छत्तीसगढ़ पुलिस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के मामले में मध्य प्रदेश की जेल से फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ नरेंद्र यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम को गिरफ्तार किया है. यादव ने 2006 में बिलासपुर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में शुक्ला का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद पूर्व अध्यक्ष की मृत्यु हो गई थी. फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ को इससे पहले मध्य प्रदेश के दमोह के एक अस्पताल में सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था. वह वहां की जेल में बंद था.
बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने बताया कि नरेंद्र यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम को गुरुवार को दमोह जिला जेल से हिरासत में लिया गया था और दोनों राज्यों की अदालतों से आवश्यक आदेश प्राप्त करने के बाद शुक्रवार सुबह बिलासपुर लाया गया.
बता दें कि कोटा विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन कांग्रेस विधायक शुक्ला की अगस्त 2006 में बिलासपुर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में मृत्यु हो गई थी. उन्होंने 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था, जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना था.
पूर्व अध्यक्ष के बेटे प्रदीप शुक्ला ने हाल ही में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि जब उनके पिता को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब यादव उस अस्पताल से जुड़े थे.
शिकायत में कहा गया है, "नरेंद्र यादव ने मेरे पिता की हृदय शल्य चिकित्सा की थी और फिर 20 अगस्त, 2006 को मृत घोषित किए जाने से पहले उन्हें 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था. अस्पताल प्रबंधन ने मेरे पिता के इलाज के लिए राज्य सरकार से 20 लाख रुपए लिए थे."
बिलासपुर पुलिस ने 20 अप्रैल को यादव और प्राइवेट अस्पताल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया.
पुलिस ने पाया कि यादव की डिग्री फर्जी है, और भारतीय चिकित्सा परिषद/छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद में उनका पंजीकरण अभी तक सत्यापित नहीं हो पाया है.
सिंह ने कहा, "प्राइवेट अस्पताल (बिलासपुर में) में अपने कार्यकाल के दौरान यादव द्वारा इलाज किए गए सभी मरीजों को जांच में शामिल किया गया है. जांच के दौरान पाया गया कि यादव द्वारा इलाज किए जाने के बाद एक अन्य मरीज भगत राम डोडेजा की भी मृत्यु हो गई थी. दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए जांच जारी है."
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक शिकायत मिलने के बाद यादव को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मिशन अस्पताल, दमोह में सात लोगों की मृत्यु हो गई थी, जहां उन्होंने हृदय रोगों के इलाज के नाम पर मरीजों का ऑपरेशन किया था.
इंदौर स्थित एक रोजगार परामर्श फर्म के निदेशक ने पिछले महीने बताया कि यादव ने 2020 से 2024 के बीच तीन बार नौकरी के लिए अपना रिज्यूमे भेजा था और दावा किया था कि उन्होंने हजारों मरीजों का ऑपरेशन किया है. 2024 में फर्म को भेजे गए 9 पन्नों के रिज्यूमे में यादव ने खुद को वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ बताया था और अपना स्थायी पता ब्रिटेन के बर्मिंघम में होने का दावा किया था.
फर्म के निदेशक ने बताया कि बायोडाटा में यादव ने यह भी उल्लेख किया था कि वे हजारों हृदय रोगियों के ऑपरेशन में शामिल रहे हैं, जिनमें 18 हजार 740 कोरोनरी एंजियोग्राफी और 14 हजार 236 कोरोनरी एंजियोप्लास्टी के ऑपरेशन शामिल हैं. यादव ने खुद को एक बड़ी साजिश का शिकार बताते हुए दावा किया कि उनकी डिग्रियां असली हैं.