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साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: 'सिनेमा' श्रेणी में बलराज साहनी, दिलीप कुमार, अमिताभ और मनोज बाजपेयी के अलावा और कौन

'साहित्य तकः बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों की 17 श्रेणियों में आज 'सिनेमा' विधा की उन पुस्तकों की बात जो वाकई अनूठी हैं. इसमें बलराज साहनी, राज कपूर, गुरुदत्त, अमिताभ बच्चन, नीना गुप्ता और मनोज बाजपेयी के अलावा और किनके जीवन-कर्म पर लिखी पुस्तकें शामिल हैं- पढ़ें, पूरी सूची

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साहित्य तक 'बुक कैफे टॉप 10': 'सिनेमा' श्रेणी
साहित्य तक 'बुक कैफे टॉप 10': 'सिनेमा' श्रेणी

भारतीय मीडिया जगत में जब 'पुस्तक' चर्चाओं के लिए जगह छीजती जा रही थी, तब इंडिया टुडे समूह के साहित्य के प्रति समर्पित डिजिटल चैनल 'साहित्य तक' ने हर दिन किताबों के लिए देना शुरू किया. इसके लिए एक खास कार्यक्रम 'बुक कैफे' की शुरुआत की गई... और इसी 'बुक कैफे टॉप 10' की शृंखला में आज 'भाषा-आलोचना' की पुस्तकें.
साल 2021 की जनवरी में शुरू हुए 'बुक कैफे' को दर्शकों का भरपूर प्यार तो मिला ही, भारतीय साहित्य जगत ने भी उसे खूब सराहा. तब हमने कहा था- एक ही जगह बाजार में आई नई किताबों की जानकारी मिल जाए, तो किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए इससे लाजवाब बात क्या हो सकती है? अगर आपको भी है किताबें पढ़ने का शौक, और उनके बारे में है जानने की चाहत, तो आपके लिए सबसे अच्छी जगह है साहित्य तक का 'बुक कैफे'. 
हमारा लक्ष्य इन शब्दों में साफ दिख रहा था- "आखर, जो छपकर हो जाते हैं अमर... जो पहुंचते हैं आपके पास किताबों की शक्ल में...जिन्हें पढ़ आप हमेशा कुछ न कुछ पाते हैं, गुजरते हैं नए भाव लोक, कथा लोक, चिंतन और विचारों के प्रवाह में. पढ़ते हैं, कविता, नज़्म, ग़ज़ल, निबंध, राजनीति, इतिहास, उपन्यास या फिर ज्ञान-विज्ञान... जिनसे पाते हैं जानकारी दुनिया-जहान की और करते हैं छपे आखरों के साथ ही एक यात्रा अपने अंदर की. साहित्य तक के द्वारा 'बुक कैफे' में हम आपकी इसी रुचि में सहायता करने की एक कोशिश कर रहे हैं."
हमें खुशी है कि हमारे इस अभियान में प्रकाशकों, लेखकों, पाठकों, पुस्तक प्रेमियों का बेपनाह प्यार मिला. इसी वजह से हमने शुरू में पुस्तक चर्चा के इस साप्ताहिक क्रम को 'एक दिन, एक किताब' के तहत दैनिक उत्सव में बदल दिया. साल 2021 में ही हमने 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' की शृंखला भी शुरू की. उस साल हमने केवल अनुवाद, कथेतर, कहानी, उपन्यास, कविता श्रेणी में टॉप 10 पुस्तकें चुनी थीं.
साल 2022 में हमें लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों से हज़ारों की संख्या में पुस्तकें प्राप्त हुईं. पुस्तक प्रेमियों का दबाव अधिक था और हमारे लिए सभी पुस्तकों पर चर्चा मुश्किल थी, इसलिए 2022 की मई में हम 'बुक कैफ़े' की इस कड़ी में 'किताबें मिली' नामक कार्यक्रम जोड़ने के लिए बाध्य हो गए. इस शृंखला में हम कम से कम पाठकों को प्रकाशकों से प्राप्त पुस्तकों की सूचना दे पाते हैं.
