
पढ़ने में उसकी दिलचस्पी नहीं थी. माता-पिता पढ़ने के लिए दबाव बनाते थे, ट्यूशन जाने के लिए कहते थे, तो तरह-तरह के बहाने बनाने लगता था. इन्हीं बहानों की वजह से पिता अक्सर पिटाई कर दिया करते थे. नाराज होकर 10वीं क्लास का वह छात्र अपना घर छोड़कर चला गया, लेकिन 6 साल बाद जब पुलिस ने उस नाबालिग को ढूंढा तो वह मुंबई में बड़ा आदमी बन चुका था. किसी फिल्म की तरह यह कहानी ग्वालियर के हजीरा इलाके में रहने वाले आशु राजपूत की है, जो 6 साल पहले अपना घर छोड़कर भाग गया था.
इस कहानी की शुरुआत साल 2018 में हुई, जब आशु राजपूत 10वीं क्लास का छात्र हुआ करता था. आशु का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और इस वजह से घर में उसे डांट के साथ पिटाई भी पड़ती थी. माता-पिता उसे ट्यूशन जाने के लिए कहते तो वह पढ़ाई से बचने के तरीके ढूंढता था. इसी बात से आशु के पिता महेंद्र हमेशा उससे नाराज रहते थे और अक्सर आशु की पिटाई कर देते थे.
अपने पिता के हाथों बार-बार पीटे जाने से आशु इतना नाराज हो गया कि सितंबर 2018 में वह घर छोड़कर चला गया. मां-बाप ने लापता बेटे को अपने स्तर पर तलाशा, जब कहीं सुराग नहीं मिला तो ग्वालियर के हजीरा थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा दी.
पुलिस ने भी अपने स्तर पर आशु की खोज शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. जिसके बाद लापता की सूचना देने वाले को ₹10000 देने की इनाम की घोषणा भी कर दी गई, लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ.
'ऑपरेशन मुस्कान' में खुली आशु की फाइल
पिछले दिनों ग्वालियर में 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत पुलिस ने आशु की फाइल को एक बार फिर से खोला और आशु की तलाश शुरू कर दी. पुलिस ने जब आशु के आधार कार्ड पर किसी मोबाइल सिम के एक्टिव होने की जानकारी ली, तो पुलिस को मालूम चल गया कि आशु के आधार कार्ड पर एक सिम संचालित है. इसी सिम को ट्रेस करते हुए पुलिस मुंबई पहुंची तो हैरान रह गई, क्योंकि पुलिस को यहां आशु मिला तो जरूर लेकिन इस हाल में मिला कि पुलिस भी अचंभित रह गई. जी हां, आशु यहां पर बड़ा आदमी बन चुका था. वह हर महीने लाखों रुपए कमा रहा है.

कानपुर, नोएडा और फिर मुंबई
पुलिस ने जब आशु से उसके 6 साल के सफर के बारे में पूछा तो आशु ने बताया कि घर से भगाने के बाद वह सीधा कानपुर पहुंचा था. यहां तकरीबन 7 महीने तक उसने एक होटल में काम करके अपना गुजारा किया. इसके बाद कानपुर से वह नोएडा पहुंचा. यहां भी 4 महीने गुजारे और फिर मुंबई के लिए निकल गया. मुंबई में उसने अपने कुछ दोस्त बनाए और इन दोस्तों ने आशु की मदद की.
होटल और कॉल सेंटर से पैसे कमाकर ग्रेजुशन
आशु ने यहां भी होटल और कॉल सेंटर में काम किया. काम से जो कमाई हुई, उस कमाई से उसने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की. ग्रेजुएट हो जाने के बाद आशु ने यहां रियल एस्टेट की एक कंपनी जॉइन कर ली और अब आशु इसी रियल स्टेट की कंपनी में काम करके हर महीने 2-3 लाख रुपए कमा रहा है.
आशु की बदल चुकी लाइफ़स्टाइल
मुंबई के अंधेरी इलाके में रह रहे आशु की लाइफ़स्टाइल बदल चुकी है और वह एक बड़ा आदमी बन चुका है. पुलिस आशु को लेकर मंगलवार को ग्वालियर पहुंची थी और इसके बाद आशु को उसके परिजनों से मिलवाया.
मां ने आशु को गले से लगाया
6 साल बाद बेटे को देख परिजन खुशी के मारे रोने लगे. मां ने आशु को गले से लगाया और खुशी के उनके आंसू छलक उठे. अपनी मां को रोते हुए देख आशु भी अपने आंसू नहीं रोक पाया. मां-बेटे का यह मिलन देखकर सभी की आंखें भीग गईं. जो आशु घर से भागते वक्त नाबालिग था, आज वह बालिग होने के साथ ही बड़ा आदमी भी बन गया है.