Soft vs Hard Belly Fat: अक्सर हम शीशे के सामने खड़े होकर अपने बढ़ते हुए पेट को देखते हैं और परेशान होते हैं. अधिकतर भारतीयों में बढ़ते पेट की समस्या देखने को मिलती है, लटकती तोंद जैसे अब हर किसी के लिए परेशानी बन गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर तरह का मोटापा एक जैसा नहीं होता? पेट की चर्बी भी दो तरीके से होती है और सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात यह है कि इन दोनों में से एक फैट हमारे शरीर में होने वाली कई बीमारियों का कारण भी बनता है. जिसके बारे में बहुत कम लोगों को मालूम होता है, जिसकी वजह से लोग खतरे को पहचानने की बजाय उसे अनदेखा कर देते हैं.
अगर आपके पेट की चर्बी मुलायम और हिलने-डुलने वाली है, तो यह अलग बात है. लेकिन अगर आपका पेट बाहर निकला हुआ है और छूने पर सख्त लगता है, तो यह खतरे की बहुत बड़ी घंटी है. इस बारे में वसंत कुंज स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्सया जिन्हें 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने पेट में जमा चर्बी के बारे में बताया है. उनके मुताबिक, पेट का यह सख्त होना आपके शरीर के अंदर चल रही गंभीर बीमारियों का संकेत है.
पेट की चर्बी दो तरह की होती है.
सॉफ्ट बेली फैट: यह वह चर्बी है जो आपकी त्वचा के ठीक नीचे होती है.इसे आप अपनी उंगलियों से पकड़ सकते हैं या चुटकी में भर सकते हैं. चलने पर यह हिलती है.यह देखने में भले ही बुरी लगे, लेकिन यह मेडिकल रूप से उतनी खतरनाक नहीं होती है.
हार्ड बेली फैट: यह चर्बी स्किन के नीचे नहीं, बल्कि आपके पेट के अंदर गहराई में होती है. यह आपके शरीर के अंगों के बीच की खाली जगह को भर देती है. चूंकि यह अंदर से दबाव डालती है, इसलिए पेट बाहर की तरफ फूल जाता है और छूने पर सख्त या ठोस लगता है. इसे आप चुटकी में नहीं पकड़ सकते.इसलिए डॉक्टर इसे साइलेंट किलर कहते हैं.
डॉक्टर्स बताते हैं कि हार्ड फैट यानी विसरल फैट सिर्फ स्टोरेज नहीं है, बल्कि यह एक एक्टिव ऑर्गन की तरह काम करता है. यह शरीर में खतरनाक रसायनों और हार्मोन्स का रिसाव करता है.
इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज: हार्ड फैट एक खास तरह का प्रोटीन छोड़ता है, जो इंसुलिन के काम में रुकावट डालता है. इसका सीधा मतलब है कि आपके ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है. यही कारण है कि 'सख्त पेट' वाले लोगों को टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.
लिवर की बर्बादी: चूंकि यह फैट पेट के हिस्सों के आसपास लिपटा होता है, इसका सबसे पहला शिकार लिवर बनता है. हार्ड फैट फ्री फैटी एसिड्स को सीधे पोर्टल वेन के जरिए लिवर में भेजता है. इससे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) की समस्या शुरू हो जाती है, जो आगे चलकर लिवर सिरोसिस का कारण बन सकती है.
हार्ट और ब्लड प्रेशर: यह चर्बी शरीर में इंफ्लेमेशन यानी अंदरूनी सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स छोड़ती है. यह सूजन नसों को संकरा कर देती है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
हार्मोनल गड़बड़ी: महिलाओं में हार्ड फैट पुरुष हार्मोन बढ़ा सकता है, जिससे PCOD की समस्या होती है. वहीं पुरुषों में यह टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम कर सकता है.
फोर्टिस के डॉक्टर के अनुसार, आपका पेट बाहर निकला हुआ है लेकिन वह लटकने के बजाय तना हुआ है. आप सांस अंदर खींचते हैं, लेकिन पेट पूरी तरह अंदर नहीं जाता. आपकी वेस्ट लाइन पुरुषों में 40 इंच और महिलाओं में 35 इंच से ज्यादा है. अगर आपको यह सभी लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.
अच्छी खबर यह है कि हार्ड फैट जितनी तेजी से आता है, सही लाइफस्टाइल से उतनी ही तेजी से जाता भी है.
अगर आपका पेट 'सॉफ्ट' है, तो वह कॉस्मेटिक चिंता है, लेकिन अगर पेट 'हार्ड' है, तो वह एक मेडिकल इमरजेंसी की शुरुआत है. इसे नजरअंदाज न करें और आज ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं.
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.