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विराट कोहली ने 'वीगन' इंक से गुदवाया टैटू, क्या है इस स्याही की खासियत?

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ने हाल ही में अपनी बॉडी पर नया टैटू बनवाया है जो खास तौर पर वीगन इंक से बना है. यह इंक पूरी तरह से प्लांट-बेस्ड और क्रुएल्टी-फ्री होती है. इसके बारे में विस्तार से आर्टिकल में जानेंगे.

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विराट कोहली को टैटू बनवाना काफी पसंद है. (Photo: Instagram)
विराट कोहली को टैटू बनवाना काफी पसंद है. (Photo: Instagram)

Virat kohli vegan tattoo: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली एक बार फिर सुर्खियों में हैं. दरअसल, विराट ने अपनी बॉडी पर कुछ नए टैटूज बनवाए हैं जिनकी फोटोज सोशल मीडिया पर काफी पसंद की जा रही हैं. हालांकि विराट की बॉडी पर पहले से ही काफी सारे टैटू थे लेकिन इस बार का टैटू कुछ खास है. रिपोर्ट के अनुसार, विराट ने जो नया टैटू बनवाया है उसे खास तौर पर 'वीगन इंक' से बनाया गया है. हालांकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि  विराट लंबे समय से प्लांट-बेस्ड डाइट फॉलो कर रहे हैं और अब उनकी यह पसंद उनके टैटू में भी झलक रही है. आखिर ये इंक क्या होती है, कैसे बनती है और स्किन के लिए कितनी सुरक्षित है, इस बारे में भी जान लीजिए.

वीगन टैटू इंक क्या है?

आमतौर पर टैटू बनाने के लिए जिन इंक का प्रयोग होता है, कई बार उनमें एनिमल पार्टिकल्स से जिलेटिन, बोन चार (हड्डियों की राख) या ग्लिसरीन (जो जानवरों की चर्बी से मिल सकता है) शामिल होते हैं. लेकिन वीगन टैटू इंक में एनिमल से लिया गया कोई भी पार्टिकल नहीं होता. 

वर्ल्ड फेमस टैटू इंक की वेबसाइट के अनुसार, ये 100% क्रुएल्टी-फ्री इंक होती है. इसकी एनिमल टेस्टिंग नहीं होती और EU स्टैंडर्ड्स फॉलो करता है. ये प्लांट-बेस्ड या सिंथेटिक मटेरियल से बनता है, जो स्किन के लिए ज्यादा सेफ माना जाता है.

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. दीपाली भारद्वाज का कहना है कि ये महज लाइफस्टाइल चॉइस है, हेल्थ में कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता. वर्ल्ड फेमस टैटू इंक जैसी कंपनियां इसे प्लांट-बेस्ड और सेफ बताती हैं. वीगन और ब्लैक इंक में मेडिकल डिफरेंस कम है. ये स्किन सेंसिटिविटी पर डिपेंड करता है. टैटू सेफ्टी हाइजीन, क्वालिटी और आफ्टरकेयर पर निर्भर है.

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क्यों बेहतर मानी जाती है वीगन इंक?

रिपोर्ट बताती है कि वीगन इंक का इस्तेमाल करना न केवल पर्यावरण और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता है, बल्कि यह त्वचा के लिए भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. पारंपरिक स्याही में कभी-कभी हैवी मेटल्स होती हैं, जबकि वीगन इंक में ऑर्गेनिक पिगमेंट का उपयोग किया जाता है. इससे त्वचा में जलन या एलर्जी का खतरा कम होने की संभावना रहती है, हालांकि एक्सपर्ट्स टैटू बनवाने से पहले पैच टेस्ट की सलाह जरूर देते हैं.

विराट की फिटनेस और वीगन लाइफस्टाइल

विराट कोहली ने कुछ साल पहले अपनी डाइट से नॉन-वेज और डेयरी प्रोडक्ट्स को पूरी तरह हटा दिया था. उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि वीगन डाइट ने उनकी रिकवरी और एनर्जी लेवल को बढ़ाने में काफी मदद की है. अब टैटू के लिए वीगन इंक चुनना यह साफ करता है कि कोहली अपनी वैल्यूज को लेकर कितने पक्के हैं. 


 

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