आपके प्रिय लेखकों और प्रेरक शख्सियतों से उनके जीवन-कर्म पर आधारित संवाद कार्यक्रम बातें-मुलाकातें और किसी चर्चित कृति पर उसके लेखक से चर्चा का कार्यक्रम 'शब्द-रथी' भी 'बुक कैफे' की ही एक कड़ी का हिस्सा है.
साल 2022 के कुछ ही दिन शेष बचे हैं, तब हम एक बार फिर 'साहित्य तकः बुक कैफे टॉप 10' की चर्चा के साथ उपस्थित हैं. इस साल कुल 17 श्रेणियों की टॉप 10 पुस्तकें चुनी गई हैं. साहित्य तक किसी भी रूप में इन्हें कोई रैंकिंग करार नहीं दे रहा. संभव है कुछ बेहतरीन पुस्तकें हम तक पहुंची ही न हों, या कुछ पुस्तकों की चर्चा रह गई हो. पर 'बुक कैफे' में शामिल अपनी विधा की चुनी हुई ये टॉप 10 पुस्तकें अवश्य हैं. 
पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की 'साहित्य तक' की कोशिशों के प्रति सहयोग देने के लिए आप सभी का आभार.
साहित्य तक 'बुक कैफे-टॉप 10' सिनेमा श्रेणी की पुस्तकें
* बलराज साहनीः मेरे पिता की यादें', परीक्षत साहनी, यह पुस्तक एक इनसान, अभिनेता, पति, दोस्त, पिता तथा देशभक्त के रूप में बलराज साहनी की व्यक्तिगत और अन्तरंग झलकियां प्रस्तुत करती है. भारतीय सिनेमा जगत की इस अनूठी शख्सियत के जीवन की अनकही कहानी के साथ कई अनदेखी तस्वीरें इस पुस्तक को अनूठी बनाती है. यह पुस्तक एक ऐसे सरल व्यक्ति की ज़िंदगी, दौर और उसके असर का उत्सव मनाती है, जिसने अभिनेताओं की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया, और वह क्रम आज भी जारी है. यह पुस्तक अंग्रेजी में The Non-Conformist: Memories of My Father Balraj Sahni नाम से प्रकाशित हुई थी, जिसका हिंदी अनुवाद यामी रामपल्लीवार ने किया है. प्रकाशक-  मंजुल प्रकाशन
* 'अमिताभ बच्चनः जीवन गाथा', पुष्पा भारती, बच्चन परिवार की निकटतम मित्र, संवेदनशील लेखिका पुष्पा भारती ने अमिताभ बच्चन को तब देखा था, जब वे महानायक या बिग बी नहीं हुए थे. 11 अक्तूबर 1942 को जन्मे अमिताभ बच्चन की पहली फ़िल्म 'सात हिन्दुस्तानी' सन्‌ 1969 में प्रदर्शित हुई थी और केवल अटूट परिश्रम व वैविध्यपूर्ण अभिनय कर्म के बल पर लोकप्रियता का इतना विराट प्रभामण्डल उनके हिस्से आया. उनकी  इस सफलता भरी जीवन यात्रा को भारती ने बहुत बार उन्हीं के शब्दों से जाना और रचा है. यह पुस्तक अपने जीवनकाल में ही अपने प्रशंसकों के लिए मिथक बन चुके अमिताभ बच्चन के अनेकानेक मार्मिक और दुर्लभ प्रसंगों, संस्मरणों का ख़ज़ाना है. प्रकाशकः वाणी प्रकाशन
* 'दिलीप कुमार: एक शख्सियत के साए में' फैसल फारूकी. लेखक फैसल ने दस साल की उम्र से जिस साहब को देखा, उसे संस्मरण के रूप में इस किताब में बेहतरीन ढंग से दर्ज कर दिया है. यह पुस्तक दिलीप कुमार को किंवदंती से परे एक आकर्षक व्यक्ति बताती है. फैसल ने शाम की आकस्मिक चाय, कार की सवारी, सूर्यास्त के समय की सैर, जॉगर्स पार्क की देर शाम की बैठकी के बीच के मौन, यहां तक ​​​​कि पवित्र मक्का की तीर्थयात्रा के कई अनुभवों को भी दर्ज किया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. यह पुस्तक किताबों के लिए दिलीप साहब की भूख, उनके जिज्ञासु मन, साहित्य और कविता के प्रति उनके प्रेम, जॉगर्स पार्क के निर्माण में उनकी भूमिका और खाने के उनके शौक को भी बताती है. इसमें दिलीप साहब की जबानी ही सिनेमा का पहला शॉट, बचपन का अनुभव और अनगिनत बातचीत शामिल है. यह भारतीय सिनेमा की सर्वाधिक लोकप्रिय और जहीन शख्सियतों में एक दिलीप कुमार पर अब तक लिखी गई सभी जीवनियों में अलग, विशिष्ट और भावुक है. अंग्रेजी में यह पुस्तक Dilip Kumar: In the Shadow of a Legend A Biography नाम से प्रकाशित हुई है, जिसका रूपांतरण अशोक कुमार शर्मा ने किया है.
