अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है, जिसके कारण मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और उसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है. आमतौर पर यह मध्यम उम्र या वृद्धावस्था में दिमाग के ऊतकों को नुकसान पहुंचने के कारण होता है. यह डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याद्दाश्त, सोचने की क्षमता, रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है.
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अल्जाइमर रोग विशेष रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करता है. इसे डिमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है. इस बीमारी में मरीज की याद्दाश्त कमजोर हो जाती है और इसका असर व्यक्ति के मानसिक कार्यों पर भी पड़ता है.
हेल्थ एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि अल्जाइमर रोग में दिमाग के ऊतकों को नुकसान पहुंचने लगता है. इसके करीबन 10 साल बाद व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे याद्दाश्त कमजोर होना. इसमें दिमाग की कोशिकाएं डी-जनरेट होकर मरने लगती हैं, इसलिए इसका असर याद्दाश्त एवं अन्य मानसिक कार्यों पर पड़ता है.
अल्जाइमर रोग दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करता है. अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की उम्र आमतौर पर अधिक होती है. लेकिन यह एजिंग या उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण नहीं है. अल्जाइमर का सही कारण अब तक ज्ञात नहीं है. हालांकि पाया गया है कि यह आनुवंशिक कारकों, डिप्रेशन, सिर की चोट, उच्च रक्तचाप, मोटापे के मरीजों में अधिक होता है.
उन्होंने कहा कि अल्जाइमर में मरीज की याद्दाश्त चली जाती है. इसका असर मरीज के मानसिक कार्यों और पहचानने की क्षमता पर भी पड़ता है.
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अल्जाइमर के मरीज के व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं, जैसे गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अपने शब्दों को दोहराना, बेचैनी, एकाग्रता में कमी, बेवजह कहीं भी घूमते रहना और खो जाना, रास्ता भटकना, मूड में बदलाव, अकेलापन, मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे डिप्रेशन, हैल्यूसिनेशन या पैरानोइया भी हो सकती हैं.
शुरुआत में लक्षणों को देखकर अक्सर लोग यह समझते हैं कि ऐसा उम्र बढ़ने के कारण हो रहा है. हालांकि अल्जाइमर का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती अवस्था में निदान के द्वारा मरीज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है. एक न्यूरोलॉजिस्ट ही समय पर इसकी पहचान कर सकता है. इसके लिए पूर्ण जांच एवं न्यूरो इमेजिंग की जरूरत होती है, क्योंकि कई बार इसके निदान के समय भ्रमित हो जाने का शक होता है.
अल्जाइमर के लक्षण-
- चीजों को भूलना.
- सोचने-समझने में मुश्किल होना.
- खासतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना.
- एकाग्रता में कमी, नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी.
- लोगों को पहचानने में मुश्किल होना.