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भारतीयों में बढ़ा दूसरी शादी का ट्रेंड, 36 नहीं अब बस पार्टनर में ढूंढ़ रहे ये एक गुण

भारत में शादी अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि करियर और मानसिक तैयारी के बाद लिया जाने वाला फैसला बन गया है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शादी की औसत उम्र बढ़कर 29 साल हो गई है. इसके साथ ही, दूसरी शादी को लेकर सामाजिक मिथक टूट रहे हैं और लोग जाति से ज्यादा आपसी समझ को महत्व दे रहे हैं.

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शादी को लेकर लोगों के विचार बदल गए हैं. (PHOTO:ITG)
शादी को लेकर लोगों के विचार बदल गए हैं. (PHOTO:ITG)

शादी को लेकर अब भारतीयों की सोच काफी बदल चुकी है, जहां शादी को सबसे जरूरी माना जाता था. अब शादी को करियर और जॉब के बाद देखा जा रहा है. लड़का हो या लड़की हर कोई पहले अपना करियर बनाना चाहते हैं और उसके बाद ही शादी के बारे में सोचना चाहते हैं. अब एक नई रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ है कि शादी की औसत उम्र में भी अब काफी बदलाव हो चुका है, इतना ही नहीं इसके साथ ही दूसरी शादी को लेकर भी अब लोग अब काफी नॉर्मल हो गए हैं. 

मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म जीवनसाथी की तरफ से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि जहां 10 साल पहले भारतीय युवाओं के लिए शादी की औसत उम्र 27 साल थी. वहीं अब यह उम्र 29 साल हो गई है, अब 29 साल की उम्र के बाद ही भारतीय शादी करने के बारे में सोच रहे हैं और इसके पीछे की वजह हैं करियर, फाइनेंशियल स्ट्रेंथ और मेंटली शादी के लिए तैयार होना. इन सभी चीजों के बाद ही लोग शादी करने जैसा बड़ा कदम उठा रहे हैं.

29 की उम्र में शुरू हो रही है पार्टनर सर्च

सामने आई लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, अब आधे से ज्यादा सिंगल्स 29 साल की उम्र में अपने लिए पार्टनर सर्च करना शुरू करते हैं. जबकि पहले के समय में बच्चे जैसे ही 18 साल के होते थे, उनके माता-पिता उनकी शादी कराने की तैयारी में जुट जाते हैं. मगर 29 साल के उम्र में जाकर लोग शादी के बारे में सोच रहे हैं, यह बदलाव बताता है कि शादी अब जल्दबाजी का फैसला नहीं रह गया है, बल्कि सोच-समझकर लिया जाने वाला कदम बन गया है.

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दूसरी शादी में 43% की बढ़ोतरी

सिर्फ शादी की उम्र में ही इजाफा नहीं हुआ है, बल्कि इससे भी ज्यादा शॉकिंग बात यह है कि दूसरी शादी यानी रीमैरिज के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, रीमैरिज के मामलों में 43 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां साल 2016 में 11 प्रतिशत लोग दूसरी शादी की तलाश कर रहे थे. वहीं साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई. 

दूसरी शादी को लेकर टूटा मिथक

जहां पहले शादी टूटना समाज में एक बड़ी बात होती थी, लड़का हो या लड़की दोनों की अगर एक बार शादी टूट जाती थी, तो दोबारा शादी में काफी दिक्कत होती थी. लेकिन अब लोगों की सोच में बहुत बदलाव आ गया है, क्योंकि अब हर छह सक्सेसफुल शादियों में से एक दूसरी शादी है.

इससे भी ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि ताजा रिपोर्ट में तलाकशुदा प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाने वालों में 15 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी शादी नहीं की. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि लोगों के बीच दूसरी शादी को लेकर पहले जो मिथक था, वो अब काफी हद तक खत्म हो चुका है. 

शादी में कम्पैटिबिलिटी है सबसे जरूरी

पहले जहां ज्यादातर लोग शादी में जाति को बहुत अहम मानते थे, अब यह सोच बदल रही है. करीब 90 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उनके लिए सही स्वभाव और आपसी समझ वाला पार्टनर मिलना, उम्र या कमाई से ज्यादा जरूरी है. 2016 में 91 प्रतिशत लोग जाति को जरूरी मानते थे, लेकिन 2025 तक यह संख्या घटकर 54 प्रतिशत ही रह गई है.

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मेट्रो सिटीज में तो जाति की अहमियत और भी कम हो गई है, वहां सिर्फ करीब 49 प्रतिशत लोग ही इसे जरूरी मानते हैं. यानी अब लोग शादी में जाति, उम्र या सैलरी से ज्यादा आपसी समझ और सही साथी को महत्व दे रहे हैं. अब 77 प्रतिशत लोग अपनी मैट्रिमोनी प्रोफाइल खुद बनाते और संभालते भी हैं.

पहले यह आंकड़ा 67 प्रतिशत था. जिन प्रोफाइल को परिवार  मैनेज करते हैंं अब घटकर 23 प्रतिशत ही रह गए हैं. फिर भी 69 प्रतिशत लोगों का मानना है कि माता-पिता के बीच में होने से यह प्रोसेस आसान बन जाता है. यानी शादी अब सेल्फ-ड्रिवन है, लेकिन परिवार की भूमिका खत्म नहीं हुई है.

 

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