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आसाराम के बेटे नारायण साईं का हुआ तलाक, पत्नी जानकी हरपालानी को देने होंगे इतने करोड़ रुपए

इंदौर की फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और जानकी देवी के तलाक को मंजूरी देते हुए 2 करोड़ रुपये एलुमनी का आदेश दिया. 2008 में शादी के बाद 2013 से दोनों अलग थे. पत्नी ने परित्याग और अन्य संबंधों के आरोप लगाए. धारा 125 के तहत 50 हजार मासिक भरण-पोषण और करीब 50 लाख बकाया की वसूली भी जारी है. मामले में आगे हाई कोर्ट जाने की संभावना है.

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नारायण साईं और जानकी हरपालानी की शादी साल 2008 में हुई थी. Photo ITG
नारायण साईं और जानकी हरपालानी की शादी साल 2008 में हुई थी. Photo ITG

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित फैमिली कोर्ट ने लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के पुत्र नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी हरपालानी के विवाह को समाप्त घोषित कर दिया है. अदालत ने तलाक की याचिका मंजूर करते हुए नारायण साईं को पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में 2 करोड़ रुपये अदा करने का निर्देश दिया है. नारायण साईं फिलहाल दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सूरत जेल में सजा काट रहा है.

जानकारी के अनुसार, यह मामला करीब आठ वर्षों से अदालत में लंबित था. सभी पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद 2 अप्रैल को निर्णय सुरक्षित रखा गया था, जिसकी जानकारी बाद में जानकी के वकील अनुराग गोयल ने साझा की.

याचिका में बताया गया कि दोनों की शादी वर्ष 2008 में हुई थी, लेकिन 2013 से ही दोनों अलग-अलग रह रहे हैं. पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा और उन्हें परित्यक्त जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा. मौजूदा समय में वह अपनी मां के साथ रह रही हैं. याचिका में यह भी कहा गया कि नारायण साईं के अन्य महिलाओं से संबंध थे और उनके खिलाफ दुष्कर्म मामले में सजा का भी जिक्र किया गया.

5 करोड़ रुपये की हुई थी मांग
भरण-पोषण को लेकर पत्नी ने 5 करोड़ रुपये की मांग की थी, हालांकि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद 2 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया. वहीं, वकील अनुराग गोयल के मुताबिक, पहले से ही अदालत ने प्रति माह 50 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन इसका नियमित भुगतान नहीं हुआ. इस कारण करीब 50 लाख रुपये की बकाया राशि हो गई है, जिसकी वसूली की प्रक्रिया अब शुरू की जाएगी.

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सूत्रों की मानें तो इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. साथ ही, संपत्तियों के सत्यापन से जुड़ी जानकारी अब तक पूरी तरह प्रस्तुत नहीं होने के कारण आगे भी विवाद की स्थिति बनी रह सकती है.

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