* 'सच कहूं तोः मेरी आत्मकथा', नीना गुप्ता. बॉलीवुड की इस अनूठी अदाकारा ने इस आत्मकथा में बड़ी बेबाकी से अपने पुराने दिनों और जीवन संघर्ष को याद किया है. इसमें दिल्ली के करोल बाग में अपने बचपन के दिनों, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अपने समय, 1980 के दशक में बॉम्बे जाने, काम खोजने के संघर्ष और उससे जुड़ी अपनी असाधारण व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा का वर्णन  है. यह उनके जीवन के बड़े पड़ावों, उनकी अपरंपरागत गर्भावस्था, एकल पितृत्व और बॉलीवुड में सफल दूसरी पारी का विवरण भी देती है. यह पुस्तक एक व्यक्तित्व के पीछे मौजूद व्यक्ति का स्पष्ट चित्रण, और जीवन के कई विकल्पों के बारे में बातें करती है. प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इम्प्रिंट के तहत हिंद पॉकेट बुक
* 'राज कपूर: बॅालीवुड के सबसे बड़े शोमैन', राहुल रवेल और प्रणिका शर्मा, अगर सिनेमा नहीं होता, तो मेरा अस्तित्व भी नहीं होता. इस जोशीले, विचारशील संस्मरण से फिल्मकार राहुल रवेल पाठकों को आर.के. स्टूडियो के उन पुराने दिनों में ले जाते हैं, जहां राजकपूर जैसा बेहतरीन निर्देशक, फिल्मकार, कथाकार, इनसान और गुरु मौजूद होता था, और जिससे रवेल ने फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखी थीं. पुस्तक राज कपूर की मानवीय भावनाओं, संगीत के गुणों और कहानी कहने की कला की उनकी समझ के साथ उनके असाधारण फिल्म निर्माता बनने के बारे में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करती है. यह पुस्तक पहले अंग्रेजी में 'Raj Kapoor: The Master at Work' नाम से प्रकाशित हो चुकी है, जिसका हिंदी अनुवाद विपिन चौधरी ने किया है. प्रकाशकः  प्रभात प्रकाशन
 * 'वो भूली दास्तां', राजेन्द्र क्रिशन, संपादन गीताश्री, भारतीय सिनेमा के जानेमाने गीतकार, पटकथा लेखक और फिल्मकार रहे राजेन्द्र क्रिशन की चमक समय के अंधड़ में कहीं छुप सी गई थी.  'मेरे सामने वाली खिड़की में', 'पल पल दिल के पास', 'चल उड़ जा रे पंछी' जैसे कालजयी गीतों के रचनाकार और इस शानदार शख़्स के जीवन के हर पहलू को लेखिका ने अपनी पुस्तक में शामिल किया है. यह राजेन्द्र क्रिशन केन्द्र में रख कर लिखी और संपादित की गयी अपनी तरह की पहली और अनोखी  पुस्तक है, जो उनके संजीदा और विनम्र व्यवहार पर भी प्रकाश डालती है. प्रकाशकः प्रलेक प्रकाशन
