देश भर में मशहूर हुई थीं.

क्या है कानूनी विवाद?

मंत्री शाह ने कथित तौर पर 12 मई 2025 को इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में 'हलमा'  पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों का स्वतः संज्ञान लिया, जिसके बाद जिले के मानपुर पुलिस स्टेशन में कैबिनेट मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज की गई. बाद में शाह ने यह दावा करते हुए खेद व्यक्त किया कि वह कर्नल कुरैशी का सम्मान अपनी बहन से भी ज्यादा  करते हैं.

28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने शाह को कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपनी टिप्पणियों पर सार्वजनिक माफी रिकॉर्ड पर न रखने के लिए फटकार लगाई थी और कहा था कि वह "अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं". अदालत ने यह भी कहा था कि मंत्री का आचरण उसके इरादों और नेकनीयती पर संदेह पैदा कर रहा है.

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