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मुझे अपने देशप्रेम पर भरोसा, परवाह नहीं कोई क्या कहेगा: जावेद अख्तर

साहित्य आजतक के मंच पर दर्शकों से रूबरू हुए. उन्होंने यहां अपनी मशहूर पंक्तियों, शायरी को लोगों को सुनाया और सभी का मन मोह लिया. जावेद अख्तर ने सुनाया...''मुझे ऐसा लगता है कि किसी ने साजिश रची है.''

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साहित्य आजतक के मंच पर जावेद अख्तर
साहित्य आजतक के मंच पर जावेद अख्तर

साहित्य आजतक के मंच पर मशहूर लेखक और शायर जावेद अख्तर ने खुले दिल से अपनी बातें रखीं. जावेद अख्तर ने मंच से राष्ट्रवाद से लेकर देशप्रेम से जुड़े मुद्दों पर बात की. देशप्रेम के मुद्दे पर जावेद अख्तर ने कहा कि मुझे अपने देशप्रेम पर बहुत भरोसा है, इसलिए कोई क्या कहेगा मुझे इसकी परवाह नहीं है.

साहित्य आजतक के मंच दस्तक दरबार के 'साहित्य और हम' सेशन में जावेद अख्तर ने बताया कि वह अभी दो दिन पाकिस्तान में गुजार कर आ रहे हैं, वहां पर भी उनपर सवाल उठाने वाले बहुत थे.

उन्होंने कहा कि जिस देश में हम पैदा हुए वहां पर ही लोग हमें खरी-खोटी सुना देते हैं तो वहां किसी ने क्या कहा उससे कोई फर्क नहीं किया. जावेद अख्तर बोले कि आज बुरे लगते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व नया-नया खतरे में आया है, इस्लाम तो बरसों से खतरे में है. हिंदुत्व पर खतरा आए दो-तीन साल ही हुए हैं, हर किसी को अपने देश से प्यार है.

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मशहूर लेखक ने कहा कि देश में ऐसा कोई नहीं हो सकता जिसे अपने मुल्क से प्यार ना हो, ये सब प्राकृतिक है. हर व्यक्ति को अपने शहर से प्यार होता है, हर किसी को देश से प्यार होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मैं किसी से नफरत करता हूं. हमारे सभ्यता में रहा है कि असहमत होना पाप नहीं है.

उन्होंने कहा कि हर किसी को देश का छोटा सा हिस्सा दिया गया है, उस व्यक्ति के पास अपनी गली है मोहल्ला है लेकिन क्या वह अपनी उस जगह से प्यार करता है, बात देश से प्यार करने की हो रही है.

जावेद अख्तर बोले कि लोकतंत्र में अलग विचार होना जरूरी है, अगर एक विचार हो तो दिक्कत है. जो लोग देश को हिट करना चाहते हैं वो कम्युनल नहीं होंगे.

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