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भावनाओं की सरलता को सहेजती 16 कहानियां...

विनीता मोक्किल ने कहानियां सुनाई हैं, 16 कहानियां. सब की सब कलेवर में छोटी, मगर तेवर में खुलापन लिए. किसी कहानी में मेट्रो सिटी में दरकते-पनपते रिश्ते नजर आते हैं तो कोई कहानी हमें छत्तीसगढ़ में माओवादियों से जूझते परिवार के बीच ले जा पटकती है. इन कहानियों को सुनाने का ढंग सरल है.

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किताब : अ हैप्पी प्लेस एंड अदर स्टोरीज
लेखक: विनीता मोक्किल
कीमत: 275 रु.
प्रकाशक: हार्पर कॉलिंस पब्लिशर्स इंडिया

विनीता मोक्किल ने कहानियां सुनाई हैं. 16 कहानियां. सब की सब कलेवर में छोटी, मगर तेवर में खुलापन लिए. किसी कहानी में मेट्रो सिटी में दरकते-पनपते रिश्ते नजर आते हैं तो कोई कहानी हमें छत्तीसगढ़ में माओवादियों से जूझते परिवार के बीच ले जा पटकती है. इन कहानियों को सुनाने का ढंग सरल है. भाषा ऐसी कि उसके जाल में उलझा न जाए. और आखिर में हर कहानी का एक सिरा इस महादेश की महाराजधानी दिल्ली-एनसीआर से आकर जुड़ता है. इस किताब को महानगर के आख्यान के रूप में पढ़ा जाना चाहिए. हालांकि एक वक्त के बाद कहानियों के अंत में दोहराव सा लगने लगता है. कई जगह कहानी जरूरत से ज्यादा भावुक करने की कोशिश करती है. हर जगह वियोग और दुख संत्रास भी पैदा करने लगता है.

किसी भी लेखक के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होती है कि वह जिस विषय के बारे में अपने पाठकों को बताना चाहता है, उसमें सफल हो. जाहिर है कि मोक्किल इसमें पूरी तरह से कामयाब हुई हैं और यह सिर्फ भाषा या भाव नहीं बल्कि कहानी के कहने के तरीके के चलते भी हुआ है. उन्होंने सिर्फ कल्पनाओं का सहारा नहीं लिया. हकीकत को इस तरह से किस्से में पैबस्त किया कि वह हमें अपनी देखी, जानी और सुनी कहानी लगने लगी. अब जब इस तरह का जुड़ाव बने तो कहानी के आखिरी सिरे तक साथ सफर लाजिमी हो जाता है. अ हैप्पी प्लेस एंड अदर स्टोरीज की एक और खासियत जगह जगह कविता सी लय हासिल करना है. इसके अलावा हर कहानी में सस्पेंस बनाने की भी कोशिश की गई है.

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एक कहानी है 'अ क्वाइट डे', जिसमें एक आत्मघाती महिला के बारे में बताया गया है. अपने पति और बच्चे की मौत का बदला लेने के लिए वह हर जगह मोर्चा खोलती रहती है. कहानी के आखिरी सिरे में संशय की धुंध है, जिसके बीच उस औरत की पवित्र साजिशें जारी हैं. एक और कहानी है. शीर्षक है 'अ केस ऑफ फायर'. इसका नायक है ज्ञान, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है .ज्ञान अक्सर घर के जरुरी समारोह में लेट हो जाता है. लेकिन आज ज्ञान की बेटी का बर्थडे है. उसे हर हाल में टाइम पर पहुंचना है. मगर इस बार उसके रास्ते में बारिश खड़ी है. उसे लगता है कि लेट जाने की पेनल्टी के तौर पर एक गिफ्ट ले जाना होगा. ज्ञान मॉल में पहुंचता है और पीछे से मॉल लॉक हो जाता है. अब ज्ञान है और उसके हाथ में बेटी का गिफ्ट है.

तो पार्टी में टाइम पर पहुंचने के चक्कर में वह बारिश की वजह से और लेट हो जाता है. बेटी को मनाने के लिए मॉल से गिफ्ट खरीदने जाता है जहां ट्रैजडी होती है और ज्ञान मॉल में लॉक हो जाता है. इस कहानी को इतने दिलचस्प तरीके से पेश किया है कि रीडर के मन में उत्सुकता बनी रहती है कि ज्ञान उस रात घर पहुंचा या नहीं.

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इसी तरह से 'बेबी बेबी' कहानी में एक 50 वर्षीय आदमी की बाप बनने की ख्वाहिश को दिखाया गया है. वह अपनी दूसरी बीवी से इस उम्र में बच्चा चाहता है. 'द टेनेन्ट' कहानी एक औरत और उसकी बेटी की है. बेटी नौकरी और विधवा मां के बीच में नौकरी को चुनती है. मां अपनी देखभाल के लिए एक लड़की रखती है, जिसका नाम वही है, जो उसकी बेटी का है.

जिस कहानी से किताब का टाइटल निकला, उसमें भी इमोशन का ही खेल है. ‘अ हैप्पी प्लेस’ आशा के बारे में है, जो छत्तीसगढ़ में अपने छोटे से परिवार के साथ खुशी से जिंदगी बिता रही थी. एक दिन उसका पूरा परिवार माओवादियों ने छीन लिया. आशा दिल्ली आ गई और एक अमीर घराने में मेड के रूप में काम करने लगी. यह जगह हर लिहाज से एक हैप्पी प्लेस थी. काम था. पगार थी और दिल बहलाने के लिए मैडम का पीटर नाम का एक छोटा बच्चा भी. मगर एक दिन आशा हैप्पी प्लेस से रूठ गई.

किताब की कहानियों में इमोशनल डिटेल्स पर बहुत जोर है. इसे ध्यान में रखकर ही पढ़ने की शुरुआत करें.

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