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पीकू में अमिताभ की मौत का सीन लिख रोई थीं राइटर, 10 दिन रहा सदमा

विकी डोनर और पीकू जैसी फिल्में लिखने वालीं जूही चतुर्वेदी ने साहित्य आज तक 2018 में शिरकत की.

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साहित्य आज तक में जूही चतुर्वेदी
साहित्य आज तक में जूही चतुर्वेदी

विकी डोनर और पीकू जैसी फिल्में लिखने वालीं जूही चतुर्वेदी ने साहित्य आज तक 2018 में शिरकत की. पिछले दिनों उनकी लिखी फिल्म अक्टूबर को काफी सराहा गया. उन्होंने अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म पीकू से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर कीं. इस सेशन को सईद अंसारी ने मॉडरेट किया.  

जूही चतुर्वेदी ने कहा, पीकू लिखते समय जब भास्कर की डेथ हुई मैंने लिखा, एंड देन ही इज नो मोर. मैंने उस समय अपना लैपटॉप बंद किया और मैं इतना रोई कि कह नहीं सकती. जैसे मैंने किसी अपने को खो दिया हो. इस सीन के आगे मुझसे लिखा नहीं गया. करीब 10 दिन तक मैं उस मूड से बाहर ही नहीं निकल पा रही थी. जब मेरे पति ने नोटिस किया तो उन्होंने लिखा, इसे डिलीट कर दो. किसी को पढ़ाया नहीं है अभी तुमने. कहीं भेजा भी नहीं आपने. तुम सीन में हॉस्पिटल का प्लाट लेकर आओ. हमारी बहसें हुई.

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इसके बाद मैंने कहा, मैं ऐसा नहीं कर सकती. जब तक आपकी अपनी राइटिंग आप पर असर न करे, तब तक किसी और को कैसे पसंद आ सकती है. कई बार हम हर चीज खुद के लिए नहीं लिखते. लिखने की जो प्रोसेस है उसमें सुख नहीं है. आपको तमाम चीजें बंद करनी पड़ती हैं. लेकिन फिर भी उन शब्दों, ख्यालों या कहानी की नब्ज होती है जो आपको जकड़ कर रखती है. ऐसी कहानी में उम्मीद होती है कि वो दर्शकों को पकड़ कर रखती है.

''फिल्म लिखने के बारे में नहीं सोचा था''

जूही ने कहा, "लखनऊ में थी तो मैं आर्ट्स कॉलेज में जाती थी. तब इतना था कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए इलेस्ट्रेशन किया करती थी. कुछ ख्याल आते थे, लिख देती थी. कभी फिल्म लेखन के बारे में सोचा ही नहीं था." 

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