 * 'गुरु दत्तः एक अधूरी दास्तान', यासिर उस्मान, यह महान फिल्मकार गुरुदत्त की बेहतरीन जीवनी है. उन्होंने निर्माता, निर्देशक, अभिनेता और फ़ाइनेंसर सभी भूमिकाएं बखूबी निभाईं, पर व्यक्तिगत जीवन में हमेशा जूझते रहे. गुरु के पास प्यार, परिवार, पैसा, प्रसिद्धि और दर्शकों की मान्यता, सब कुछ था, पर शायद प्रेम नहीं. गीता दत्त के साथ उथल-पुथल भरे वैवाहिक जीवन के बीच कई असफल प्रयासों के बाद आत्महत्या से हुई उनकी असामयिक मौत ने पूरे फ़िल्म जगत को झकझोर कर रख दिया. आखिर उस रात को हुआ क्या था, जब उन्होंने जीवन से हार मानते हुए उसे अंतिम अलविदा कह दिया था? यह पुस्तक पहले अंग्रेजी में 'Guru Dutt: An Unfinished Story' नाम से प्रकाशित हुई, जिसका हिंदी अनुवाद महेंद्र नारायण सिंह यादव ने किया है. प्रकाशकः मंजुल प्रकाशन
* 'नीरज की यादों का कारवां', मिलन प्रभात 'गुंजन', यह पुस्तक चर्चित गीतकार नीरज के जीवन के कई अनजाने, अनछुए पहलुओं को उजागर करती है, जिसे उनके बेटे ने ही लिखा है. पुस्तक बताती है कि कैसे  पिता की छत्र-छाया ना होने के कारण नीरजजी का बचपन अभावग्रस्त एवं संघर्षपूर्ण रहा, कि कैसे उनके कविता पाठ की धूम धीरे-धीरे सभी ओर इस तरह फैली और उन्हें फिल्मों के ऑफर आने लगे, तो स्थितियां बदलीं. पुस्तक नीरज जी के ज्योतिष ज्ञान का भी उल्लेख करती है और बताती है कि कैसे नीरज जी ने अपनी और दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु के तारीख तक की भी सही भविष्यवाणी कर दी थी. प्रकाशकः पेंगुइन रैंडम हाउस इम्प्रिंट के तहत हिन्द पॉकेट बुक्स
* 'मैं और माँ', दिव्या दत्ता, यह बॉलीवुड अदाकारा द्वारा लिखा यादगार संस्मरण है, जिसमें वे अपनी मां को याद करते हुए मां-बेटी की अनोखी दोस्ती का बहुत ही सुंदर बखान करती हैं. दिव्या यह बताती है कि मां की जिंदा-दिली और भरोसे ने उन्हें वह बनने में मदद की, जो वह आज हैं. वे अपनी जिंदगी के उन नाजुक लम्हों से भी रूबरू कराती हैं,  जिनमें मां के साथ उनका रिश्ता और भी मजबूत हुआ. यह पुस्तक मां बेटी के लाजवाब रिश्ते, अच्छे-बुरे वक्त, भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में उनकी सफलता को बेहतरीन ढंग से रखकर दिव्या के प्रशंसकों को ही नहीं पुस्तक के पाठकों को भी प्रेरित करती है. प्रकाशकः पेंगुइन रैंडम हाउस इम्प्रिंट के तहत हिन्द पॉकेट बुक्स
* 'मनोज बाजपेयीः कुछ पाने की ज़िद', पीयूष पांडे, यह पुस्तक मनोज बाजपेयी की जीवनी और अभिनय को लेकर उनके ज़िद और जुनून की कहानी बताती है. मसलन- बाजपेयी के पिता भी पुणे के फिल्म इंस्टिट्यूट में ऑडिशन का टेस्ट देने गए थे, उनके पूर्वज अंग्रेजी राज के एक दमनकारी किसान कानून की वजह से उत्तर प्रदेश के रायबरेली से चंपारण आए थे और यह भी कि मनोज बाजपेयी का बचपन उस गांव में बीता है, जहां महात्मा गांधी ने अपने प्रसिद्ध चंपारण सत्याग्रह के दौरान एक रात्रि विश्राम किया था. बाजेपेयी से एक दशक से ज़्यादा समय के जुड़ाव से पीयूष ऐसी घटनाओं और किस्सों के गवाह रहे हैं, जिन्हें मनोज के प्रशंसक नहीं जानते हैं. प्रकाशकः पेंगुइन प्रकाशन
सभी लेखकों, प्रकाशकों, अनुवादकों को बधाई!

 

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