कवि, पटकथा लेखक और गीतकार प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक के मंच से सिनेमा की समाज में भूमिका को लेकर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अपनी कई कविताएं सुनाईं और सेंसर बोर्ड की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की.
उन्होंने कहा कि कानून प्रतिबंध लगाता है, लेकिन सबसे बड़े परिवर्तन सोच के माध्यम से आते हैं. गंभीर मुद्दों में पर्दे की अहम भूमिका को लेकर उन्होंने कहा, 'मुझे उस वक्त दिक्कत होती है, जब हिंसा या महिला के चरित्र को हल्के ढंग से प्रदर्शित किया जाता है. जब आप इन मुद्दों को हल्के ढंग से या कॉमेडी के रूप में दिखाते हैं, तो इसका असर अलग तरह से पड़ता है.'
उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि यह सब मजाक, ह्यूमर, 'ये तो होता है' के रूप में हो जाता है, तो आवश्यक है कि हम उन चीजों को देखें.' इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि जब कोई आपको गाली देता है तो आप उसे पकड़ लेते हैं, लेकिन आपको उस वक्त उसे पकड़ने की आवश्यकता है, जब वह गाली ना देते हुए भी आपको गाली दे रहा हो.
'साहित्य आजतक' का यह कार्यक्रम फ्री है, पर इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है. इसके लिए आप 'आजतक' और हमारी दूसरी सहयोगी वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर जाकर या फिर 7836993366 नंबर पर मिस्ड कॉल करना भर होगा, और आपका पंजीकरण हो जाएगा. तो आइए साहित्य के इस महाकुंभ में, हम आपके स्वागत के लिए तैयार हैं.