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मध्य प्रदेश

'किनारे पर घर मत बनाना, मैं लौटकर आऊंगा...', कौन हैं नरोत्तम मिश्रा, जिन्हें टिकट नहीं देने से दतिया में मचा बवाल

Narottam Mishra
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"समुद्र की लहरें पीछे जाती दिखें तो किनारे पर घर मत बना लेना... मैं लौटकर आऊंगा.", 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा का यह शायराना बयान केवल हार स्वीकार करने का संदेश नहीं था, बल्कि राजनीतिक वापसी का ऐलान भी माना गया था. लेकिन लगभग डेढ़ साल बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा फैसला लिया जिसने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी. (Photo- Facebook)

Narottam Mishra
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डॉ. नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक प्रभाव केवल दतिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में भी उनकी मजबूत पहचान रही है. उनका पैतृक निवास डबरा में है. वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद डबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई, जिसके बाद उन्होंने दतिया को अपनी नई राजनीतिक कर्मभूमि बनाया.  (Photo- Facebook)

Narottam Mishra
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भाजपा के टिकट पर उन्होंने 2008, 2013 और 2018 में लगातार जीत दर्ज की. शिवराज सिंह चौहान सरकार में वे गृह मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालते रहे. उन्हें लंबे समय तक मध्य प्रदेश भाजपा का प्रमुख ब्राह्मण चेहरा और शिवराज सरकार का सबसे प्रभावशाली मंत्री माना गया. (Photo- Facebook)
 

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Narottam Mishra
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2023 का विधानसभा चुनाव नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दौर साबित हुआ. तत्कालीन गृह मंत्री रहते हुए उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती के हाथों हार का सामना करना पड़ा. बाद में राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने से दतिया सीट खाली हुई और उपचुनाव की स्थिति बनी.  (Photo- Facebook)
 

Narottam Mishra
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दतिया लंबे समय तक नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़ रही है. 2008 के बाद उन्होंने लगातार यहां जीत दर्ज की और इस सीट को भाजपा के मजबूत गढ़ों में शामिल किया. यहीं से उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपना प्रभाव बढ़ाया और राज्य सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में जगह बनाई. (Photo- Facebook)

Narottam Mishra
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15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्मे डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने एम.ए. और पीएचडी की पढ़ाई जीवाजी विश्वविद्यालय से की. छात्र जीवन में ही वे राजनीति से जुड़ गए. वर्ष 1977-78 में वे जीवाजी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के सचिव बने. इसके बाद उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से रहा. (Photo- Facebook)
 

Narottam Mishra
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वे भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए लगातार आगे बढ़ते गए. 1990 में पहली बार विधायक बने और विधानसभा में सचेतक की भूमिका भी निभाई. इसके बाद 1998, 2003, 2008, 2013 और 2018 में लगातार विधानसभा पहुंचे. एक जून 2005 को बाबूलाल गौर मंत्रिमंडल में उन्हें पहली बार राज्य मंत्री बनाया गया. (Photo- Facebook)
 

Narottam Mishra
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कमलनाथ सरकार के पतन और चर्चित 'ऑपरेशन लोटस' में भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को भाजपा के भीतर बेहद अहम माना जाता है. संगठन और सत्ता के बीच बेहतर समन्वय, रणनीतिक क्षमता और आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें लंबे समय तक भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रखा. (Photo- Facebook)

Narottam Mishra
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ग्वालियर-चंबल क्षेत्र भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. इसी क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े नेता उभरे. लंबे समय तक यह तिकड़ी क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक ताकत का प्रमुख आधार रही. (Photo- Facebook)

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नरोत्तम मिश्रा
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 सूत्रों के अनुसार, दिल्ली स्तर पर कराए गए सर्वे में नरोत्तम मिश्रा की स्थिति मजबूत नहीं पाई गई, जो इस बार उनके टिकट कटने की मुख्य वजह बनी. केंद्रीय नेतृत्व ने लोकप्रियता के साथ-साथ स्थानीय संगठन और भविष्य की राजनीतिक स्वीकार्यता का आकलन करने के बाद ही आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाई.

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