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इंसानों का खून लाल ही क्यों होता है...नीला या हरा क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का 'हेल्थ कनेक्शन'

इंसानूी शरीर में खून का रंग लाल होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंसानी खून का रंग लाल या डार्क लाल ही क्यों होता है. तो आइए रिसर्च और एक्सपर्ट ने इसके पीछे का क्या कारण बताया है.

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इंसानी खून का सीधा संबंध बायोकेमिस्ट्री से है. (Photo: ITG)
इंसानी खून का सीधा संबंध बायोकेमिस्ट्री से है. (Photo: ITG)

मानव शरीर में खून केवल एक लिक्विड पदार्थ नहीं बल्कि काफी अहम होता है. खून के मुख्य काम की बात करें तो यह फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर की हर कोशिका तक पहुंचाता है और वहां से कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालता है. इसके अलावा पोषक तत्वों, हार्मोन और विटामिन को अंगों तक ले जाना और अपशिष्ट पदार्थों को किडनी तक ले जाना भी खून का ही काम होता है. एक सामान्य वयस्क के शरीर के करीब 5 से 6 लीटर खून होता है जो इंसानी शरीर का लगभग 7 से 8 प्रतिशत हिस्सा होता है. 

खून का रंग मुख्यत: लाल (Red) होता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खून का रंग लाल ही क्यों होता है? नीला, पीला या हरा क्यों नहीं होता? दरअसल, इसके पीछे एक साइंस काम करता है जिसके कारण खून का रंग लाल ही होता है. तो आइए उस कारण को जान लेते हैं.

'हीम' के कारण होता है लाल रंग

Medicalnewstoday के मुताबिक, हमारे खून का लाल रंग हीमोग्लोबिन नाम के एक खास प्रोटीन की वजह से होता है. हीमोग्लोबिन चार छोटी प्रोटीन कड़ियों से मिलकर बना होता है, जिनमें 'हीम' (Heme) नाम का एक हिस्सा जुड़ा होता है. इस 'हीम' के बीच में आयरन (Iron) होता है, जो ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही लाल रंग का चमकने लगता है. चूंकि हमारे खून की लाखों कोशिकाओं में यही हीमोग्लोबिन भरा होता है, इसलिए हमें पूरा खून लाल दिखाई देता है.

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खून में मौजूद आयरन जब ऑक्सीजन को पकड़ता है तो वह चमकने लगता है. यही वजह है कि फेफड़ों से ताजी ऑक्सीजन लेकर निकलने वाला खून चमकीला लाल होता है. लेकिन जब शरीर के अंगों को ऑक्सीजन देकर खून वापस लौटता है तो उसका रंग फीका पड़कर गहरा लाल हो जाता है. याद रखें, नसों में दिखने के बावजूद हमारा खून कभी नीला नहीं होता.

उदाहरण के लिए जैसे दूध में हल्दी डालने के बाद दूध का रंग पीला हो जाता है, उसी तरह हमारे खून का लाल रंग 'हीम' के कारण दिखता है. लाल रंग यह दिखाता है कि हीमोग्लोबिन अपना काम (ऑक्सीजन सर्कुलेट करना) सही से कर रहा है.

ऑक्टोपस या कुछ केकड़ों में खून का रंग नीला होता है. उनके खून में हेमोसायनिन नाम का प्रोटीन होता है, जिसमें कॉपर अधिक होता है और वो ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही नीला चमकने लगता है.

ह्यूस्टन TX में MD एंडरसन कैंसर सेंटर के हेमेटोपैथोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. सर्जियो पिना ओविएडो और उनकी टीम के मुताबिक, 'इंसानी शरीर में खून के रंग का सीधा संबंध बायोकेमिस्ट्री यानी उनके अंदर होने वाले रासायनिक बदलावों से है. इंसानी शरीर में खून का लाल रंग मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है, इम्यूनिटी मजबूत रखता है और कुछ मामलों में फिजिकल अट्रैक्शन बढ़ाने में मददगार साबित होता है'

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धातुओं का बैलेंस कितना जरूरी

हीमोग्लोबिन एक ऐसी मशीन की तरह काम करता है जो धातुओं और प्रोटीन के अच्छे बैलेंस से हमारे पूरे शरीर को जीवित रखने के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करती है.

जानकारी के मुताबिक, जब आयरन ऑक्सीजन के साथ बॉन्ड बनाता है तो लाल रंग देता है. ठीक वैसे ही जैसा जंग लगने पर लोहा लाल-भूरा हो जाता है. उदाहरण से समझें तो पौधों की पत्तियों में आयरन की जगह मैग्नीशियम होता है जिससे वो हरी हैं. वहीं कुछ समुद्री जीवों के खून में कॉपर होता है जिससे उनके खून का रंग नीला दिखाई देता है.

इन पूरे मेटल्स की प्रोसेस का कंट्रोल हमारे जेनेटिक्स करते हैं. यदि हमारे जेनेटिक्स में कोई खराबी आ जाए तो हीमोग्लोबिन का बैलेंस बिगड़ने लगता है जिससे थैलेसीमिया या सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. 

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